पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला है. TMC आगामी चुनाव में अपनी मजबूत जमीन बचाने की जद्दोजहद में है तो वहीं बीजेपी उन कमजोर कड़ियों को तलाश रही है, जहां सेंध लगाई जा सके. विश्लेषण से पता चलता है कि TMC के पास कुल 214 मजबूत और बेहद मजबूत सीटें हैं, जबकि BJP के पास केवल 2 मजबूत सीटें हैं. वहीं, कोलकाता प्रेसीडेंसी क्षेत्र में TMC की पकड़ मजबूत है, लेकिन उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी और मालदा में उसकी स्थिति नाजुक है.
294 सीटों पर विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, टीएमसी को पूरा राज्य में स्पष्ट बढ़त हासिल है. उसके पास 119 बेहद मजबूत और 95 मजबूत सीटें हैं. यानी कुल 214 निर्वाचन क्षेत्रों में ममता बनर्जी की पार्टी की बढ़त बनाए हुए हैं. दूसरी ओर बीजेपी के पास मजबूत श्रेणी में केवल 2 सीटें हैं और बेहद मजबूत श्रेणी में एक भी सीट नहीं है.
ये कैटेगरी पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2011, 2016 और 2021) में पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर तय की गई हैं. एक बहुत मजबूत सीट वह है, जहां एक ही पार्टी ने तीनों चुनावों में जीत हासिल की हो. एक मजबूत सीट का अर्थ है- तीनों चुनावों में से दो में जीत दर्ज की हो. वहीं, कमजोर सीटों में उन सीटों का उल्लेख किया गया है, जहां दोनों पार्टियों ने केवल एक ही चुनाव में जीत दर्ज की हो और बहुत कमजोर सीटें वो हैं, जहां किसी पार्टी ने अभी तक जीत दर्ज न की हो. अब चुनाव में असली मुकाबला कमजोर और बेहद कमजोर सीटों को लेकर है.
प्रेसीडेंसी क्षेत्र में TMC का दबदबा
वहीं, पार्टी के प्रदर्शन का विश्लेषण बताता है कि कोलकाता और उसके आसपास के प्रेसीडेंसी क्षेत्र में टीएमसी की पकड़ सबसे मजबूत है. इस क्षेत्र की कुल 105 सीटों में से 96 सीटें या तो टीएमसी के लिए 'बेहद मजबूत' हैं या 'मजबूत' श्रेणी में आती हैं. टीएमसी का ये जबरदस्त समर्थन बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों के लिए आगामी चुनाव में बड़ी चुनौती पेश करेगा.
TMC के लिए खतरे की घंटी
विश्लेषण में दक्षिण बंगाल के मुकाबले उत्तर बंगाल, विशेषकर जलपाईगुड़ी और मालदा में टीएमसी की स्थिति काफी नाजुक नजर आती है. उदाहरण के लिए जलपाईगुड़ी में टीएमसी के पास केवल एक 'बेहद मजबूत' सीट है, जबकि अधिकांश सीटों पर वह 'कमजोर' या 'बेहद कमजोर' स्थिति में है.
इसी तरह मालदा की स्थिति तो और भी खराब है, जहां टीएमसी 49 सीटों में से 28 सीटों पर 'कमजोर' श्रेणी में है जो बीजेपी के लिए एक बड़ा मौका हो सकता है. साल 2021 के चुनावों में जलपाईगुड़ी की 79% और मालदा की 82% सीटों पर मतदाताओं ने अपना मत बदल दिया था जो इन क्षेत्रों की अस्थिरता को दिखाता है.
मेदिनीपुर बना बैटलफील्ड
उधर, पूरे पश्चिम बंगाल में 2021 के पिछले चुनाव के दौरान 130 सीटों पर सत्ता परिवर्तन हुआ था, यानी वहां मतदाताओं ने पुरानी पार्टी को छोड़कर दूसरी पार्टी पर भरोसा जताया था. इस बार मेदिनीपुर क्षेत्र असली रणक्षेत्र बनकर उभरा है, जहां 2021 में स्थिर रहने वाली सीटों और दल-बदल होने वाली सीटों के बीच मुकाबला लगभग बराबर है.
कुल मिलाकर आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां टीएमसी का प्रभाव कुछ खास क्षेत्रों में केंद्रित है. वहीं, बीजेपी को उन 'स्विंग' क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा, जहां मतदाता किसी एक दल के साथ बंधे नहीं हैं.
पीयूष अग्रवाल / पल्लवी पाठक