मुझे मेडिकल बोर्ड में ले जाएं, मेरी जांच हो, मैं एम्स जाने को तैयार... पूजा खेडकर ने हाईकोर्ट में रखा पक्ष

'अगर उन्हें लगता है कि मैं दिव्यांग नहीं हूं, तो मेडिकल मेडिकल बोर्ड में जाने को तैयार हूं. इससे पहले उन्होंने कहा कि नाम परिवर्तन एक मुद्दा है. मुझे मेडिकल बोर्ड में ले जाएं, मेरी जांच हो! मैं एम्स जाने को तैयार हूं. उनके पास सभी दस्तावेज़ हैं. मैं एक निजी नागरिक हूं, मैं कैसे पहुंच पाऊंगी.'

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Pooja Khedkar Pooja Khedkar

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

बर्खास्त प्रोबेशनर IAS पूजा खेडकर की अंतरिम जमानत याचिका पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. 28 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी, जो आज खत्म हो रही है. सुनवाई से पहले दिल्ली पुलिस ने जवाबी हलफनामा हाईकोर्ट में दाखिल किया था. दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेड़कर ने कई दिव्यांगताएं दिखाने के लिए दो दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे.

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दिल्ली पुलिस ने खेड़कर की अग्रिम जमानत याचिका के जवाब में यह दलील दी कि जांच से पता चला है कि इनमें से एक डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट "जाली" और "छेड़छाड़ किया हुआ" हो सकता है. पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल होने के बाद आज पूजा खेडकर की जमानत पर फैसला लिया जा सकता है.

सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने पूजा खेडकर का बयान दाखिल किया जिसके अनुसार कहा गया कि उन्होंने (दिल्ली पुलिस) एक नई स्टेटस रिपोर्ट दायर की है. लिहाजा जिस दस्तावेज़ पर भरोसा किया जा रहा है वह रिलेवेंट नहीं है. अगर उन्हें लगता है कि मैं दिव्यांग नहीं हूं, तो मेडिकल मेडिकल बोर्ड में जाने को तैयार हूं. इससे पहले उन्होंने कहा कि नाम परिवर्तन एक मुद्दा है. मुझे मेडिकल बोर्ड में ले जाएं, मेरी जांच हो! मैं एम्स जाने को तैयार हूं. उनके पास सभी दस्तावेज़ हैं. मैं एक निजी नागरिक हूं, मैं कैसे पहुंच पाऊंगी.

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दिल्ली हाईकोर्ट में क्या-क्या हुआ-

सिद्धार्थ लूथरा ने आगे कहा कि उन्होंने मुझे (पूजा खेडकर) एकेडमी में वापस जाने के लिए कहा है.

इसपर यूपीएससी ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी रद्द हो गई है.

कोर्ट- तो उम्मीदवारी रद्द हो गई है?

लूथरा- केवल यूपीएससी द्वारा, है न? क्या डीओपीटी ने ऐसा किया है?

कोर्ट- जाहिर है आप उम्मीदवारी को अयोग्य ठहराने की सिफारिश करेंगे.

यूपीएससी- हमारा रुख यह है कि वह उस प्रयास का लाभ उठाने के योग्य नहीं थी जिसके लिए वह योग्य थी.

कोर्ट ने यूपीएससी से कहा- वह प्रोबेशन पर थी, यह उसकी नियुक्ति के आदेश के आधार पर था. वह आदेश भारत सरकार, डीओपीटी द्वारा है. अब जब आप उम्मीदवारी रद्द करने की सिफारिश करते हैं, तो क्या अब डीओपीटी का कोई आधिकारिक आदेश है?

यूपीएससी- पूरी प्रक्रिया का आधार उम्मीदवारी है. इस उम्मीदवार ने कानून के साथ असाधारण तरीके से खिलवाड़ किया है.

कोर्ट ने लूथरा से कहा- आप कह रहे हैं कि अगर सभी दस्तावेज यूपीएससी के पास पहले से हैं और आप सहयोग करने को तैयार हैं तो हिरासत की क्या जरूरत है, है न?

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा- जहां तक ​​राज्य का सवाल है, जब आरोप मुख्य रूप से यह है कि उसने झूठे दस्तावेज दिए हैं, तो इस मामले में मुकदमा चलेगा और देखा जाएगा कि दस्तावेज गलत हैं या नहीं. हिरासत की क्या जरूरत है?

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