US में H-1B वीजा फ्रॉड की जांच के दायरे में Cognizant, भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या पड़ेगा इसका असर?

अमेरिकी सरकार ने H-1B और PERM वीजा कार्यक्रमों में धोखाधड़ी की जांच तेज कर दी है, जिसमें Cognizant जैसी बड़ी IT कंपनियां भी शामिल हैं. जांच का फोकस फर्जी आवेदन, वेज-किकबैक और विदेशी कर्मचारियों के शोषण पर है. जान‍िए भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए क्यों ये चिंता बढ़ाने वाली बात है, उन पर क्या असर पड़ेगा.

Advertisement
The company projects that the opportunity could grow to nearly $1 billion by the end of the year. The company projects that the opportunity could grow to nearly $1 billion by the end of the year.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:41 AM IST

अमेरिका में नौकरी कर डॉलर में कमाने का सपना देखने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए एक अहम खबर सामने आई है. अमेरिकी सरकार ने H-1B और PERM (ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का शुरुआती चरण) वर्क वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और नियमों के दुरुपयोग की जांच तेज कर दी है. इस जांच के दौरान जिन बड़ी कंपनियों का नाम सार्वजनिक रूप से सामने आया है, उनमें आईटी दिग्गज Cognizant भी शामिल है.

Advertisement

यह कार्रवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई वाली टास्क फोर्स टू एल‍िमिनेट फ्रॉड के तहत की जा रही है. अमेरिकी श्रम विभाग ( के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने बताया कि जांच एजेंसियों को कई व्हिसलब्लोअर्स से जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि Cognizant जैसी कुछ बड़ी कंपनियों से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है और कई समन (Subpoenas) जारी किए जा चुके हैं.

अमेरिकी सरकार क्या जांच कर रही है?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जांच का फोकस उन मामलों पर है, जहां H-1B और PERM वीजा प्रक्रिया का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया. इसमें फर्जी आवेदन, वेज-किकबैक (कर्मचारियों से वेतन का हिस्सा वापस लेने के आरोप), विदेशी कर्मचारियों के कथित शोषण और अमेरिकी श्रमिकों की जगह कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है.

Advertisement

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल कॉग्नीजेंट के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं और न ही किसी अदालत ने कंपनी को किसी भी मामले में दोषी ठहराया है. जांच अभी शुरुआती चरण में है.

भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए यह मामला क्यों अहम है?

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन से जुड़े हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय नागरिक थे. यानी अमेरिका के टेक सेक्टर में भारतीय इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी सबसे अधिक है.

वीजा ट्रेंड्स से जुड़े सार्वजनिक डेटाबेस बताते हैं कि Cognizant H-1B वीजा स्पॉन्सर करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रही है. इसलिए कंपनी से जुड़ी किसी भी बड़ी जांच पर भारतीय आईटी सेक्टर की नजर स्वाभाविक रूप से रहती है.

कॉग्नीजेंट पहले भी रही है चर्चा में

पिछले कुछ वर्षों में Cognizant वैश्विक स्तर पर लागत घटाने, रीस्ट्रक्चरिंग और कर्मचारियों की छंटनी को लेकर भी चर्चा में रही है. ऐसे में यदि H-1B और PERM मामलों में नियामकीय जांच और सख्त होती है तो कंपनी समेत अन्य आईटी कंपनियों को भी वीजा प्रक्रियाओं में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है.

भारत के IT सेक्टर और नौकरियों पर क्या असर पड़ सकता है?

Advertisement

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि H-1B वीजा पर निगरानी और कड़ी होती है तो इसके कई संभावित प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.

1. ऑनसाइट अवसर सीमित हो सकते हैं
कंपनियां नए H-1B वीजा स्पॉन्सर करने में पहले से अधिक सतर्क रुख अपना सकती हैं. इससे अमेरिका में काम करने के अवसर कुछ हद तक प्रभावित हो सकते हैं.

2. भारत में ऑफशोर हायरिंग बढ़ सकती है
यदि अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति जटिल होती है, तो कंपनियां भारत जैसे देशों से रिमोट या ऑफशोर मॉडल पर अधिक काम कराने की रणनीति अपना सकती हैं.

3. हाई-स्किल और हाई-सैलरी प्रोफाइल को मिल सकता है फायदा
अमेरिकी श्रम विभाग वेतन और भर्ती प्रक्रिया पर विशेष नजर रख रहा है. ऐसे में अधिक कौशल और बेहतर वेतन वाले पदों पर H-1B स्पॉन्सरशिप की संभावना अपेक्षाकृत मजबूत रह सकती है.

फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है. आने वाले महीनों में अमेरिकी एजेंसियों की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इसका कॉग्नीजेंट, अन्य आईटी कंपनियों और भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »