भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में करोड़ों रुपये के नकल रैकेट का मास्टरमाइंड आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया. छह महीने से फरार चल रहे 25 हजार रुपये का इनामी आरोपी अशोक कुमार मीणा को पुलिस ने जोधपुर से गिरफ्तार किया है. उसपर आरोप है कि उसने 15-15 लाख रुपये लेकर 50 से अधिक अभ्यर्थियों को नकल करवाई, परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर हैक किए और बाहर बैठे एक्सपर्ट्स से प्रश्न हल करवाकर अभ्यर्थियों तक जवाब पहुंचाए.
मामला इतना संगठित और हैरान करने वाला है कि जांच में सामने आया है कि जिस परीक्षा का केंद्र कोटा में था ही नहीं, उसे भी आरोपी ने अपनी सेटिंग के जरिए कोटा में आयोजित करवा दिया. पुलिस को शक है कि इस पूरे खेल में परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ लोग और आयुष मंत्रालय से संबंधित स्तरों पर भी मिलीभगत हो सकती है.
हाईटेक नकल कांड आया सामने
आरकेपुरम थाना इलाके में सामने आए इस हाईटेक नकल कांड के मुख्य आरोपी अशोक कुमार मीणा, करौली जिले के बिनेगा गांव का रहने वाला है. पुलिस के अनुसार आरोपी मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत है और साल 2018 से संगठित तरीके से नकल गिरोह चला रहा था. शुरुआती जांच में सामने आया कि वह पहले बैंक प्रमोशन भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी करवाता था, जहां सीमित अभ्यर्थी होते थे और मोटी रकम वसूलना आसान होता था. बाद में उसने पुलिस, बैंकिंग और आयुष मंत्रालय से जुड़ी 10 से अधिक परीक्षाओं में नकल करवाने का नेटवर्क तैयार कर लिया.
जोधपुर से ऐसे दबोचा गया 25 हजार का इनामी मास्टरमाइंड
एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि आरकेपुरम थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि 25 हजार रुपये का इनामी आरोपी अशोक कुमार मीणा अपने साथी के साथ जोधपुर के भदवासिया फ्रूट मंडी क्षेत्र में आने वाला है. सूचना मिलते ही जोधपुर पुलिस ने फ्रूट मंडी चौराहे पर नाकेबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोका. जांच में आरोपी की पहचान होते ही उसे हिरासत में लिया गया और तत्काल कोटा पुलिस को सूचना दी गई. इसके बाद आरकेपुरम थाना पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर कोटा ले आई.
15-15 लाख लेकर बेचे गए एग्जाम
जांच अधिकारी रहे पूर्व एएसपी दिलीप सैनी के मुताबिक आरोपी अशोक मीणा ने अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने और परीक्षा पास करवाने के नाम पर 15-15 लाख रुपये लिए थे. शुरुआती जांच में सामने आया है कि 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों को तीन दिन तक नकल करवाई गई. पुलिस का अनुमान है कि आरोपी और उसके नेटवर्क ने करोड़ों रुपये की वसूली की है. पुलिस अब उन अभ्यर्थियों की सूची तैयार कर रही है जिन्हें लाखों रुपये लेकर परीक्षा पास करवाने का भरोसा दिया गया था. आरोपी फिलहाल पुलिस रिमांड पर है और उससे लगातार पूछताछ जारी है. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि किन-किन लोगों ने रकम देकर इस नेटवर्क का फायदा उठाया है.
ऐसे चलता था हाईटेक नकल का खेल
जांच में नकल का ऐसा तरीका सामने आया जिसने पुलिस को भी चौंका दिया. पहले दिन गिरोह ने परीक्षा केंद्र के 26 से ज्यादा कंप्यूटर हैक कर दिए. परीक्षार्थियों को निर्देश दिए गए कि वे सिर्फ माउस और कीबोर्ड चलाते रहें ताकि किसी को शक न हो. वास्तविक सवालों को सिस्टम के जरिए बाहर बैठे एक्सपर्ट्स तक पहुंचाया गया और वहीं से हल करके जवाब उपलब्ध करवाए गए. फिर दूसरे दिन जब यह तकनीक काम नहीं कर पाई तो गिरोह ने नया तरीका अपनाया. परीक्षार्थियों के मोबाइल से स्क्रीनशॉट लेकर प्रश्न बाहर बैठे लोगों तक पहुंचाए गए. वहां एक्सपर्ट्स ने जवाब तैयार कर भेजे, जिन्हें देखकर परीक्षार्थियों ने उत्तर भरे. चौंकाने वाली बात यह रही कि परीक्षा केंद्र में मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं थी, बावजूद इसके पूरा नेटवर्क अंदर तक सक्रिय रहा.
जांच में सामने आई ये बातें
जांच में यह भी सामने आया कि दूसरे दिन एक अभ्यर्थी ने चीटिंग का विरोध किया था, लेकिन उसे बाहर निकालने की धमकी देकर चुप करा दिया गया. लेकिन तीसरे दिन भी गिरोह कथित तौर पर पर्चियों और हल किए गए उत्तरों के जरिए नकल करवा रहा था. इस बार कई अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया. परीक्षा केंद्र में हंगामा होने पर पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले का भंडाफोड़ हो गया. इसके बाद चौथे दिन होने वाली परीक्षा रद्द हो गई. यह परीक्षा पिछले साल 25, 26, 27 और 28 नवंबर को प्रस्तावित थी. तीन दिन तक परीक्षा संचालित हुई, लेकिन विवाद और खुलासे के बाद चौथे दिन परीक्षा नहीं हो सकी.
कोटा में था ही नहीं सेंटर फिर भी करवा दी परीक्षा
पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि आयुष मंत्रालय की इस भर्ती परीक्षा का अधिकृत केंद्र कोटा में था ही नहीं. परीक्षा जयपुर में आयोजित होनी थी, लेकिन मास्टरमाइंड अशोक मीणा ने अपने स्तर पर सेटिंग कर कोटा में सेंटर तैयार करवा दिया. इसके लिए उसने ऐसा स्थान चुना जहां निर्माणाधीन भवन में कंप्यूटर एजुकेशन सेंटर संचालित हो रहा था. आरकेपुरम थाना इलाके में बीएसएनएल सर्किल के पास स्थित ऑनलाइन आईटी एजुकेशन सेंटर में परीक्षा आयोजित करवाई गई. यहां 27 नवंबर 2025 को आयुष मंत्रालय के छह पदों के लिए ऑनलाइन भर्ती परीक्षा के दौरान बड़े स्तर पर नकल का खुलासा हुआ था.
प्रिंटेड कॉपियों में मिले हूबहू जवाब
पुलिस जब परीक्षा केंद्र पहुंची तो वहां से भारी मात्रा में नकल सामग्री, तकनीकी उपकरण, हल प्रश्नपत्रों की प्रिंटेड कॉपियां और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई. जांच में मिली कॉपियों में प्रश्नपत्रों के हूबहू जवाब लिखे हुए पाए गए, जिससे संगठित नकल नेटवर्क की पुष्टि हुई.
4300 पेज की चार्जशीट, 12 आरोपी पहले ही जेल में
इस मामले में पुलिस पहले ही पांच इनामी आरोपियों सहित 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. आरकेपुरम थाना पुलिस कुछ दिन पहले करीब 4300 पेज का आरोप पत्र कोर्ट में पेश कर चुकी है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है और इसमें 25 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी संभव है.पुलिस आयुष मंत्रालय और परीक्षा संचालन का ठेका लेने वाली एजेंसियों की भूमिका की भी जांच कर रही है. फिलहाल पुलिस मास्टरमाइंड अशोक मीणा से पूछताछ कर करोड़ों के इस नकल नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है. आशंका है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
चेतन गुर्जर