RBSE 10th Result: राजस्थान में बेटियों का 'दशक', पिछले 10 सालों से क्यों लड़कों को पछाड़ने का बनाया रिकॉर्ड!

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 10वीं कक्षा के नतीजों में बेटियों ने पिछले एक दशक से लगातार लड़कों को पीछे छोड़ते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है. साल 2016 से 2026 तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि सामाजिक जागरूकता, सरकारी योजनाएं और छात्राओं की अनुशासनात्मक पढ़ाई ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इसे महिला सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण बताया है.

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RBSE 10वीं के नतीजों में पिछले 10 साल से जारी है 'पिंक पावर' का दबदबा (सांकेतिक तस्वीर- PTI) RBSE 10वीं के नतीजों में पिछले 10 साल से जारी है 'पिंक पावर' का दबदबा (सांकेतिक तस्वीर- PTI)

aajtak.in

  • अजमेर ,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के 10वीं के नतीजे जब भी घोषित होते हैं, एक हेडलाइन कॉमन होने लगी है,  'बेट‍ियों ने फिर मारी बाजी'. ये सिलसिला पिछले एक-दो साल से नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से लगातार जारी है. साल 2016 से लेकर 2026 तक के आंकड़े गवाह हैं कि विपरीत परिस्थितियों और ग्रामीण परिवेश के बावजूद राजस्थान की बेटियों का सफलता प्रतिशत लड़कों से हमेशा आगे रहा है. नीचे दिए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि कैसे हर साल लड़कियों ने लड़कों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है. 

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क्या कहता है पिछले 10 सालों का रिपोर्ट कार्ड

साल छात्राओं का पास % छात्रों का पास % अंतर
2026 94.20% 93.63% 0.57%
2025 93.45% 92.80% 0.65%
2024 93.46% 92.64% 0.82%
2023 91.31% 89.78% 1.53%
2022 84.38% 81.62% 2.76%
2021 99.62% 99.51% 0.11%
2020 81.41% 79.99% 1.42%
2019 80.35% 79.45% 0.90%
2018 79.95% 79.79% 0.16%
2017 78.89% 79.01% (अपवाद)
2016 76.02% 75.03% 0.99%

(नोट: 2021 में कोविड के कारण प्रमोट किया गया था, फिर भी लड़कियां आगे रहीं.)

क्यों आगे निकल रही हैं बेटियां?
1. सामाजिक बदलाव और जागरूकता:
पिछले एक दशक में राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और 'गार्गी पुरस्कार' जैसी योजनाओं ने बड़ा असर डाला है. अभिभावकों की सोच बदली है और वे अब बेटियों की शिक्षा पर निवेश कर रहे हैं.

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2. एकाग्रता और अनुशासन:
बोर्ड के विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राएं नियमित पढ़ाई और उत्तर पुस्तिकाओं की प्रेजेंटेशन में लड़कों की तुलना में अधिक अनुशासित पाई गई हैं. यही कारण है कि वे थ्योरी विषयों में बेहतर अंक बटोरती हैं.

3. सरकारी प्रोत्साहन:
साइकिल वितरण योजना, स्कूटी योजना और लैपटॉप वितरण जैसी योजनाओं ने छात्राओं के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा की है. दूर-दराज के गांवों से स्कूल पहुंचने वाली छात्राओं के लिए ये सुविधाएं मील का पत्थर साबित हुई हैं.

शिक्षा मंत्री का बयान
नतीजे जारी करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी इस पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि बेटियों का यह प्रदर्शन महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है. यह गर्व की बात है कि राजस्थान के दूर-दराज के जिलों में भी लड़कियां टॉप कर रही हैं.

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