टीवी स्क्रीन पर जब मिसाइलों के धुएं और सायरन की आवाजें गूंजती हैं, तो हमारा ध्यान अक्सर नक्शों और हार-जीत पर टिक जाता है. लेकिन इन धमाकों की गूंज उन लाखों भारतीय युवाओं के भविष्य में भी सुनाई दे रही है, जिन्होंने मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) को अपने सपनों की जमीन बनाया था.
अब मार्च 2026 के इस तनावपूर्ण माहौल ने दुबई से लेकर तेहरान तक के जॉब मार्केट को पूरी तरह पलट दिया है. कुछ ऐसी नौकरियां जो कभी 'शान' मानी जाती थीं, अब उन पर संकट के बादल हैं, जबकि कुछ नए करियर 'ढाल' बनकर उभरे हैं. आइए समझते हैं पूरा गणित.
लग्जरी और कंस्ट्रक्शन पर लगा ब्रेक
दशकों से खाड़ी देशों की पहचान वहां की ऊंची इमारतों और आलीशान टूरिज्म से रही है. लेकिन युद्ध के साये ने इस चमक को थोड़ा धुंधला कर दिया है.
एविएशन और टूरिज्म: एयरस्पेस बंद होने और उड़ानों के रूट बदलने से विमानन क्षेत्र में नई भर्तियों पर लगभग 'हायरिंग फ्रीज' लग गया है. होटलों और रिसॉर्ट्स में भी अब वैसी रौनक नहीं रही, जिससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर्स के युवाओं में अपनी नौकरी को लेकर डर बढ़ा है.
मेगा कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स: सऊदी अरब के 'नियोम' (NEOM) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स, जो कभी इंजीनियरों के लिए स्वर्ग थे, अब बजट कटौती और सुरक्षा कारणों से धीमी गति पर हैं. स्टील और सीमेंट की सप्लाई चेन टूटने से साइट सुपरवाइजर्स और आर्किटेक्ट्स के लिए नए मौके कम हुए हैं.
'संकट' में जो समाधान का करियर
हैरानी की बात यह है कि इस लगातार संकट के बीच कुछ खास स्किल्स की मांग में 300% तक का उछाल देखा गया है:
साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल वॉरफेयर
ईरान और इजरायल के बीच असली जंग अब 'कोड' और 'सर्वर' पर लड़ी जा रही है. सरकारी डेटा, तेल की रिफाइनरियों के कंट्रोल सिस्टम और बैंकों को हैकर्स से बचाने के लिए 'एथिकल हैकर्स' और 'साइबर डिफेंस एक्सपर्ट्स' की डिमांड 400% तक बढ़ गई है.
यहां सैलरी पैकेज करोड़ों में जा रहे हैं क्योंकि एक छोटी सी डिजिटल चूक पूरे देश को अंधेरे में डुबो सकती है.
स्ट्रैटेजिक और वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स
जब समुद्र (हॉर्मुज की खाड़ी) में मिसाइलें गिरती हैं, तो जहाज रुक जाते हैं. ऐसे में उन लोगों की चांदी है जो 'जुगाड़' नहीं, बल्कि 'स्मार्ट रूटिंग' जानते हैं. ऐसे प्रोफेशनल्स जो समुद्र के बजाय 'लैंड-ब्रिज' (सऊदी से जॉर्डन होते हुए इजराइल या दुबई) या नए हवाई रास्तों से सामान पहुंचा सकें. 2026 में 'सप्लाई चेन आर्किटेक्ट्स' की मांग चरम पर है.
मेंटल हेल्थ और क्राइसिस काउंसलर्स
युद्ध केवल इमारतों को नहीं, इंसान के भरोसे को भी तोड़ता है. खाड़ी देशों में रह रहे लाखों प्रवासियों (Expats) में इस वक्त भारी तनाव और अनिश्चितता है. कॉर्पोरेट कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के लिए 'इन-हाउस थेरेपिस्ट' रख रही हैं ताकि वे युद्ध के डर के बीच भी काम पर फोकस कर सकें. 'PTSD' और 'एंग्जायटी मैनेजमेंट' के विशेषज्ञों के लिए यह एक बड़ा मार्केट बन गया है.
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