अजित पवार प्लेन क्रैश: फिर होने लगी ब्लैक बॉक्स, रिकॉर्डर की चर्चा? जिनसे सामने आएगी क्रैश की वजह

अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन होने के बाद एक बार फिर से ब्लैकबॉक्स की चर्चा होने लगी है. ऐसे में जानते हैं विमान में वो कौन-कौन से उपकरण होते हैं, जिससे बाद में दुर्घटना के कारणों का पता चलता है. साथ ही ये भी समझते हैं कि आखिर ये काम कैसे करते हैं.

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बारामती प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन हो गया (Photo - PTI) बारामती प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन हो गया (Photo - PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान आज सुबह बरामती में लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई. इस दुर्घटना के बाद एक बार फिर से ब्लैकबॉक्स की चर्चा होने लगी है. क्योंकि यही वो उपकरण होता है, जो किसी भी विमान हादसे की वजहों का खुलासा करता है. इसमें विमान की हर एक गतिविधि दर्ज होती है. इसलिए दुर्घटना के बाद इसकी तलाश सबसे अहम होती है. 

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ब्लैकबॉक्स एक तरह से फ्लाइट रिकॉर्डर होता है. इसमें विमान और उस उड़ान से जुड़ा हर एक डेटा सुरक्षित रहता है.  यह विस्फोट, टक्कर, आग, उच्च तापमान और पानी से बच सकता है, जिससे हादसे के बाद भी डेटा सुरक्षित रहता है. यह हादसों के कारणों को समझने और भविष्य में उन्हें रोकने के लिए जरूरी है. इसलिए ब्लैक बॉक्स विमान हादसों की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण गैजेट होता है.

ब्लैकबॉक्स को 1930 के दशक में फ्रांसीसी इंजीनियर फ्रांस्वा हुसैनो ने ईजाद किया था.  उन्होंने फोटोग्राफिक फिल्म पर विमान के दस पैरामीटर्स को रिकॉर्ड करने वाला एक इक्विपमेंट बनाया था. उस वक्त से लेकर आज तक, ब्लैक बॉक्स की तकनीक में लगातार अपडेट होती गई. 

इसे ब्लैकबॉक्स क्यों कहते हैं?
इसे 'ब्लैक बॉक्स' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह एक प्रकाश-रोधी डिब्बे में होता है. हालांकि, इसका रंग हमेशा से नारंगी रहा, ताकि हादसे के बाद इसे आसानी से ढूंढा जा सके. आज ब्लैक बॉक्स में मेमोरी चिप्स का इस्तेमाल होता. इसमें कोई हिलने-डुलने वाला हिस्सा नहीं होता है. यही वजह है कि हादसे में इसके टूटने का खतरा कम होता है.

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ब्लैक बॉक्स कैसे काम करता है?
ब्लैक बॉक्स में दो हिस्से होते हैं, एक फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR), जो फ्लाइट की टेक्निकल डिटेल्स को रिकॉर्ड करता रहता है - जैसे ऊंचाई, स्पीड और इंजन का स्टेटस. दूसरा होता है  कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR), जो कॉकपिट की आवाजें और बातचीत रिकॉर्ड करता है.विमान में ब्लैक बॉक्स से अलग एक और उपकरण होता है - DVR. इसका काम विमान के विभिन्न कैमरों से सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड प्राप्त करना होता है. इसमें कॉकपिट और केबिन की फुटेज शामिल होती है. यह जांच में अतिरिक्त जानकारी देता है.

यह भी पढ़ें: प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी CM की मौत, जानें अजित पवार की शिक्षा और राजनीतिक सफर

भीषण हादसे में भी कैसे बच जाता है ब्लैक बॉक्स?
ब्लैक बॉक्स को बेहद कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहने के लिए बनाया जाता है. इस पर टाइटेनियम या स्टेनलेस स्टील जैसी मजबूत मटेरियल की मोटी परत होती है, जो 3,400 गुना गुरुत्व बल तक झेल सकता है. ये आग में एक घंटे तक 1,100 डिग्री सेल्सियस तापमान झेल सकता है. साथ ही  6,000 मीटर गहरे पानी में 30 दिन तक काम कर सकता हैं. पानी में इन्हें खोजने के लिए इनमें सिग्नल भेजने वाले बीकन भी लगे होते हैं.

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