असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई. गुरुवार को इन तीन राज्यों के हुए चुनाव में मतदाताओं का उत्साह ज़बरदस्त देखने को मिला. असम में वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए तो पुडुचेरी में आजादी के बाद सबसे ज्यादा मतदान हुआ. केरल में पिछली बार से ज्यादा वोटिंग रही. चुनाव आयोग के द्वारा फाइनल आंकड़ा अभी जारी नहीं हुआ.
असम और पुडुचेरी ने वोटिंग का इतिहास रचा तो केरलम में भी मतदाताओं ने बढ़ चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया. असम की 126 सीटों पर 85.89 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जे पिछले चुनाव से ज्यादा है.
पुडुचेरी की 30 सीटों पर 89.08 फीसदी मतदान रहा, जो 2021 के चुनावसे 6 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ.केरलम की कुल 140 विधानसभा सीटों के लिए 77.38 फीसदी मतदान रहा, जो पिछले चुनाव से एक फीसदी ज्यादा है. इस लिहाज़ से देखें तो वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से बढ़ी वोटिंग से राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ गई हैं.
असम में साढ़े तीन फीसदी बढ़ा मतदान
असम 1950 में अलग राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा 85.89 फीसदी वोटिंग हुई. इससे पहले असम के 2021 विधानसभा चुनाव में 82.42 फीसदी मतदान रहा था और 2016 में 84.7 फीसदी मतदान हुआ था. इस तरह से असम में वोटिंग के सारे रिकार्ड टूट गए और पिछली बार से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा मतदान रहा. वोटिंग पैटर्न बता रहा है कि मतदाताओं का उत्साह सियासत में बड़ा गुल खिला सकता है.
असम की 126 सीटों पर 722 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. राज्य में परिसीमन के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं. वोटिंग पैटर्न देखे तो असम के कुल 35 जिलों में से 26 जिलों में 80 फीसदी से ऊपर मतदान रहा. असम में सबसे ज्यादा मतदान 95.56 फीसदी साउथ सलमारा मनकचर जिले में हुआ और सबसे कम 75.25 फीसदी वोटिंग वेस्ट कार्बी एंगलोंग में हुई.
असम का वोटिंग पैटर्न के क्या संकेत हैं
असम में 2021 के विधानसभा चुनाव में 82.42 फीसदी मतदान रहा जबकि 2016 में 84.7 फीसदी मतदान हुआ था. 2016 की तुलना में 2021 में 2 फीसदी मतदान कम रहा था, जिसका असर सीटों में भी दिखा था. राज्य में 80 फीसदी से ऊपर जब-जब मतदान हुआ है, बीजेपी की सरकार आई है. पिछले दो विधानसभा चुनाव के नतीजे यही कह रहे हैं.
असम के राजनीतिक इतिहास में वोटिंग पैटर्न को देखें तो सात से आठ फीसदी वोटिंग फीसदी बढ़ने या फिर घटना से सत्ता बदलती रहती है. 2016 में 2021 के चुनाव की तुलना में 8 फीसदी मतदान ज्यादा हुआ था तो कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा और बीजेपी सत्ता में पहली बार आई थी. इसके बाद 2021 में वोटिंग फीसदी में 2 फीसदी की कमी आई तो सत्ता में बनी रही.
इससे पहले असम चुनाव में 2001 में सत्ता बदली थी, उस समय भी वोटिंग फीसदी में 8 फीसदी की बढ़ोतरी थी. 1996 की तुलना में 2001 के चुनाव में करीब फीसदी वोटिंग ज्यादा हुई थी, जिसका नतीजा था कि सरकार बदल गई थी. असम गढ़ परिषद को सत्ता से बाहर होना पड़ा था और कांग्रेस ने वापसी की थी. इस बार पिछले चुनाल से करीब साढ़े तीन फीसदी वोटिंग ज्यादा हुई है, जिसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं.
आजादी के बाद से कैसी रहा वोटिंग पैटर्न
आजादी के बाद असम का गठन 1950 में हुआ. असम में पहली बार 1952 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें 51.30 फीसदी मतदान रहा. कांग्रेस की सरकार बनी. इसके बाद 1972 के चुनाव तक कांग्रेस ही सत्ता में रही. इस दौरान चुनाव में वोटिंग फीसदी देखें तो 1957 में 52.60 फीसदी, 1962 में 56.70 फीसदी, 1967 में 66.80 फीसदी और 1972 में 60.30 फीसदी मतदान रहा.
वहीं, आपातकाल के बाद 1978 में हुए चुनाव हुए तो 61 फीसदी मतदान रहा. इस तरह एक फीसदी वोटिंग ज्यादा होने से सत्ता बदल गई थी, कांग्रेस को बाहर होना पड़ा तो जनता पार्टी की सरकार आई थी. पांच साल बाद 1983 चुनाव हुए तो सिर्फ 32 फीसदी मतदान हुआ था. इस तरह करीब 28 फीसदी वोटिंग कम हुई, जिसके चलते सत्ता बदल गई.
कब-कब असम में बदली सियासत
1985 में विधानसभा चुनाव हुए तो 50 फीसदी ज्यादा मतदान 1983 की तुलना में रहा. 1983 में 32 फीसदी मतदान रहा तो 1995 में 78.40 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसका नतीजा था कि सरकार बदल गई. कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा और असम गढ़ परिषद की वापसी हुई.
इसके बाद 1991 के चुनाव में 68.30 फीसदी मतदान रहा, जो पिछले चुनाव की तुलना में 10 फीसदी कम रहा. इस बार सत्ता बदल गई. 1996 के चुनाव में 70.30 फीसदी मतदान रहा, जो पिछले चुनाव से करीब दो फीसदी ज्यादा रहा था. इसके चलते सरकार बदल गई.
2001 के विधानसभा चुनाव में 77.30 फीसदी, 2006 में 75 फीसदी और 2011 के विधानसभा चुनाव में 76 फीसदी मतदान रहा. इन तीनों ही चुनाव में कांग्रेस सत्ता में बनी रही. इन तीन चुनाव के वोटिंग पैटर्न देखें तो चुनाव में बहुत ज्यादा वोटिंग का अंतर नहीं रहा, लेकिन 2016 में वोटिंग बढ़ी तो सत्ता ही बदल गई. बीजेपी सत्ता में वापसी करने में सफल रही और 2021 में भी बनी रही और अब 2026 में साढ़े तीन फीसदी बढ़ी वोटिंग क्या सियासी गुल खिलाती है?
कुबूल अहमद