ग्राउंड रिपोर्ट: 'स्टालिन मॉडल' बनाम 'जयकुमार कनेक्शन', तमिलनाडु के रोयापुरम में कांटे की टक्कर

तमिलनाडु के रोयापुरम में AIADMK के जयकुमार और DMK के सुबैर खान के बीच कड़ा मुकाबला जारी है. जयकुमार की ताकत उनकी व्यक्तिगत छवि और मतदाताओं के साथ जुड़ाव है, जबकि DMK का आधार कल्याणकारी योजनाएं और मजबूत मुस्लिम वोट बैंक है.

Advertisement
रोयापुरम में विजय की पार्टी का दबदबा कम है. (Photo: ITGD) रोयापुरम में विजय की पार्टी का दबदबा कम है. (Photo: ITGD)

अनघा

  • चेन्नई,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

तमिलनाडु में उत्तर चेन्नई का रोयापुरम निर्वाचन क्षेत्र में एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है. यहां जयकुमार की 'व्यक्तित्व की राजनीति' और डीएमके के 'कल्याणकारी शासन' के बीच सीधा मुकाबला है. 

AIADMK के कद्दावर नेता डी. जयकुमार का पक्ष पूरी तरह से उनकी व्यक्तिगत छवि और लोगों के साथ उनके पुराने जुड़ाव पर टिका है. दूसरी तरफ, डीएमके अपनी लोकलुभावन योजनाओं और 40,000 से ज्यादा मुस्लिम मतदाताओं के मजबूत वोट बैंक के भरोसे है.

Advertisement

'इंडिया टुडे' की अनघा केशव ने जब जमीनी स्तर पर लोगों से बात की, तो पता चला कि जयकुमार की सबसे बड़ी ताकत मतदाताओं के साथ उनका व्यक्तिगत तालमेल है. एक मछुआरा नेता के रूप में पहचाने जाने वाले जयकुमार ने अपनी ऐसी छवि बनाई है कि वो विधायक न होने पर भी लोगों के लिए मौजूद और मददगार रहते हैं.

एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि जयकुमार ने उनकी बेटी की शादी में आर्थिक मदद की थी, जबकि उस समय वो विधायक नहीं थे. ऐसी कहानियों ने एक ऐसे नेता के रूप में उनकी छवि को मजबूत किया है जो हमेशा लोगों से जुड़ा रहता है.

हालांकि, जयकुमार के सामने एक बड़ी चुनौती है. रोयापुरम में लगभग 40,000 मुस्लिम मतदाताओं ने 2021 के चुनाव में डीएमके का रुख किया था. इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अब भी सत्ताधारी दल की ओर झुका हुआ है.

Advertisement

जयकुमार ने अतीत में इस बदलाव को स्वीकार किया है और 'इंडिया टुडे' से कहा, 'मुसलमानों को अब एहसास हो गया है कि उन्होंने जयकुमार को खो दिया है. जयकुमार अल्पसंख्यकों का रक्षक है और इस बार वो मुझे ही वोट देंगे.'

'स्टालिन मॉडल ऑफ गवर्नेंस' के समर्थन में मुस्लिम!

फिर भी, कई मुस्लिम पुरुषों के बीच जमीनी रुझान अब भी 'स्टालिन मॉडल ऑफ गवर्नेंस' के समर्थन में दिखता है. हालांकि, मुस्लिम महिलाओं की वोटिंग प्राथमिकता साफ नहीं है और ये निर्णायक साबित हो सकती है.

डीएमके की सबसे बड़ी कमजोरी पिछले विधायक आईड्रीम्स मूर्ति रहे हैं, जो पिछले 5 सालों में लोगों के साथ ठीक से जुड़ नहीं पाए. यही वजह है कि डीएमके ने उनका टिकट काटकर पूर्व मंत्री रहमान खान के बेटे- सुबैर खान को मैदान में उतारा है.

यह भी पढ़ें: तमिलनाडु के चुनावी कैंपेन में स्टार विजय के हमशक्ल, उम्मीदवारों की सपनों की उड़ान को लगे सिनेमाई पंख

सुबैर खान ने 'इंडिया टुडे' से कहा कि AIADMK-BJP गठबंधन इस निर्वाचन क्षेत्र में जयकुमार के खिलाफ जा सकता है. पिछले विधायक के खिलाफ नाराजगी के बावजूद, डीएमके दो बड़ी ताकतों पर निर्भर है- पहला, इसका मजबूत अल्पसंख्यक वोट बैंक और दूसरा एक वफादार और पारंपरिक समर्थक आधार जो काफी हद तक बरकरार है.

Advertisement

विजय का प्रभाव कम

वहीं, एक्टर विजय की पार्टी TVK का जमीनी जुड़ाव इस इलाके में काफी कम है. TVK उम्मीदवार केवी विजयथामु एक नया चेहरा हैं और उनके लिए रोयापुरम के मतदाताओं के बीच जगह बनाना मुश्किल हो सकता है. विजय का प्रभाव इस निर्वाचन क्षेत्र में सीमित लग रहा है, क्योंकि यहां का चुनाव काफी हद तक जमीनी संपर्क और कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर करता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement