World Music Day 2022: लोकगीत हैं पहली पसंद, बॉलीवुड क्यों नहीं जाना चाहती हैं मालिनी अवस्थी?

मालिनी ने बॉलीवुड में संगीत की अहम‍ियत पर बात की. उन्होंने कहा- 'देखिए बॉलीवुड के म्यूजिक को इंडस्ट्री कहा जाता है. इंडस्ट्री शब्द जहां आता है, वहां कमर्श‍ियल अपने आप जुड़ जाता है. यहां कला को थोड़ा पीछे रखा जाता है. यहां देखा जाता है कि किस चीज से उन्हें मुनाफा मिल रहा है, तो व्यवसायिकता पूरी तरह से हावी है.'

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माल‍िनी अवस्थी माल‍िनी अवस्थी

नेहा वर्मा

  • मुंबई ,
  • 21 जून 2022,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST
  • वर्ल्ड म्यूज‍िक डे पर माल‍िनी ने संगीत पर की चर्चा
  • लोकगीत के बारे में कही बातें
  • सुनाया मजेदार किस्सा

मशहूर लोकगीत गाय‍िका मालिनी अवस्थी ने लोकगीत (Folk)और बॉलीवुड के गानों के बीच बहुत खूबसूरती से बैलेंस बनाया है. 21 जून को विश्व संगीत दिवस पर मालिनी ने संगीत को लेकर काफी कुछ बातें की. माल‍िनी का कहना है क‍ि उनके नजरिये में सभी संगीत हैं. लेक‍िन लोकसंगीत की बात आए तो लोग इसे महज मनोरंजन के तौर पर देखते हैं. इस दौरान उन्होंने फ‍िल्मों से मिले ऑफर्स पर भी चर्चा की. 

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माल‍िनी ने कहा- संगीत की जितनी धाराएं हैं, गजलें, ठुमरी, फोक और अवधी जो मैं गाती हूं. मैंने यह एहसास किया है कि हमारे लोकसंगीत को लेकर कोई बात नहीं होती है. लोग इसे बस मनोरंजन के नजरिये से देखते हैं, जबकि ये तो सीखने की चीजें हैं. तो मैंने इस पर काम करना शुरू किया, इस बीच जब-जब फिल्मों का ऑफर मिलता रहा, वहां भी गाया है. मेरे लिए तो महज यह एक माध्यम है. हां सुकून मुझे ठुमरी और लोकगीत गाकर ही मिलता है.

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मालिनी आगे कहती हैं- देखिए बॉलीवुड के म्यूजिक को इंडस्ट्री कहा जाता है. इंडस्ट्री शब्द जहां आता है, वहां कमर्श‍ियल अपने आप जुड़ जाता है. यहां कला को थोड़ा पीछे रखा जाता है. यहां देखा जाता है कि किस चीज से उन्हें मुनाफा मिल रहा है, तो व्यवसायिकता पूरी तरह से हावी है. अगर आप यहां फोक ढूंढेंगे, तो उसे जबरदस्ती ही पाएंगे. हालांकि कुछ मेकर्स ऐसे हैं, जो अब भी इस प्रयास में लगे हैं कि किस तरह से इसकी गरिमा को बरकरार रखा जाए. 

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''अब लोकसंगीत तो गांव व मिट्टी की खूशबू की बात करता है, आज की फिल्मों में गांव ही गायब हैं. अब गांव गायब है, तो फोक गायब है. आज के दौर में डिस्को में नाइटक्लब में आप लोकसंगीत को ठूंसना चाहते हैं, तो ऐसे में कलाकार भी परेशान होता है. कई बार हमारे जैसे कलाकार इस बात से डरे रहते हैं कि चलो फिल्म में गा भी दिया, तो उसका फिल्मांकन कैसे किया जाएगा. क्योंकि ये तो हमारे कंट्रोल में होता नहीं है. कहीं न कहीं बॉलीवुड लोकसंगीत का दोहन भी करते हैं, वो पैसे के चक्कर में इस बात में पड़े रहते हैं कि कैसे लोकसंगीत का फायदा उठाया जाए. हालांकि कुछ डायरेक्टर्स एस्थेटिक टच के साथ काम आज भी करते हैं.''

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बॉलीवुड में क्यों काम नहीं करना चाहती हैं माल‍िनी अवस्थी? 

फिल्मों में ऑफर्स को लेकर उन्होंने कहा- ''कई बार मुझे मुंबई से कॉल आता है और सामने वाला पूछता है कि मालिनी जी आप मुंबई में हैं क्या. मैं कहती हूं नहीं, फिर पूछते हैं कि कल आ सकती हैं क्या, मैं कहूंगी कि नहीं मेरा शो है. ओह अच्छा कोई बात नहीं... वो लोग ये नहीं सोचते हैं कि अगर किसी गाने के लिए आपको मालिनी की याद आई, तो दूसरा उसका विकल्प कैसे हो सकता है. बॉलीवुड में अब हर चीज का विकल्प हो गया है. हालांकि पहले ऐसा नहीं था, अगर किसी को शमशाद बेगम जी से गवाना होता था, तो उन्हीं से गवाते थे. आज तो लोग प्रोफशनल सिंगर का इंतजार नहीं करते हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है कि बॉलीवुड में गाने के दौरान जो शोहरत मिलती है, वो शायद यहां मिल पाना संभव नहीं है लेकिन उस तरह के स्ट्रेस के साथ काम करना मेरे लिए संभव नहीं है.''

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''किसी ने मुझसे आकर कहा कि आपका एक लोकगीत है, ''रेलिया बैरन'', मुझे उसकी हुक लाइन चाहिए. मैंने कहा कि आप पूरा गाना लीजिए, लेकिन आप गाने को क्यों बदलना चाहते हैं. तो उनका तर्क था कि नहीं हम केवल हुक लाइन लेंगे और बाकी लिखवाएंगे. ये जो एक बीमारी है, वो लिखवा कर उसमें कमर्श‍ियल तड़का डालकर आप गाने की आत्मा को खत्म करना चाहते हैं, मैं उसके फेवर में नहीं हूं.'' 

जब माल‍िनी को मिला मच्छर के काटने पर गाना गाने का ऑफर 

''मेरे साथ ऐसे कुछ दो तीन किस्से रहे हैं, जिससे मुझे थोड़ी निराशा हुई है. मुझे मुंबई बुलाकर स्टूडियो में एक गाना सौंपा गया, जो किसी मच्छर के काटने पर था, लिरिक्स मुझे गाने के वक्त दिया गया. यहां काटा और वहां काटा, जिस तरह का वो गाना था, मैंने कहा, माफ करें और मैं फौरन फ्लाइट लेकर वापस आ गई. इसके बाद इंडस्ट्री में मुझे लेकर ये राय भी बनी कि मैं अड़ियल हूं और सहयोग नहीं करती. अपने लोकसंगीत के साथ समझौता नहीं करना अड़ियलपन है, तो मैं हू अड़ियल.'' 

 

 

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