सिर्फ पर्यावरण के लिए काम करता है ये शख्स, लगा चुका है 5 लाख पौधे

पर्यावरण बचाने के नाम पर हर कोई अपनी राय देता हुआ नजर आ जाता है, लेकिन उसके लिए काम बहुत कम लोग करते हैं. लेकिन मरूप्रदेश राजस्थान के रहने वाले एक शख्स ने अपना पूरा जीवन ही पर्यावरण के नाम कर दिया है, जिसका नाम है विष्णु लांबा.

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विष्णु लांबा (फोटो-फेसबुक) विष्णु लांबा (फोटो-फेसबुक)

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 2:08 PM IST

पर्यावरण बचाने के नाम पर हर कोई अपनी राय देता हुआ नजर आ जाता है, लेकिन उसके लिए काम बहुत कम लोग करते हैं. लेकिन मरूप्रदेश राजस्थान के रहने वाले एक शख्स ने अपना पूरा जीवन ही पर्यावरण के नाम कर दिया है, जिसका नाम है विष्णु लांबा. पर्यावरण के लिए विष्णु लांबा का जुनून इतना है कि वो अपनी जान से ज्यादा पेड़ पौधों के बारे में सोचते हैं. उन्होंने अपने जीवन में पर्यावरण के लिए इतने सराहनीय कार्य किए हैं, जिन्हें देखकर उनसे कई लोग प्रेरणा लेते हैं.

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बचपन से ही पेड़ पौधे लगाने में रुचि रखने वाले राजस्थान के टोंक निवासी विष्णु लांबा ने बहुत कम उम्र से ही पेड़ लगाना शुरू कर दिया था और अपने इस जुनून को आगे बढ़ाते हुए लांबा ने अभी तक 5 लाख पौधे लगाकर उन्हें बड़ा किया है. इतना ही नहीं लांबा को राजस्थान में 13 लाख से अधिक पेड़ों को कटने से बचाने का श्रेय भी जाता है. खास बात यह है कि उन्होंने ये काम बिना किसी सरकारी मदद कर दिखाया है.

लाखों पेड़ों को जान लेने वाले लांबा पक्षियों और खनन के खिलाफ भी कार्य करते रहते हैं. हर साल गर्मियों में वो पक्षियों के लिए लाखों परिंडे बांधते हैं और पक्षियों की सेवा में योगदान देते हैं. राजस्थान में कई खनन माफियाओं के खिलाफ भी उन्होंने आवाज भी उठाई है, जिससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. लांबा को वृक्ष मित्र के नाम से जाना जाता है.

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उन्होंने देश को आजादी दिलाने वाले क्रांतिकारियों के परिवारजन और चंबल के दस्युओं से लेकर फिल्म और राजनीति की कई बड़ी हस्तियों से लांबा ने पौधे लगवाए हैं. पेड़ों के लिए अपना परिवार भी त्याग चुके लांबा को पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने के लिए ‘राजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार’ प्रदान किया गया है.

लांबा ने सिर्फ पेड़ ही नहीं लगाए हैं बल्कि उन्होंने ऋग्वेद काल के बाद पहला पर्यावरणीय विवाह करवाया था. लांबा अपने साथ कई लोगों को जोड़ने के लिए एक एनजीओ का संचालन भी कर रहे हैं. लांबा ने अपने एनजीओ कल्पतरु संस्थान के साथ पेड़ों की कटाई रोकने के लिए प्रदेश की कई आवासीय योजनाओं को भी रुकवाया है और उन्हें दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया है.

उनका कहना है कि अगर कोई अपनी जिंदगी में पांच पेड़ नहीं लगाता है तो उसे चिता पर जलने का हक नहीं है. वो लगातार लोगों को पेड़ लगाने का संदेश दे रहे हैं.

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