देखिए बाघों की तस्वीर, आंकड़ों के आईने से...

वैसे तो जंगलों से इन दिनों अच्छी खबरें नहीं सुनने को मिलतीं, मगर इस बार बाघों को लेकर जारी किए गए हालिया आंकड़े कुछ और ही कहानी सुना रहे हैं. पढ़ें क्या है इनमें खास...

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स्नेहा

  • नई दिल्‍ली,
  • 12 अप्रैल 2016,
  • अपडेटेड 8:09 PM IST

बाघ को भारत में राष्ट्रीय पशु होने का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इस बात से सभी वाकिफ हैं कि जंगलों के अंधाधुंध कटाई और उन पर हो रहे हमले की वजह से उनकी संख्या में लगातार कमी देखी गई है. हालांकि हालिया आंकड़े इस बात को गलत साबित करते हैं. इनके अनुसार देश में बाघ को लेकर छेड़े गए अभियान के नतीजे सुखद रहे हैं. जानें क्या कह रहे हैं लेटेस्ट आंकड़े...

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साल 2009-10 में देश के 10 बाघ संरक्षित रिजर्व में पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या 12 लाख थी और साल 2014-15 में यह आंकड़ा 15 से 20 लाख तक पहुंच गया है.

बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. साल 2006 में यह आंकड़ा 1,411 था, साल 2010 में यह आंकड़ा 1,706 पहुंचा और साल 2014 में यह आंकड़ा 2,226 पहुंच गया.

देश के अलग-अलग जगहों पर कितने बाघ हैं?
शिवालिक गंगा के मैदान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व बिहार में बाघों की कुल संख्या 485 है.
मध्य भारत और पूर्वोत्तर के घाटों में इनकी संख्या 668 है.
पूर्वी घाटों जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और गोवा में आज 776 है.
पूर्वोत्तर और ब्रम्हपुत्र क्षेत्र में इनकी तादाद 201 है.
अकेले सुंदरबन में कुल 76 बाघ हैं.
देश के अलग-अलग जूलॉजिकल पार्कों में बाघों की संख्या 20 है.
कुल मिलाकर इनकी संख्या 2,226 तक पहुंच जाती है.

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2015 के होलीडे IQ रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान का रणथंबौर, पश्चिम बंगाल का सुंदरबन, कर्नाटक का बांदीपुर नेशनल पार्क और तमिलनाडु का मुडुमलाई बाघों के लिहाज से सबसे पसंदीदा इलाके हैं. बच्चे और बड़े-बुजुर्ग बाघों को समान रूप से पसंद करते हैं.

बाघ मोटी कमाई का जरिया भी हैं...
बाघों को संरक्षित रिजर्व में रखा जाता है और यहां आने वाले से मोटी कमाई होती है. देश के 10 शीर्ष बाघ संरक्षित रिजर्व के जरिए 19.8 करोड़ रुपये की कमाई हुई है.
बाघ संरक्षित रिजर्व में 2 रात और 3 दिन के औसत होलीडे कार्यक्रम में 2 लोगों के लिए 2014 में आने वाला खर्च 15,500 रुपये था जो साल 2015 में बढ़ कर 17,686 रुपये हो गया है.

बाघ के अलावा दूसरे जानवर भी संरक्षण की लिस्ट में हैं...
बाघों के संरक्षण के परिणामों से बेहद उत्साहित हैं और दूसरी लुप्त हो रही प्रजातियों को भी बचाने की ओर अग्रसर हो रही हैं. हालांकि, इस संरक्षण के लिए आवंटित की गई धनराशि में लगातार कमी आ रही है.

यहां पेश है बाघ संरक्षण के लिए आवंटित धनराशि के आंकड़े
साल 2012-13 - 162.8 करोड़ रुपये
साल 2013-14 - 172.29 करोड़ रुपये
साल 2014-15 - 161.02 करोड़ रुपये
साल 2015-16 - 136.46 करोड़ रुपये
नोट: यह रिपोर्ट बंगलुरु, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, नागपुर और कोयंबटूर जाने वाले पर्यटकों की वरीयताओं पर आधारित है.

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सौजन्य से: NEWSFLICKS

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