बिहार चुनाव: 17 साल में तैयार, 516 करोड़ खर्च, कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु के बारे में जानें सबकुछ

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले लगातार सौगातों का मिलना जारी है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु को बिहार को समर्पित करेंगे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देंगे सौगात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देंगे सौगात

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:22 AM IST
  • बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले हलचल
  • पीएम आज देंगे कोसी महासेतु की सौगात
  • कोसी और मिथिलांचल के इलाके रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे

बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने कई योजनाओं की सौगात देनी शुरू कर दी है. इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 सितंबर यानी आज ही दिन के 12 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मिथिलांचल को जोड़ने वाले कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा पीएम मोदी समस्तीपुर रेलमंडल के कई योजनाओं का उद्घाटन करने के साथ सुपौल से आसनपुर कुपहा डेमू ट्रेन के परिचालन को हरी झंडी दिखाएंगे.

कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु का लंबा इतिहास रहा है और इसका लंबे अंतराल से इंतजार भी किया जा रहा था. 

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फोटो क्रेडिट: जहांगीर आलम


क्या कहता है इतिहास?
आपको बता दें कि 1887 में निर्मली और भपटियाही (सरायगढ़) के बीच मीटर गेज लिंक बनाया गया था, जो 1934 में विनाशकारी भूकंप की वजह से तबाह हो गया था. जिसके बाद कोसी और मिथिलांचल दो भागों में बंट गया था. 6 जून 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोसी मेगा ब्रिज लाइन परियोजना की आधारशिला निर्मली के एक कॉलेज में आयोजित समारोह में रखी थी. 

क्या होगा फायदा? 
ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु 1.9 किलोमीटर लंबा है और इसके निर्माण में 516 करोड़ रुपये की लागत आई. 18 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा कोसी महासेतु देश को समर्पित करने के बाद मिथिलांचल से जुड़ने में कुछ और दिनों का इंतजार करना पड़ेगा. 

फोटो क्रेडिट: जहांगीर आलम


सुपौल से सरायगढ़ होते हुए कोसी महासेतु से गुजर कर ट्रेन असानपुर कुपहा हॉल्ट तक चलेगी. असानपुर कुपहा हाल्ट से झंझारपुर स्टेशन तक कार्य प्रगति पर है इन दोनों स्टेशनों के बीच पांच और छोटे पुलों का निर्माण किया जाना है इस कार्य के पूर्ण होते ही कोसी से मिथिलांचल का दरभंगा स्टेशन से जुड़ जाएगा.

इस पुल का इंतजार करीब 80 साल से किया जा रहा था, अब जब पुल दोबारा बनकर तैयार है. तो करीब 300 किमी. की दूरी 22 किमी. में सिमट कर रह जाएगी. क्योंकि पुल बनने के बाद रेल सेवा शुरू हो जाएगी. 

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