JEE Advanced 2026 की परीक्षा देने के बाद अच्छे रैंक की उम्मीद लगाए बैठे उन हजारों छात्रों को बड़ा झटका लगा है, जो 12वीं में 75% अंक की अनिवार्यता (75% क्राइटेरिया) में ढील मिलने की आस लगाए बैठे थे. इस साल परीक्षा आयोजित कर रहे संस्थान IIT रुड़की ने साफ कर दिया है कि इस नियम में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी.
संस्थान का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब देश भर में छात्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नए मार्किंग सिस्टम और मूल्यांकन में गड़बड़ियों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार रियायत की मांग कर रहे थे.
क्यों नहीं मिलेगी ढील? IIT रुड़की की दलील
IIT रुड़की ने समाचार एजेंसी को दिए बयान में स्पष्ट किया कि वे इस नियम को क्यों नहीं बदल सकते. तर्क है कि प्रवेश प्रक्रिया में देश भर के 36 अलग-अलग शिक्षा बोर्ड हिस्सा ले रहे हैं. किसी एक बोर्ड की समस्या के कारण पूरे देश के नियम नहीं बदले जा सकते. ऐसा करना दूसरे बोर्ड के छात्रों के साथ नाइंसाफी होगी.
चूंकि यह क्राइटेरिया पिछले साल दिसंबर में ही जारी कर दिया गया था, इसलिए ऐन वक्त पर 'गोलपोस्ट' बदलना संभव नहीं है. संस्थान के मुताबिक, पिछले साल भी कई छात्रों ने अच्छी रैंक होने के बावजूद 12वीं के प्रतिशत कम होने के कारण अपनी सीटें गंवाई थीं. हालांकि, IIT रुड़की ने छात्रों को थोड़ी उम्मीद जरूर दी है. संस्थान ने कहा कि वे CBSE के मार्किंग विवाद से पैदा हुए हालातों से वाकिफ हैं और इस मामले को लेकर सीबीएसई के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि प्रभावित छात्रों की समस्या का प्राथमिकता से समाधान निकाला जा सके.
क्या है पूरा विवाद?
इस साल सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम लागू किया था. छात्रों और खुद कई परीक्षकों का आरोप है कि इस तकनीकी सिस्टम में गड़बड़ियों के कारण छात्रों को उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले हैं. कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने जेईई में बेहतरीन रैंक हासिल की है, लेकिन वे 12वीं में कुछ नंबरों से 75% के आंकड़े से चूक गए हैं. फिलहाल ऐसे कई छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) और कॉपियों की री-चेकिंग के लिए आवेदन किया है.
क्या है मौजूदा नियम?
आईआईटी और एनआईटी (IITs/NITs) में दाखिले के लिए छात्रों को दो में से एक शर्त पूरी करनी होती है. इसमें या तो छात्र ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में कम से कम 75% अंक (एससी/एसटी के लिए 65%) हासिल किए हों. या फिर वह अपने संबंधित बोर्ड के टॉप 20 परसेंटाइल (Top 20 Percentile) छात्रों की सूची में शामिल हो.
पहले मिल चुकी है छूट
छात्रों और अभिभावकों की इस मांग के पीछे कोरोना काल का तर्क था. महामारी के दौरान शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने के कारण साल 2020, 2021 और 2022 में इस 75% वाले नियम को अस्थाई रूप से हटा दिया गया था. छात्रों का तर्क था कि इस बार सीबीएसई की गलती के कारण भी वैसी ही असाधारण स्थितियां बनी हैं, इसलिए एक बार फिर छूट मिलनी चाहिए थी, जिस पर आईआईटी रुड़की ने अब पूरी तरह पानी फेर दिया है.
आजतक एजुकेशन डेस्क