थ्री लैंग्वेज रूल को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और CBSE को भेजा नोटिस

सीबीएसई के कक्षा 9 और 10 में तीसरी भाषा को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है जिसके बाद से अदालत ने केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी की है. कोर्ट में दायर हुई याचिका में कहा कि नई भाषा नीति छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नियम छात्रों पर ज्यादा दबाव बढ़ा सकता है.

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Supreme Court notice to Centre and CBSE Amed Third Language Supreme Court notice to Centre and CBSE Amed Third Language

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:37 PM IST

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 9वीं और 10वीं में दो भारतीय भाषाओं के साथ तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य करने के CBSE के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने सीबीएसई और सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अब 15 या 16 जुलाई को सुनवाई करेगा. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर विचार किया जाना जरूरी है. हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में थ्री फार्मूले पर कोई रोक नहीं लगाई है. 

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इसके साथ ही 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए सीबीएसई के नए थ्री लैंग्वेज रूल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अचानक दो अतिरिक्त भाषाएं थोपने से 10वीं बोर्ड की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों पर मानसिक दवाब पड़ेगा जिससे वे सही तरीके से तैयारी नहीं कर पाएंगे. 

क्या है ये नया रूल? 

सीबीएसई की थ्री लैंग्वेज रूल के मुताबिक कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं यानी R1, R2 और R3 पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है. इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए. विदेशी भाषाओं का विकल्प तभी चुना जा सकता है, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हो. छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की इन जनहित याचिका में इस नियम को मनमाना और बोझिल बताया गया है.

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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बोर्ड ने हितधारकों से उचित परामर्श किए बिना रातों-रात यह बदलाव कर दिया. शीर्ष अदालत ने याचिकाओं पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. 

विदेशी भाषा चुनने के लिए होंगी शर्तें 

वहीं, अगर कोई छात्र विदेशी भाषा यानी कि फ्रेंच, जर्मन या दूसरी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो वह उसे तीसरी भाषा के रूप में चुन सकेगा. 

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