पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला किया. उन्होंने आयोग को 'टॉर्चर कमीशन' बताया और हिटलर और तुगलकी अंदाज में काम करने का आरोप लगाया. ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि क्या कोई 'तुगलकी आयोग' चुनाव कराता है. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग जिलाधिकारियों को निर्देश दे रहा है और चेतावनी दी कि अगर किसी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो उनकी पार्टी इसका तीव्र विरोध करेगी.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष एसआईआर प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग को पूरा सहयोग देगी, लेकिन किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि वह आयोग के सभी लोगों को दोषी नहीं ठहरा रहीं, बल्कि एक व्यक्ति को जिम्मेदार मानती हैं और जनता के हित में जेल जाने या किसी भी कुर्बानी के लिए तैयार हैं. ममता बनर्जी ने कहा, 'मैं पीछे नहीं हटूंगी. अगर कुछ लोग 420 हैं, तो मैं 440 वोल्ट हूं.'
बिहार में जो दस्तावेज मान्य थे वे बंगाल में क्यों नहीं
उन्होंने कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन दस्तावेजों को मंजूरी दी गई, वही पश्चिम बंगाल में क्यों अमान्य ठहराए गए. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अनुसार बिहार में 11 बिंदुओं के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया अपनाई गई, जबकि बंगाल में इसके लिए आयोग ने 13 बिंदु तय किए हैं. उन्होंने पूछा कि बिहार में सक्षम प्राधिकारी द्वारा तैयार फैमिली रजिस्टर को स्वीकार किया गया, तो बंगाल में उसे क्यों नहीं माना गया.
यह भी पढ़ें: 'SIR में रुकावट बर्दाश्त नहीं करेंगे', ममता सरकार को SC का अल्टीमेटम, एक हफ्ते की दी मोहलत
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि तय समय से पहले ही लॉग-इन एक्सेस सीमित कर दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई. एईआरओ (AERO) अधिकारियों के निलंबन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि निलंबित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया, जो पूरी तरह तुगलकी फैसला है. बंगाल की मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया अवैध है और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी ऐसा 'तुगलकी आयोग' नहीं देखा.
पिछले 24 वर्षों में SIR को क्यों लागू नहीं किया गया
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का निर्वाचन आयोग एक राजनीतिक दल के इशारे पर काम कर रहा है और उसकी कार्रवाई देश की संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है. बंगाल की मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग अल्पसंख्यकों, ओबीसी, आदिवासियों और राजबंशी समुदाय को निशाना बना रहा है. एसआईआर (SIR) को लेकर ममता ने सवाल किया कि पिछले 24 वर्षों में इसे लागू क्यों नहीं किया गया और अब त्योहारों के मौसम में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है.
तपस सेनगुप्ता