'SIR में रुकावट बर्दाश्त नहीं करेंगे', ममता सरकार को SC का अल्टीमेटम, एक हफ्ते की दी मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि चुनाव आयोग को प्रतिनियुक्त किए गए 8505 अधिकारी जिला निर्वाचन कार्यालयों में कल शाम 5 बजे तक रिपोर्ट करें.

Advertisement
कोर्ट ने SIR प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दे दिया है. (File Photo- PTI) कोर्ट ने SIR प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दे दिया है. (File Photo- PTI)

संजय शर्मा / अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:55 PM IST

पश्चिम बंगाल में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई अहम निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने मतदाता सूची सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 14 फरवरी के बाद एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दे दिया है. साथ ही, चुनाव प्रक्रिया में बाधा और फॉर्म जलाने की घटनाओं को लेकर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि चुनाव आयोग को प्रतिनियुक्त किए गए 8505 अधिकारी जिला निर्वाचन कार्यालयों में कल शाम 5 बजे तक रिपोर्ट करें.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 19 जनवरी के अपने आदेश में जिन दस्तावेजों का उल्लेख किया गया था, उन्हें मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों की जांच के दौरान स्वीकार किया जाएगा. अदालत ने यह भी कहा कि माध्यमिक परीक्षा प्रमाणपत्र और एडमिट कार्ड को संयुक्त रूप से पहचान प्रमाण के तौर पर माना जाएगा. इसके अलावा आधार कार्ड और अन्य वैध दस्तावेजों को भी स्वीकार करने का निर्देश दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के उस आरोप पर भी गंभीरता दिखाई, जिसमें कहा गया था कि फॉर्म-7 से जुड़ी आपत्तियों को रोकने या जलाने की घटनाओं पर पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की. कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा और DGP को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर इन आरोपों पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया.

Advertisement

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याद दिलाया कि 19 जनवरी के आदेश में राज्य के पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं. अदालत ने संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मामले में चुनाव आयोग की शक्तियों को लेकर अंतिम फैसला भी लिया जा सकता है.

इससे पहले सुनवाई में निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ERO) और सहायक अधिकारियों (AERO) की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए थे. राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 292 ERO अधिकारियों की सूची चुनाव आयोग को भेजी गई है, जबकि हजारों सहायक अधिकारी भी तैनात किए गए हैं. चुनाव आयोग ने प्रशिक्षित और अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति पर जोर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि जरूरत पड़े तो अनुपयुक्त अधिकारियों को बदलकर योग्य अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है. कोर्ट ने SIR प्रोसेस को पूरा करने में कोई भी रुकावट पैदा न करने की चेतावनी देते हुए यह भी भरोसा दिलाया कि इस प्रोसेस में आने वाली असली मुश्किलों को दूर किया जाएगा. 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गुणवत्ता और निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कोर्ट का रुख साफ करते हुए कहा, "हम रुकावटें हटाएंगे, लेकिन हम SIR को पूरा होने में कोई बाधा नहीं डालेंगे. इस बारे में हम बिल्कुल साफ हैं."

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement