पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मैदान सज चुका है. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस सत्ता पर कब्जा बरकरार रखने के लिए प्रचार में जुटी है. वहीं, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दीदी का दुर्ग ध्वस्त करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है. टीएमसी और बीजेपी की इस चुनावी फाइट को असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) का गठबंधन बहुकोणीय बनाने की कोशिशों में जुटा है.
असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर की पार्टियों के गठबंधन पर पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि हर मुस्लिम, हर हिंदू, हर सिख, हर ईसाई यह जानता है कि जब तक तृणमूल है, हम सुरक्षित हैं. बंगाल, गुजरात नहीं होगा. बंगाल, यूपी नहीं बनेगा. हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद बनवाने को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि बाबरी बनवाना है तो वहां जाओ ना. यहां बाप के नाम पर नहीं बनवाता, बाबर के नाम पर बनवाएगा. बाबर ने यहां नहीं बनवाया था. फिरहाद हकीम ने कहा कि बाबरी मस्जिद की आड़ में राजनीतिक पार्टी बना लिया. फंडिंग कहां से आ रहा है.
हुमायूं कबीर की पार्टी के फंडिंग से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जहां से ओवैसी का आता है, वहीं से इनकी पार्टी को भी फंडिंग आ रही है. मुस्लिम वोट बंटने से जिसका फायदा होगा, वही फंड करेगा. उन्होंने मुस्लिम वोट बंटने की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि बंगाल का मुस्लिम और बंगाल के हिंदू, सभी सेक्युलरिज्म में भरोसा करते हैं. फिरहाद हकीम ने टीएमसी की जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि ओवैसी पहले भी चुनाव लड़े थे, क्या हुआ. बंगाल कोई बिहार या यूपी नहीं है जो कम्युनलिज्म और कम्युनलिज्म मिलकर बुद्धू बनाएगा.
मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप पर उन्होंने कहा कि जो पीछे है, ममता बनर्जी उसके साथ हैं. जंगल महल में इंसान चोटी, पौधे का शिखर लेकर खाता था. आज वह अच्छा है. फिरहाद हकीम ने कहा कि जंगल महल में जो एससी, एसटी थे, वह आज अच्छे हैं. उसका तुष्टिकरण हम क्यों नहीं कहते हैं. बीजेपी ने हिंदू-मुसलमान दिमाग में घुसा दिया है.
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ममता बनर्जी की सीट भवानीपुर को लेकर एक सवाल पर फिरहाद हकीम ने दावा किया कि यह बिल्कुल सेफ सीट है. बीजेपी जिसे अपना समझती है, वह भी ममता बनर्जी का वोटर है. शुभेंदु अधिकारी को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि कौन शुभेंदु अधिकारी. ममता बनर्जी ने जिसे अपने हाथ से बनाया है, वह थोड़ी उनके बराबर हो जाएगा. वह दो सीट से इसलिए लड़ रहे हैं, क्योंकि वह अपनी सीट को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं हैं. जो दो नाव पर पैर रखकर चलता है, वह निश्चित डूबता है.
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फिरहाद हकीम ने एक सवाल के जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री आते-जाते रहते हैं. 2016 में भी आए थे, 2021 में भी आए थे. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता एक ही आदमी पर भरोसा करती है- ममता बनर्जी. हमारा फेस ममता बनर्जी हैं. एसआईआर के विरोध को लेकर सवाल पर फिरहाद हकीम ने कहा कि वोटिंग हमारा अधिकार है. इस अधिकार को कोई छीन नहीं सकता. बीजेपी ने यह परसेप्शन बनाया कि घुसपैठिया है, रोहिंग्या है. चुनाव आयोग बताए कि एक भी घुसपैठिया-रोहिंग्या मिला क्या. आपने भारत के मतदाता को लाइन में खड़ा कर दिया, उनको परेशान किया.
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उन्होंने कहा कि एक भी घुसपैठिया वोटर नहीं मिला. हमें बार-बार यह प्रूफ करना पड़ता है कि हम भारतीय है. क्या यह अत्याचार नहीं है. फिरहाद हकीम ने कहा कि हम भारती बंगाली हैं. जब पंजाबी को परेशान नहीं किया जाता, तब हमें क्यों बार-बार परेशान किया जा रहा है. हमें आज भी मालूम नहीं कि हमारा नाम है कि नहीं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने बीजेपी की तरह कम्युनलिज्म का रास्ता लिया. इसकी वजह से ज्यादा जगह लॉजिकल डिस्पैरेंसी हुआ. मतुआ कई बार वोट डाल चुके. क्या आज नाम काट देंगे उनका.
इंद्रजीत कुंडू