पंजाब के इन सियासी दिग्गजों की किस्मत आज होगी EVM में कैद

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह इस बार कांग्रेस की ओर से सीएम के दावेदार हैं. उन्होंने पटियाला (अर्बन) और लांबी सीट से पर्चा भरा है. पटियाला को कैप्टन का गढ़ माना जाता है. वो लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं. मौजूदा मुख्यमंत्री का किला कहलाने वाली लांबी सीट पर वो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं.

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पंजाब के सियासी मैदान में दिग्गजों की जंग पंजाब के सियासी मैदान में दिग्गजों की जंग

सुरभि गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST

शनिवार को होने वाली वोटिंग में पंजाब के कई दिग्गजों की भी किस्मत का फैसला होना है. एक नजर प्रदेश की सियासत के ऐसे ही महारथियों पर:

कैप्टन अमरिंदर सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह इस बार कांग्रेस की ओर से सीएम के दावेदार हैं. उन्होंने पटियाला (अर्बन) और लांबी सीट से पर्चा भरा है. पटियाला को कैप्टन का गढ़ माना जाता है. वो लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं. मौजूदा मुख्यमंत्री का किला कहलाने वाली लांबी सीट पर वो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं.

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89 साल के प्रकाश सिंह बादल को लांबी सीट पर मात देना किसी भी उम्मीदवार के लिए बेहद कठिन होगा. वो यहां से लगातार चार बार जीत चुके हैं. इस बार इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है. कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा आम आदमी पार्टी के जरनैल सिंह भी इस क्षेत्र से उम्मीदवार हैं. हालांकि मुकाबला अमरिंदर सिंह और बादल के बीच ही माना जा रहा है. जरनैल सिंह को लोग बाहरी उम्मीदवार के तौर पर देख रहे हैं.

सुखबीर सिंह बादल
पंजाब के डिप्टी सीएम और प्रकाश सिंह बादल के बेटे सुखबीर सिंह बादल जलालाबाद सीट से मैदान में हैं. वो यहां से पहले भी दो बार चुनाव जीत चुके हैं. लेकिन उनकी जीत का अंतर हर बार कम हुआ है. 2012 में वो महज 30 हजार वोटों से इस सीट को जीत पाए थे. एंटी-इंकबेंसी के अलावा आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भगवंत मान की लोकप्रियता से निपटना भी उनके लिए आसान नहीं है. हालांकि कांग्रेस ने रवनीत बिट्टू को सुखबीर बादल के खिलाफ उतारा है लेकिन उनकी उम्मीदवारी रस्म अदायगी ज्यादा नजर आती है.

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मौजूदा लोकसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने अपने नेता अरविंद केजरीवाल की तर्ज पर सीधे सरकार के दिग्गज सुखबीर बादल को टक्कर देने का फैसला किया है. वो पहली बार जलालाबाद से उम्मीदवार बने हैं. हालांकि प्रचार के दौरान उनकी रैलियों में खासी भीड़ देखी गई थी लेकिन शराब की लत जैसे विवाद उनके लिए मुकाबले को कठिन बना सकते हैं .

विक्रम सिंह मजीठिया
विक्रम सिंह मजीठिया सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर के छोटे भाई हैं. उन्हें अकाली दल सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों में गिना जाता है. मजीठा सीट को उनके परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता है. मजीठिया यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं. इस बार आम आदमी पार्टी ने हिम्मत सिंह शेरगिल को उनके खिलाफ उतारा है. शेरगिल रूपनगर से पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे. शेरगिल ने प्रचार के दौरान ड्रग्स का मसला जोर-शोर से उठाया था. मजीठिया पर ड्रग तस्करों के साथ सांठगांठ का आरोप लगता रहा है. इस मामले में वो दो बार ईडी की पूछताछ का सामना भी कर चुके हैं.


चार बार विधायक रह चुके मनप्रीत सिंह बादल मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य हैं. 2010 में सुखबीर सिंह बादल के साथ मतभेद के बाद उन्हें शिरोमणि अकाली दल से निकाल दिया गया था. वो 2012 में अपनी परंपरागत सीट गिदडबाहा से चुनाव हार गए थे. इस बार बठिंडा (अर्बन) सीट से कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया है. यहां उनका मुकाबला शिरोमणि अकाली दल के सरूप सिंह सिंगला और आम आदमी पार्टी के दीपक बंसल से है.

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नवजोत सिंह सिद्धू
बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर (ईस्ट) सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. ये सीट उनकी पत्नी ने खाली की है. यहां से सिद्धू की जीत की संभावना प्रबल है क्योंकि वो तीन बार लोकसभा में अमृतसर सीट की नुमाइंदगी कर चुके हैं.


पंजाब में आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार एच एस फुल्का दखा सीट से प्रत्याशी हैं. यहां उन्हें शिरोमणि अकालीदल के मनप्रीत सिंह टक्कर दे रहे हैं. फुल्का 84 के सिख दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. इसके चलते सिखों के बीच उनका खास सम्मान है.

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