दुनिया का सबसे खुशहाल देश कौन-सा है? अगर आप सोच रहे हैं कि इसका जवाब हर साल बदलता होगा, तो ऐसा नहीं है. लगातार कई सालों से फिनलैंड वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में पहला स्थान हासिल कर रहा है. ऐसे में एक सवाल अक्सर उठता है कि आखिर वहां ऐसा क्या है, जो लोगों को इतना खुश रखता है? क्या इसकी वजह उनकी नौकरी और काम करने का तरीका भी है? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका जवाब काफी हद तक हां है. हालांकि, ऐसी कोई आधिकारिक रैंकिंग नहीं है जो यह कहे कि फिनलैंड के कर्मचारी दुनिया में सबसे ज्यादा खुश हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स बताती हैं कि वहां का वर्क कल्चर, वर्क-लाइफ बैलेंस और कर्मचारियों के प्रति भरोसे का माहौल लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाता है.
कम घंटे, ज्यादा भरोसा
फिनलैंड में काम के दौरान कर्मचारियों को सिर्फ काम पूरा करने पर नहीं, बल्कि उसके परिणाम पर आंका जाता है. कई संस्थानों में कर्मचारियों को अपने काम के तरीके और समय को लेकर पर्याप्त स्वतंत्रता मिलती है. यही वजह है कि लोग अपने परिवार, दोस्तों और निजी जिंदगी के लिए भी समय निकाल पाते हैं.
छुट्टियों को माना जाता है जरूरी
भारत में कई कर्मचारी छुट्टी लेने से पहले कई बार सोचते हैं, लेकिन फिनलैंड में छुट्टी लेना कमजोरी नहीं बल्कि बेहतर काम करने का हिस्सा माना जाता है. कर्मचारियों को पर्याप्त वार्षिक अवकाश मिलता है और उन्हें उसका इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लगातार काम करने के बजाय समय-समय पर आराम करने से उत्पादकता भी बढ़ती है.
बॉस नहीं, टीम कल्चर
फिनलैंड के कार्यस्थलों की एक और खासियत है कि वहां पद का अंतर जरूर होता है, लेकिन व्यवहार में बराबरी का माहौल देखने को मिलता है. कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से खुलकर बात कर सकते हैं. इससे तनाव कम होता है और टीम में भरोसा बढ़ता है. करियर एक्सपर्ट्स का कहना है कि अच्छी सैलरी जरूरी है, लेकिन वही कर्मचारी लंबे समय तक संतुष्ट रहते हैं जिन्हें अपने काम का उद्देश्य समझ आता है, सीखने का मौका मिलता है और जिनकी बात सुनी जाती है. यही वजह है कि फिनलैंड जैसे देशों में मानसिक स्वास्थ्य और वर्क-लाइफ बैलेंस पर लगातार निवेश किया जाता है.
कर्मचारी संतुष्टि कैसी है?
विभिन्न यूरोपीय सर्वे और OECD डेटा के अनुसार, फिनलैंड में नौकरी संतुष्टि का लेवल आमतौर पर ऊंचा माना जाता है. इसका कारण सिर्फ वेतन नहीं, बल्कि नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक भरोसा और कम असमानता है. हालांकि, हर सेक्टर और व्यक्ति के अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क