शौकत से अदावत, ओवैसी से बगावत... बहराइच रैली से आसिम वकार ने क्यों बनाई दूरी?

मुस्लिम मतों के सहारे असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह तलाश रहे हैं. इस कड़ी में ओवैसी ने रविवार को बहराइच से 2027 का चुनावी बिगुल फूंका, लेकिन पार्टी के सबसे मुखर आवाज सैयद आसिम वकार नजर नहीं आए. इसके चलते कई सवाल खड़े होने लगे हैं?

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असदुद्दीन ओवैसी की रैली से सैयद आसिम वकार क्यों रहे दूर (Photo-ITG) असदुद्दीन ओवैसी की रैली से सैयद आसिम वकार क्यों रहे दूर (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव अब चंद महीने ही दूर है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है. एआईएमआईएम  प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को बहराइच की मटेरा से 2027 का चुनावी बिगुल फूंक दिया. इस दौरान वो यूपी में चुनावी एजेंडा सेट करते हुए AIMIM प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को मटेरा सीट से प्रत्याशी घोषित किया. 

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बहराइच में ओवैसी की रैली को सफल बनाने के लिए AIMIM ने ताकत झोंक दी थी, बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए थे. उत्तर प्रदेश में AIMIM के सबसे बड़े और कद्दावर चेहरे माने जाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय सैयद आसिम वकार बहराइच रैली में नहीं नजर आए. इसके बाद तमाम तरह से सवाल खड़े होने लगे हैं? 

ओवैसी की रैली से आसिम वकार की दूरी ने यूपी की सियासत के साथ-साथ AIMIM खेमे में खलबली मचा दी है. आसिम वकार का बहराइच रैली से दूरी बनाना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एआईएमआईएम के भीतर सुलग रही आंतरिक कलह का नतीजा तो नहीं है? 

ओवैसी की बहराइच रैली में नहीं दिखे आसिम वकार
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच की मटेरा विधानसभा क्षेत्र से एक जनसभा संबोधित कर मिशन-2027 का बिगुल फूंक दिया है. ओवैसी की यह पहली रैली थी, जिसे सफल बनाने के लिए एक महीने से भी ज्यादा समय से AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बहराइच में डेरा जमा रखा था. मुस्लिम बहुल गांव और कस्बों में बैठक कर रैली में भीड़ जुटाने और सफल बनाने केलिए अपनी पूरी ताकत लगा थी. 

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ओवैसी रविवार को बहराइच के मटेरा शाम सात बजे पहुंचे तो बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए मौजूद थे. मंच पर ओवैसी के साथ शौकत अली सहित AIMIM के तमाम बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन सूबे में ओवैसी की आवाज बनकर उभरे सैयद आसिम वकार नजर नहीं आए. इस संबंध में जब पता किया गया तो सूत्रों ने बताया कि सैयद आसिम वकार को रैली में बुलाया ही नहीं गया था. इसके चलते ही रैली में नहीं पहुंचे, लेकिन उसके पीछे की वजह अलग है. 

शौकत अली से आसिम वकार की सियासी अदावत
सैयद आसिम वकार की मुख्य नाराजगी एआईएमआईएम के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली से है. आसिम वकार पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और ओवैसी के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं, लेकिन यूपी संगठन के भीतर शौकत अली का दखल है. बहराइच की रैली की पूरी कमान शौकत अली के हाथों में थी. ऐसे में आसिम वकार को न संगठन की तरफ से तवज्जो दी गई और न ही रैली में आने का न्योता दिया गया,  जिसके चलते ही उन्होंने दूरी बनाना ही बेहतर समझा. 

शौकत अली और सैयद आसिम वकार की सियासी अदावत पिछले साल खुलकर सामने आए थी. पिछले साल जून के महीने में सपा नेता आमिल खान के घर पर एक बैठक हुई थी, जिसमें अबु आसिम आजमी के साथ सैयद आसिम वकारी की एक सामने तस्वीर सामने आई थी. इसके बाद गांधी भवन में हुए AIMIM के कार्यक्रम में शौकत अली ने आसिम वकार पर निशाना साधते हुए जमकर हमले किए थे. 

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आसिम वकार को शौकत अली ने बुझा हुआ रैकेट बताया था. इसके बाद आसिम वकार और शौकत अली के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर एक दूसरे के खिलाफ कई पोस्ट लिखे थे, जिसे असदुद्दीन ओवैसी ने संज्ञान में लिया था और सोशल मीडिया पर लिखे गए पोस्ट डिलीट कराए थे. ओवैसी ने भले हस्ताक्षेप किया हो, लेकिन शौकत अली और आसिम वकार के रिश्ते काफी पटरी पर नहीं आए और दोनों ही एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रखे हैं. 

बंगाल चुनाव प्रचार से आसिम वकार ने बनाई दूरी
बंगाल चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन किया था, ये बात आसिम वकार को पसंद नहीं आई थी. आसिम वकार ने हुमायूं कबीर को बीजेपी का प्लांटेड नेता बताया था. यही वजह थी कि आसिम वकार बंगाल चुनाव में प्रचार करने नहीं उतरे जबकि ओवैसी के सियासी ढाल बनकर अक्सर बचाव करते हुए नजर आते हैं. 

उत्तर प्रदेश के पिछले चुनावों और उपचुनावों के दौरान आसिम वकार ने पूरे राज्य में पार्टी के लिए जमकर पसीना बहाया था और टीवी डिबेट्स में ओवैसी का पक्ष मजबूती से रख रहे थे. इसके बावजूद, पार्टी के भीतर उत्तर प्रदेश से जुड़े बड़े फैसलों और टिकट बंटवारे में उनकी राय को नजरअंदाज किया गया. आसिम वकार का बहराइच रैली में न जाना असदुद्दीन ओवैसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय प्रवक्ता अब अपनी ही पार्टी में पूरी तरह बेगाने हो गए हैं, जिसके चलते कई सवाल खड़े हो रहे हैं. 

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क्या ओवैसी से आसिम वकार हो रहा है मोहभंग?
बहराइच में ओवैसी की रैली से दूरी के बाद यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या आसिम वकार अब एआईएमआईएम छोड़ने का मन बना रहे हैं? उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद बजाय सपा-कांग्रेस गठबंधन है. मुस्लिम वोटर मजबूती से लामबंद हो रहा है. ऐसे में सैयद आसिम वकार जैसे जमीनी नेताओं को समझ आ रहा है कि यूपी में 'पतंग' (AIMIM का सिंबल) के सहारे लंबी सियासी उड़ान भर पाना मुश्किल है. 

आसिम वकार सपा के छोड़कर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी में आए थे. मुस्लिम समुदाय के बीच उनका चेहरा जाना-पहचाना बन चुका है. ईरान के मामले में आसिम वकार ने खुलकर अमेरिका, इजराइल और सउदी अरब पर जमकर हमले किए थे. आसिम वकार के इस तेवर ने मुस्लिमों के बीच उनकी लोकप्रियता को बढ़ाया है, लेकिन अपनी ही पार्टी में बेगाने हो गए हैं. 

आसिम वकार का बहराइच रैली से दूरी बनाना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एआईएमआईएम के भीतर सुलग रही आंतरिक कलह का नतीजा है. ऐसे में ओवैसी ने समय रहते शौकत अली और आसिम वकार के बीच के इस विवाद को नहीं सुलझाया, तो उत्तर प्रदेश में पार्टी का ढांचा बिखर सकता है. आसिम वकार हाल के दिनों में कांग्रेस के पक्ष में खड़े नजर आए हैं और राहुल गांधी की भी तारीफ करते दिखे हैं, क्या अब अगला सियासी ठिकाना कांग्रेस होगी?

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