महिला वोटर्स पर फोकस, ममता पर तंज से दूरी... बंगाल चुनाव में बीजेपी की रणनीति में दिखा 'परिवर्तन'

पश्चिम बंगाल के 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली हार से सीख लेकर 2026 के चुनाव में पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं. इस बार बीजेपी ने ममता बनर्जी पर सीधे हमला छोड़कर उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाया.

Advertisement
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने अपनी रणनीति में काफी बदलाव किए हैं पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने अपनी रणनीति में काफी बदलाव किए हैं

सोनल मेहरोत्रा कपूर

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:27 PM IST

पश्चिम बंगाल में साल 2021 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए एक बड़ा राजनीतिक सबक साबित हुआ था. पार्टी ने उस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 से ज्यादा रैलियां कीं, अमित शाह ने लगातार रोड शो किए, और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं को पार्टी में शामिल कराया गया.

लेकिन नतीजे आने पर तस्वीर अलग थी. ममता बनर्जी की अगुवाई में TMC ने 200 से ज्यादा सीटें जीत लीं, जबकि बीजेपी 294 में से 77 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. करीब 38% वोट मिलने के बावजूद पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा. 2021 की हार बीजेपी के लिए सीख थी, और 2026 का चुनाव उस सीख की परीक्षा माना जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि इस बार भी बीजेपी ‘परिवर्तन’ के नारे के साथ मैदान में है, लेकिन उसकी रणनीति में कई अहम बदलाव नजर आए हैं.

Advertisement

परिवर्तन 1 अब ‘दीदी’ पर सीधा हमला नहीं

2021 में बीजेपी का पूरा अभियान ममता बनर्जी के खिलाफ सीधा हमला था. रैलियों में “दीदी… ओ दीदी…” जैसे तंज चर्चा में रहे, लेकिन इससे सहानुभूति TMC के पक्ष में चली गई. 2026 में बीजेपी ने अपनी रणनीति बदली है. अब पार्टी सीधे ममता बनर्जी पर हमला करने से बच रही है. इसके बजाय निशाने पर हैं TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी. अमित शाह की लाइन साफ है- अगर TMC को वोट मिला, तो 'भतीजा राज करेगा.' यानी ममता बनर्जी की छवि को अलग रखते हुए उनके आसपास की व्यवस्था को निशाना बनाया जा रहा है.

परिवर्तन 2 - ‘जय श्री राम’ से ‘बंगाली पहचान’ तक

2021 में बीजेपी ने 'जय श्री राम' के नारे को आक्रामक तरीके से इस्तेमाल किया, जिसे विपक्ष ने बाहरी राजनीतिक शैली बताया. इस बार पार्टी ने अपने अभियान को स्थानीय रंग देने की कोशिश की है. नेताओं को हिलसा मछली के साथ प्रचार करते देखा गया, बंगाली खानपान को प्रमुखता दी गई, और देवी काली व दुर्गा का जिक्र बढ़ाया गया. पीएम नरेंद्र मोदी की रैली का मंच भी दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर डिजाइन किया गया. इसके अलावा, जमीनी स्तर पर जुड़ाव दिखाने के लिए जलेबी-झालमुड़ी जैसे स्थानीय प्रतीकों का इस्तेमाल भी किया गया. यह बदलाव साफ संकेत देता है कि बीजेपी अब ‘आउटसाइडर’ वाली छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है.

Advertisement

परिवर्तन 3- स्थानीय पहचान और बोली की बात

TMC का सबसे बड़ा आरोप हमेशा यही रहा कि बीजेपी बंगाल की संस्कृति और भाषा को नहीं समझती. 2026 में बीजेपी ने इस चुनौती का जवाब देने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को प्रमुख चेहरा बनाया है. उन्होंने रैलियों में धाराप्रवाह बंगाली में भाषण दिए और खुद को बंगाल से जुड़ा बताया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाषा और स्थानीय पहचान के मुद्दे पर यह बीजेपी के लिए अहम रणनीतिक बदलाव है.

परिवर्तन 4 - महिला वोट बैंक पर फोकस

सीएम ममता बनर्जी की राजनीति का सबसे मजबूत आधार महिला मतदाता रहे हैं. 2021 में बीजेपी ने उनकी कल्याणकारी योजनाओं को “रेवड़ी कल्चर” कहा था, जिसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा. 2026 में बीजेपी ने रुख बदल दिया है. अब पार्टी इन योजनाओं का विरोध नहीं कर रही, बल्कि उनसे ज्यादा लाभ देने का वादा कर रही है. साथ ही, पार्टी ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी है. पीएम मोदी ने अपनी रैलियों में आरजी कर मामले का जिक्र करते हुए TMC सरकार को “महिला विरोधी” बताया. यह रणनीति सीधे ममता बनर्जी की उस छवि को चुनौती देती है, जो खुद को महिलाओं की संरक्षक के रूप में पेश करती रही हैं.

Advertisement

2021 में बीजेपी बंगाल में एक आक्रामक चुनौती देने वाली पार्टी के तौर पर उभरी थी, लेकिन नतीजों ने उसे रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया. 2026 में पार्टी ज्यादा संयमित, स्थानीय और लक्ष्य आधारित रणनीति के साथ मैदान में है. अब सवाल यही है कि ये चार ‘परिवर्तन’ क्या ममता बनर्जी के मजबूत किले को भेद पाएंगे या नहीं. इसका जवाब तो 4 मई को ही सामने आ सकेगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement