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How to Become Teacher: एक-दो नहीं, टीचर बनने के लिए कर सकते हैं इतने कोर्स

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 6:21 AM IST
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टीचिंग बेहद अच्छा प्रोफेशन है और शिक्षकों का स्‍थान हमेशा ही ऊंचा रहा है. यही कारण है कि भारत में ज्यादातर युवा टीचर बनना चाहते हैं. आइए जानते हैं टीचिंग लाइन में करियर कैसे बनाएं. टीचर बनने के इच्‍छुक उम्‍मीदवारों के लिए इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन स्‍तर पर कई कोर्स मौजूद हैं, जिनमें प्रमुख कोर्स इस तरह हैं-

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B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
टीचिंग क्षेत्र में आने के लिए युवाओं के बीच यह कोर्स काफी लोकप्रिय है. यह दो साल का कोर्स है जिसे करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम देना होता है. एग्जाम देने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है.

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BTC (बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट)
 यह कोर्स केवल उत्तर प्रदेश के उम्‍मीदवारों के लिए है और इसमें केवल राज्‍य के ही स्‍टूडेंट हिस्‍सा ले सकते हैं. ग्रेजुएशन के बाद ये कोर्स कर सकते हैं जिसकी अवधि दो साल है. इस कोर्स के बाद प्राइमरी और अपर प्राइमरी लेवल के टीचर बनने के योग्‍य हो जाते हैं.

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NTT (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग)
 यह 2 साल का कोर्स है जिसमें एडमिशन 12वीं के अंकों के आधार पर या कई जगह प्रवेश परीक्षा के आधार पर दिया जाता है. इसके बाद उम्‍मीदवार प्राइमरी टीचर बनने के लिए एलिजिबिल हो जाते हैं.

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BPEd (बैचलर इन फिजिकल एजुकेशन)
ग्रेजुएट लेवल पर फिजिकल एजुकेशन एक सब्‍जेक्‍ट के रूप में पढ़ा है वे एक साल वाला बीपीएड कोर्स कर सकते हैं जबकि जिन्होंने 12वीं में फिजिकल एजुकेशन विषय पढ़ा है वे तीन साल वाला ग्रेजुएशन कोर्स कर सकते हैं.

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JBT (जूनियर टीचर ट्रेनिंग)
जूनियर टीचर ट्रेनिंग कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं है और इस कोर्स में दाखिला कहीं मेरिट के आधार पर तो कहीं एंट्रेंस के आधार पर होता है. इस कोर्स के बाद प्राइमरी टीचर बनने के योग्य हो जाते हैं.

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D.Ed (डिप्लोमा इन एजुकेशन)
डिप्लोमा इन एजुकेशन का यह दो साल का कोर्स बिहार और मध्य प्रदेश में प्राइमरी शिक्षक बनने के लिए कराया जाता है. इस कोर्स में 12वीं के अंकों के आधार पर एडमिशन होता है. (फोटो सोर्स -Freepik.com)

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