9 साल पुरानी लकीर या फिर नया प्रयोग? सपा-कांग्रेस की साझेदारी की बुनियाद क्या होगी

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस का गठबंधन तय माना जा रहा है, लेकिन सीट शेयरिंग का कोई फॉर्मूला सामने नहीं आया है. ऐसे में सपा और कांग्रेस क्या 2017 के विधानसभा चुनाव या फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से सीट बंटवारा करेंगे?

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यूपी में क्या फिर दिखेगी दो लड़कों की जोड़ी (Photo-INC) यूपी में क्या फिर दिखेगी दो लड़कों की जोड़ी (Photo-INC)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए समाजवादी पार्टी हर सियासी दांव चल रही है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस के संग अपनी दोस्ती बनाए रखने की बात कर रहे हैं और जिस फॉर्मूले से 2024 में बीजेपी को मात देने में सफल रहे थे, उसी तर्ज पर 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने की है.  अखिलेश ने कहा कि 2027 के चुनाव में सहयोगी दलों के साथ गठबंधन जारी रहेगा और सवाल सीटों का नहीं, सवाल जीत का होगा. 

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वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के जरिए मिशन-2027 का बिगुल फूंक दिया है. कांग्रेस ने सूबे में उम्मीदवारों के साथ-साथ सीट के चयन में जुट गई है ताकि सीट बंटवारे के समय मजबूती से अपने दावे के रख सके.  

कांग्रेस नेता भी मान रहे हैं कि यूपी में सपा के साथ उनका गठबंधन बना रहेगा, लेकिन बंटवारे पर दोनों की राय अलग-अलग है. कांग्रेस ने सपा के साथ मिलकर दो बार चुनाव लड़ा है. ऐसे में सवाल उठता है कि 2027 में सपा-कांग्रेस के बीच सीट साझेदारी की बुनियाद 2017 का चनाव होगा या फिर 2024 वाला फॉर्मूला लागू होगा? 

यूपी में सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन
उत्तर प्रदेश की सियासत में जब भी सपा और कांग्रेस के गठबंधन की बात होती है, तो इतिहास के पन्ने खुद-ब-खुद पलटने लगते हैं. 2017 का 'यूपी के लड़कों' वाली जोड़ी नतीजों के लिहाज से नाकाम रही थी.  इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक' का फॉर्मूला सुपरहिट रहा था, जिसने बीजेपी के विजय रथ को रोक दिया था?

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2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच, लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है कि यूपी में सपा-कांग्रेस का गठबंधन बरकरार रहेगा. राहुल गांधी भले ही सपा के गठबंधन पर कुछ नहीं बोल रहे हों, लेकिन अखिलेश यादव साफ कह चुके हैं कि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन बना रहेगा. 

सीट शेयरिंग के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि लोकसभा में भी सवाल सीट का नहीं, जीत का था. वही फॉर्मूला 2027 विधानसभा में भी जारी रहेगा. गठबंधन सीटों की संख्या के आधार पर नहीं होगा बल्कि जीत का होगा. ऐसे में सवाल है कि कांग्रेस-सपा में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला क्या होगा.

2017 या 2024 के फॉर्मूले पर बनेगी बात
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा दो बार मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं. पहली बार 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस गठबंधन कर उतरे थे और उसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों ने मिलकर किस्मत आजमाया था. 2017 में सपा ने 311 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और कांग्रेस 114 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. कांग्रेस और सपा 9 सीट पर फ्रेंडली फाइट किए थे यानि दोनों ही पार्टी के प्रत्याशी मैदान में थे. 

वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा दोनो ही फिर मिलकर चुनाव लड़े थे.  यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस ने 17 सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे थे तो सपा 62 सीट पर चुनाव लड़ी थी और एक सीट पर टीएमसी उम्मीदवार ने किस्मत आजमाया था. सपा और कांग्रेस की केमिस्ट्री हिट रही थी. कांग्रेस 6 सीटें जीती थी तो सपा ने 37 सीटें जीतकर इतिहास रचा था. इस चुनाव ने ये साबित किया था कि सपा का काडर कांग्रेस को और कांग्रेस का पारंपरिक वोटर सपा को ट्रांसफर हो सकता है.  

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2027 में सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला होगा 
सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन तय हो गया, लेकिन सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन सकी. अखिलेश यादव सीट के किसी नंबर की बात नहीं कर रहे हैं. अखिलेश सीट की संख्या के ज्यादा 'विनेबिलिटी' (जीतने की क्षमता) का फॉर्मूला रख रहे हैं.  अखिलेश यादव उन सीटों पर कोई समझौता नहीं करना चाहते जहां सपा का मजबूत कैडर है या जहां पार्टी 2022 में दूसरे नंबर पर रही थी.

वहीं, 2024 की सफलता के बाद कांग्रेस का मनोबल बढ़ा है. कांग्रेस उन विधानसभा सीटों पर दावा ठोक रही है, जो उसके सियासी प्रभाव वाले लोकसभा क्षेत्रों (जैसे अमेठी, रायबरेली, इलाहाबाद, सहारनपुर) के अंतर्गत आती हैं.  2024 के लोकसभा चुनाव लिहाज से भी देखें तो कांग्रेस को 85 सीटें मिल सकती है, लेकिन सपा ने कांग्रेस के सामने मजबूत उम्मीदवार की शर्त रख दी है. इसीलिए कांग्रेस ने सीट शेयरिंग पर बात करने से पहले  अपनी सियासी एक्सरसाइज शुरू कर दी है. 

सीट शेयरिंग की बुनियाद का नया फॉर्मूला
यूपी में सीट शेयरिंग की सबसे मजबूत बुनियाद दोनों दलों का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला है. अखिलेश यादव का फॉर्मूला पीडीए ( पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का है, उस लिहाज से 403 सीटें में सवा तीन सौ सीट पर सपा खुद चुनाव लड़ना चाहती है. वहीं, कांग्रेस की रणनीति मुस्लिम दलित और ब्राह्मण बहुल सीटों पर चुनाव लड़ने की है. 

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कांग्रेस में कांग्रेस अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी देख रहे राष्ट्रीय सचिवों को उम्मीदवारों की फेहरिश्त बनाने का टारगेट दे रखा है. वे पहले सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बनाएंगे. इसके बाद दूसरी सूची में 100-120 ऐसी सीटों की पहचान कर उम्मीदवार के नाम फाइनल किए जाएंगे ताकि सपा के साथ सीट बंटवारे के समय सीट के साथ संभावित उम्मीदवार के नाम भी रखे जा सकें. 

कांग्रेस की रणनीति यूपी में क्या है?
कांग्रेस की कोशिश है कि यूपी के हर जिले से एक से दो सीट पर चुनाव लड़ने की है. उत्तर प्रदेश में एक जोन की जिम्मेदारी देख रहे राष्ट्रीय सचिव ने बनाया है कि चुनाव लड़ने वाले नेताओं से बातचीत शुरू हो गई है. चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं के बारे में फीडबैक भी ले रहे हैं. विधानसभा वाइज मजबूत उम्मीदवार की तलाश कर रहे हैं ताकि 2027 में मजबूती से चुनाव लड़ सके. 

कांग्रेस सीट जिन सीटों परचुनाव लड़ना चाहती है, उसके जातीय और सामाजिक समीकरण का भी आकलन कर रही है. सपा के साथ कांग्रेस की सीट बार्गेनिंग 2024 में सपा के साथ कांग्रेस की बनी केमिस्ट्री हिट रही है. कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 6 लोकसभा सीटें जीती थी और 5 सीटों पर उसे मामूली वोटों से हार का मूंह देखना पड़ा.  ऐसे में कांग्रेस और सपा मिलकर 2027 के चुनाव लड़ने का मन बनाया है. 

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उत्तर प्रदेश की 100 से 120 सीटों पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार तलाश रही है, उसकी कोशिश फिलहाल इन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ने की है. ऐसे में सपा के साथ टेबल पर 120 सीटों की मांग रखेगी, लेकिन उसका फाइनल लक्ष्य कम से कम 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का है. कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि 2024 में 17 लोकसभा सीटें हमें लड़ने के लिए मिली थी, उस लिहाज से 85 विधानसभा सीटें मिलनी तय है, लेकिन कोशिश 100 सीटों की है. 

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