पश्चिम बंगाल में 4 मई को विधानसभा चुनाव की मतगणना हुई. राज्य में सत्ता की लड़ाई मुख्य रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच हुई. कुमारगंज (जनरल) विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी से सुभेंदु सरकार और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) से तोराफ हुसैन मंडल के बीच सीधा मुकाबला रहा. तोराफ हुसैन ने भाजपा के सुभेंदु सरकार को 6685 वोटों से हरा दिया. मंडल को 82791 वोट मिले, जबकि सुभेंदु को 76106 वोट मिले.
इसके अलावा सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) (SUCIC) से रंजीत देव, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) (CPIM) से मोफ़ज्जल हुसैन, बहुजन समाज पार्टी (BSP) से बिपुल टुडू, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) से तोराफ हुसैन मंडल और इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) से गुलाम मुर्तुजा मंडल भी मैदान में रहे.
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बता दें कि मतदान के दिन शुभेंदु उस समय सुर्खियों में आ गए थे, जब कथित तौर पर उन पर टीएमसी से जुड़ी भीड़ ने हमला कर दिया था. वह पेशे से शिक्षक हैं.
दक्षिण दिनाजपुर जिले का एक ब्लॉक-लेवल शहर कुमारगंज, बालुरघाट लोकसभा सीट के तहत एक जनरल कैटेगरी का विधानसभा चुनाव क्षेत्र है. इसमें गंगारामपुर ब्लॉक के अशोकग्राम, बसुरिया, चलून और उदय ग्राम पंचायतों के साथ पूरा कुमारगंज कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक शामिल है.
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कुमारगंज सीट का इतिहास
बताया जाता है कि 1967 में अस्तित्व में आई कुमारगंज सीट अब तक 14 विधानसभा चुनाव देख चुकी है और इसकी खास पहचान यह रही है कि यहां के मतदाता अक्सर उसी दल का साथ देते हैं, जो राज्य में सरकार बनाता है. शुरुआती दौर में कांग्रेस और उसकी शाखा बांग्ला कांग्रेस का दबदबा रहा और उन्होंने पहले चार चुनाव अपने नाम किए. इसके बाद 1977 से 2006 तक Communist Party of India (Marxist) ने लगातार सात बार इस सीट पर जीत दर्ज की, जो राज्य में लेफ्ट फ्रंट के लंबे शासन को दर्शाता है. 2011 में तृणमूल कांग्रेस ने यहां बढ़त बनाई और तब से लगातार तीन चुनाव जीतती आ रही है.
तृणमूल कांग्रेस की शुरुआती जीतें बेहद करीबी रही थीं. 2011 में महमूदा बेगम ने CPI(M) की मौजूदा विधायक मफूजा खातून को 4,218 वोटों से हराया. 2016 में तोराफ हुसैन मंडल ने खातून को फिर हराया, इस बार अंतर सिर्फ 3,496 वोटों का था. 2021 में जाकर पार्टी को बड़ी राहत मिली, जब मंडल ने भाजपा के मानस सरकार को 29,367 वोटों से हराया. इस चुनाव में कांग्रेस की चौधरी नरगिस बानू तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि वे कांग्रेस-लेफ्ट फ्रंट गठबंधन की उम्मीदवार थीं.
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