असम की सियासत में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. सीएम हिमंता के सोशल मीडिया पोस्ट में नई सियासी बयार का आगाज कर दिया है. हाल ही में, पूर्व असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया. इसके बाद, कुछ ही घंटों में उन्होंने अपना इस्तीफा वापस भी ले लिया. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस्तीफा भेजा था.
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पार्टी में 'अनदेखी' और उचित सम्मान न मिलने की बात लिखी थी. लेकिन दिन भर चली बैठकों और नेताओं की समझाइश के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया. अब असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के बयान के बाद नए सिरे से राजनीतिक बाजार गर्म है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "श्री भूपेन बोरा असम कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में उभरे अंतिम प्रमुख हिंदू नेता रहे हैं. उनके निमंत्रण पर आज शाम उनसे भेंट करूंगा. मेरी हार्दिक इच्छा है कि वे भाजपा परिवार में शामिल होकर राष्ट्र और असम की सेवा के हमारे संकल्प को और सशक्त करें."
कांग्रेस नेताओं ने की मनाने की कोशिश
इस्तीफे की खबर सामने आते ही कांग्रेस के कई सीनियर नेता गुवाहाटी स्थित उनके घर पहुंचे. मौजूदा असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, पार्टी के अन्य नेताओं और सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की. इसके बाद बोरा ने यू-टर्न लेते हुए पार्टी में बने रहने का फैसला किया था. लेकिन अब मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट में नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
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क्या हैं सियासी मायने?
भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक कांग्रेस की असम यूनिट के अध्यक्ष रहे. उन्हें संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का क्रेडिट दिया जाता है. उनके इस्तीफे और फिर वापसी ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के अंदर असंतोष जरूर है, लेकिन फिलहाल टूट टल गई है लेकिन अब हिमंता का बयान नए सवाल पैदा करता है. असम विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए अहम माना जा रहा है.
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