फिल्म शोले का डायलॉग 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई' तो आप सभी को याद होगा. उनका ये डायलॉग बहुत मशहूर हुआ था और आज भी उन्हें इस डायलॉग के लिए जाना जाता है. ए के हंगल को फिल्मों में उनके बढ़िया काम के
लिए जाना जाता है. लेकिन फिल्मों में जितनी अच्छी परफॉरमेंस वो दिया करते
थे उतना बढ़िया उनका जीवन नहीं था.
हंगल का करियर
बॉलीवुड में जितना अच्छा था, उन्हें अपने निजी जीवन में उतनी ही दिक्कतों
का सामना करना पड़ा था. आइये आपको बताते हैं आपको उनके बारे में कुछ अनजानी
बातें -
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फिल्म शोले में चाचा का किरदार निभाने वाले हंगल जवानी के दिनों में एक दम अलग
दिखा करते थे. उनके जवानी के दिनों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से
वायरल हो रही है. इस तस्वीर में हंगल बिलकुल अलग नजर आ रहे हैं.
ए के हंगल का जन्म 1 फरवरी 1914 को सिआलकोट (पाकिस्तान) में हुआ था. उनका
पूरा नाम अवतार किशन हंगल था और वे कश्मीरी पंडित परिवार के थे. उन्होंने
अपना बचपन और जवानी पेशावर (पाकिस्तान) में बिताई थी.
हंगल
ने 50 साल की उम्र के बाद सिनेमा की दुनिया में कदम रखा था. सिनेमा में
आने से पहले उन्होंने कई अलग-अलग काम किए थे. अपने शुरूआती दिनों में वे
टेलर हुआ करते थे. वे भारत को आजादी दिलाने के संघर्ष में भी शामिल थे.
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उन्होंने 1936 में पेशवर में श्री संगीत प्रिय मंडल नाम का थिएटर ग्रुप
जॉइन किया था, जिसके बाद उन्होंने कई थिएटर प्ले में काम किया. पिता के
रिटायरमेंट के बाद ए के हंगल का पूरा परिवार पेशावर से कराची शिफ्ट हो गया
था. तीन साल पाकिस्तान की जेल में रहने के बाद हंगल साल 1949 में मुंबई
शिफ्ट हुए थे.
ए के हंगल थियेटर ग्रुप आईपीटीए से भी जुड़े थे, जिसमें उनके साथ बलराज
साहनी और कैफी आजमी भी थे. ए के हंगल की पहली फिल्म बासु भट्टाचार्य की
'तीसरी कसम' थी जो कि साल 1966 में रिलीज हुई थी.
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70 से 90 के दशक तक ए के हंगल ने ज्यादातर फिल्मों में लीड रोल निभा रहे
एक्टर के पिता या रिश्तेदार का रोल निभाया है. उन्होंने 1972 से लेकर 1996
तक के समय में राजेश खन्ना की 16 फिल्मों में काम किया था. ए के हंगल का
निभाया गया रहीम चाचा का किरदार आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है जिसमें
उन्होंने जान डाल दी थी.
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ए के हंगल ने कई बॉलीवुड फिल्मों में बेहतरीन काम किया है. इनमें नमक हराम,
शौकीन, शोले, अवतार, अर्जुन, आंधी, तपस्या, कोरा कागज, बावर्ची, छुपा
रुस्तम, चितचोर, बालिका वधू और गुड्डी शामिल हैं. हंगल ने अपने करियर में
करीब 225 फिल्मों में काम किया था. उन्होंने आखिरी बार टीवी सीरियल मधुबाला
में साल 2012 में कैमियो किया था.
कहा जाता
है कि शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने साल 1993 में ए के हंगल की फिल्मों पर
बैन लगा दिया था. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें हंगल का पाकिस्तान के नेशनल डे
पर हिस्सा लेना पसंद नहीं था.
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साल 2011 में उन्होंने डिजाइनर रियाज गंजी के लिए मुंबई में व्हीलचेयर पर
बैठकर रैंप वॉक किया था. उन्हें साल 2006 में भारतीय सिनेमा में अपने
योगदान के लिए पद्मभूषण पुरस्कार से नवाजा गया था.
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कई बेहतरीन फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले एके हंगल का निधन
98 साल की उम्र में 26 अगस्त 2012 को हुआ. आखिरी दिनों में उन्हें निजी
जिंदगी में काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. बढ़ती उम्र के
चलते उन्होंने काम करना बंद कर दिया था और वे बीमार रहने लगे थे. काम ना
होने की वजह से उन्हें आर्थिक दिक्कतें हुई थी.
कहा
जाता है कि ए के हंगल के बेटे ने जब इलाज के लिए पैसे ना होने की बात बताई
थी तो उस वक्त अमिताभ बच्चन ने उन्हें इलाज के लिए 20 लाख रुपये दिए थे.
साथ ही करण जौहर समेत कई और हस्तियों ने आर्थिक रूप से मदद की.
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