पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एतिहासिक चाइनाटाउन की तंग गलियों में इन दिनों सन्नाटा नहीं, डर बोल रहा है. चार-पांच पीढ़ियों से यहीं बसे लोग अचानक अपनी ही पहचान पर सवालों से घिर गए हैं. वोटर लिस्ट से नाम गायब होने के साथ ही उनका सबसे बड़ा हक छिनता नजर आ रहा है. 'हम भारतीय हैं' कहने वालों की आवाज अब कागज़ों में खोती नजर आ रही है और हर गुजरते दिन के साथ अनिश्चितता और गहरी होती जा रही है.
जैसे-जैसे SIR ट्रिब्यूनल के पहले चरण की समय सीमा करीब आ रही है, लोगों में दहशत फैलती जा रही है. इसके साथ ही, 27 अप्रैल को दूसरे चरण की भी समय सीमा खत्म हो रही है. सबर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, जिसने ECI के डेटा का विश्लेषण किया, पूरे कोलकाता में SIR के पहले चरण के बाद चीनी मूल के भारतीय समुदाय के 484 सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए.
तांगरा में रहने वाले उन परिवारों के लिए, जो यहां चार से पांच पीढ़ियों से रह रहे हैं, इन नामों के हटाए जाने से उनकी पहचान और नागरिकता को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है. हालांकि, कुछ लोगों के नाम पूरक सूची में जोड़े गए, लेकिन कई लोग छूट गए. अब, इस प्रक्रिया के अंतिम चरणों में, वह डर अभी भी तांगरा के हर घर में बना हुआ है. सप्लीमेंट्री लिस्ट में कुछ नाम बहाल किए गए हैं, लेकिन कई अन्य अभी भी आखिरी लिस्टी से गायब हैं.
नागरिकों में बेबसी का आलम
23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए 21 अप्रैल तक मामलों को निपटाने के लिए तीन दिन शेष हैं और 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के लिए भी समय सीमा करीब है. ऐसे में निवासी कहते हैं कि उनके पास समय और जवाब, दोनों की कमी होती जा रही है.
चाइनाटाउन के अंदरूनी हिस्सों में जाकर ज़मीनी हकीकत का जायज़ा लेने पर पता चला कि यह समुदाय भारी तनाव में है. निवासी दफ़्तरों के अनगिनत चक्कर लगाने और बढ़ती हुई बेबसी की भावना के बारे में बताते हैं. चीनी काली मंदिर के पास सड़क किनारे खड़ी पचास साल से ज़्यादा उम्र की एक महिला अपनी पीड़ा नहीं छिपा सकी. वे यहां की चौथी पीढ़ी की निवासी हैं. उन्होंने कांपती हुई ज़बान में कहा, "मेरा जन्म यहीं हुआ था, मेरे माता-पिता का जन्म भी यहीं हुआ था. मेरा नाम अभी तक लिस्ट में नहीं आया है. मुझे कहा गया है कि आज जाएगा. लेकिन मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि ऐसा कैसे होगा, या इसका आखिरी नतीजा क्या होगा."
महिला ने आगे कहा कि मैं एक भारतीय नागरिक हूं. कृपया हमें सिर्फ़ 'चीनी' कहकर न पुकारें. हमें भारतीय होने पर गर्व है. हम आशावान हैं और अपने मताधिकार का प्रयोग करने का पूरा इरादा रखते हैं. फिर भी, चिंता बनी हुई है." उन्होंने आगे कहा कि मेरी बेटी का नाम भी लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है. मेरे माता-पिता गुज़र चुके हैं और मैंने अपने पति को भी खो दिया है. चलिए, बस इंतज़ार करते हैं और देखते हैं कि भविष्य में क्या होता है."
'हम भारतीय नागरिक हैं...'
चाइनाटाउन के अंदर ब्यूटी पार्लर चलाने वाली एक महिला ने इस प्रक्रिया को बेहद परेशान करने वाला बताया. उन्होंने कहा, "इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हमें बहुत ज़्यादा उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. ऐसे में काम आगे कैसे बढ़ेगा? हमने हर ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कर दिया है और हर प्रक्रिया का पालन किया है. मेरा परिवार यहां पांच पीढ़ियों से रहता है. आखिर हम भारतीय नागरिक हैं. अगर हम वोट नहीं डाल पाते हैं, या वोटर लिस्ट में हमारा नाम नहीं आता है, तो इससे फिक्र होना लाज़मी है."
कई लोगों के लिए, नामों का हटाया जाना अपनेपन से वंचित किए जाने जैसा लगता है. चीनी मूल के नागरिक एक रेस्टोरेंट मालिक ने कहा कि इस अनिश्चितता ने मेरी जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया है. उन्होंने बताया, "न तो मेरी मां का और न ही मेरी किसी बहन का नाम लिस्ट में शामिल किया गया है. वे लगातार एक दफ़्तर से दूसरे दफ़्तर के चक्कर लगा रही हैं, जिससे इस समस्या को सुलझा सकें."
शख्स की हताशा साफ़ झलक रही थी. चुनौती और निराशा भले लहजे में उन्होंने कहा, "हमें यह 'साबित' करने की कोई ज़रूरत नहीं होनी चाहिए कि हम भारतीय नागरिक हैं. यह खुद में एक तथ्य है. मेरी बहनें इस मामले को सुलझाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं और बिना थके इधर-उधर भाग-दौड़ कर रही हैं. अब बस इंतज़ार करते हैं और देखते हैं कि आगे क्या होता है."
कोलकाता का चाइनाटाउन तंगरा के केंद्र में स्थित है और आसपास के इलाकों में फैला हुआ है. यह भारत की सबसे पुरानी चीनी बस्तियों में से एक है. कई पीढ़ियों से यहां चमड़ा कारखाने, रेस्तरां और ब्यूटी पार्लर चलते आ रहे हैं. यहां दुर्गा पूजा और चीनी नव वर्ष दोनों ही समान उत्साह से मनाए जाते हैं. लेकिन आज कई लोग कहते हैं कि वे उस एकमात्र देश में परदेसी जैसा महसूस करते हैं, जिसे वे जानते हैं.
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया का मकसद वोटर लिस्ट को साफ करना और सटीकता सुनिश्चित करना था. लेकिन जमीनी स्तर पर, निवासी खराब संचार, अपारदर्शी प्रक्रियाओं और विरोधाभासी निर्देशों का आरोप लगा रहे हैं.
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मतदाताओं का कहना है कि उन्हें बीएलओ, फिर पार्टी कार्यालयों, फिर न्यायाधिकरणों से संपर्क करने के लिए कहा गया, लेकिन हर बार उन्हें गेट से ही लौटा दिया गया या बिना किसी मार्गदर्शन के ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए कहा गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जिन वोटर्स के नाम हटा दिए गए हैं और जिनके मामले 21 अप्रैल तक निपटा दिए गए हैं, वे 23 अप्रैल को पहले चरण में मतदान कर सकते हैं. ऐसे में वक्त में तेजी से कम होता जा रहा है. दूसरे चरण के लिए अंतिम तिथि 27 अप्रैल है और मतदान 29 अप्रैल को होगी. जिन लोगों के नाम अभी भी वोटर लिस्ट में नहीं हैं, उनके लिए हर घंटा अहम है.
वोटर्स का कहना है कि जैसे-जैसे न्यायाधिकरण की समय सीमा नजदीक आ रही है, चाइनाटाउन के लोग इंतजार कर रहे हैं. वे लिस्ट में अपना नाम वापस आने का इंतजार कर रहे हैं. वे अपनेपन की स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं और सबसे बढ़कर, वे उस चिंता के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं, जो उनकी संकरी गलियों में छाई हुई है.
अनिर्बन सिन्हा रॉय