जानें- टीपू सुल्तान से जुड़ी बातें और क्यों होता है विवाद?

दिल्ली विधानसभा में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने पर भारतीय जनता पार्टी विरोध कर रही है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली विधानसभा में भारत के इतिहास के 70 अहम लोगों की तस्वीर लगाई गई है, जिसमें टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से बीजेपी नाखुश हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 9:08 AM IST

दिल्ली विधानसभा में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने पर भारतीय जनता पार्टी विरोध कर रही है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली विधानसभा में भारत के इतिहास के 70 अहम लोगों की तस्वीर लगाई गई है, जिसमें टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से बीजेपी नाखुश हैं. बीजेपी का कहवा है कि टीपू सुल्तान ने दिल्ली के इतिहास में कोई योगदान नहीं दिया है. आइए जानते हैं टीपू सुल्तान से जुड़ी कई बातें...

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बताया जाता है कि हिंदू संगठन दावा करते हैं कि टीपू धर्मनिरपेक्ष नहीं था, बल्कि एक असहिष्णु और निरंकुश शासक था. वह दक्षिण का औरंगजेब था जिसने लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया और बड़ी संख्या में मंदिरों को गिराया. साल 2015 में आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य में भी टीपू सुल्तान की जयंती के विरोध में टीपू को दक्षिण का औरंगजेब बताया गया है, जिसने जबरन लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया.

19वीं सदी में ब्रिटिश गवर्मेंट के अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब 'मालाबार मैनुअल' में लिखा है कि कैसे टीपू सुल्तान ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू सुल्तान ने पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी और उनके बच्चों को उन्हीं के गले में बांध पर लटकाया गया. इस किताब में विलियम ने टीपू सुल्तान पर मंदिर, चर्च तोड़ने और जबरन शादी जैसे कई आरोप भी लगाए हैं. यहां 1964 में प्रकाशित किताब 'लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान' में कहा गया है कि सुल्तान ने मालाबार क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा हिंदुओं और 70,000 से ज्यादा ईसाइयों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया.

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सांप्रदायिक दृष्टिकोण से भले ही उन पर आरोप लग रहे हैं, लेकिन टीपू सुल्तान को दुनिया का पहला मिसाइलमैन कहा जाता है. बीबीसी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के मिसाइल कार्यक्रम के जनक एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब 'विंग्स ऑफ़ फ़ायर' में लिखा है कि उन्होंने नासा के एक सेंटर में टीपू की सेना की रॉकेट वाली पेंटिग देखी थी. असल में टीपू और उनके पिता हैदर अली ने दक्षिण भारत में दबदबे की लड़ाई में अक्सर रॉकेट का इस्तेमाल किया.

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