चीन की सेना के सबसे बड़े जनरल झांग युशिया पर बीजिंग के परमाणु हथियार कार्यक्रम की जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप लगा है. यह जांच चीन के नेता शी जिनपिंग द्वारा सेना में चल रही बड़ी सफाई का हिस्सा है. 75 साल के झांग सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के दो वाइस चेयर में से सीनियर हैं, जो चीन की सेना का सबसे शक्तिशाली संगठन है.
चीन के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि झांग पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन का संदेह है, लेकिन कोई विवरण नहीं दिया. लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को शीर्ष चीनी अधिकारियों की एक बैठक में बताया गया कि झांग ने चीन के परमाणु हथियारों की मुख्य तकनीकी जानकारी वॉशिंगटन को दी है. लेकिन बैठक में ज्यादा डिटेल नहीं बताए गए.
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झांग पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के सैन्य निर्णय लेने वाले संगठन सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में अपना अलग प्रभाव क्षेत्र बनाने की कोशिश की, जिससे संगठन में फूट पड़ी. चीन नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के पूर्व जनरल मैनेजर गु जुन ने झांग के खिलाफ कुछ सबूत दिए हैं. गु खुद कम्युनिस्ट पार्टी के अपराधों के लिए जांच के घेरे में हैं.
वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने जर्नल को बताया कि यह जांच दिखाती है कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस रखती है. झांग या गु से कोई टिप्पणी नहीं मिली.
क्या हुआ है? जांच की पूरी कहानी
झांग युशिया 1968 से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में हैं. ग्राउंड फोर्सेस के जनरल हैं. वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयर हैं, जिसकी अध्यक्षता खुद शी जिनपिंग करते हैं. यह कमीशन चीन की सेना को नियंत्रित करता है.
रिपोर्ट्स कहती हैं कि झांग पर न सिर्फ परमाणु रहस्य लीक करने का आरोप है, बल्कि प्रमोशन के लिए बड़ी रिश्वत लेने का भी. इसमें एक डिफेंस मिनिस्टर को प्रमोट करने के लिए रिश्वत शामिल है. यह जानकारी कोर टेक्निकल डेटा से जुड़ी है, जो चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम की महत्वपूर्ण तकनीक है.
कमीशन के एक और सदस्य लियू जेनली पर भी जांच चल रही है. वे कमीशन के जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के चीफ ऑफ स्टाफ हैं. पिछले साल अक्टूबर में कमीशन के दूसरे वाइस चेयर हे वेइडोंग को पार्टी से निकाला गया. उनकी जगह झांग शेंगमिन को दी गई. 2024 में दो पूर्व डिफेंस मिनिस्टर्स को भ्रष्टाचार के आरोप में निकाला गया था.
शी जिनपिंग का सफाई अभियान क्या है?
यह सब शी जिनपिंग के लंबे समय से चल रहे एंटी-करप्शन अभियान का हिस्सा है. 2012 में सत्ता में आने के बाद शी ने 2 लाख से ज्यादा अधिकारियों को सजा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफाई सेना को सुधारने और शी के प्रति वफादारी सुनिश्चित करने के लिए है.
चीन की सेना में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा रहा है. प्रमोशन के लिए रिश्वत, गलत खरीदारी और जासूसी जैसे आरोप लगते रहते हैं. शी चाहते हैं कि सेना मजबूत और एकजुट हो, खासकर अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव में.
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अंतरराष्ट्रीय प्रभाव क्या होंगे?
यह खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने अपनी नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटजी जारी की है, जिसमें चीन को मुख्य खतरा बताया गया है. स्ट्रैटजी कहती है कि चीन को अमेरिका या उसके सहयोगियों पर हावी होने से रोकना है. यह अस्तित्व की लड़ाई नहीं है. अगर आरोप सही हैं तो यह चीन के लिए बड़ा झटका है.
परमाणु रहस्य लीक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. लेकिन चीन की सरकार इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम बता रही है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
यह जांच सेना में शी की पकड़ मजबूत करने का तरीका है. लेकिन इससे सेना की क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं. ताइवान प्लस की रिपोर्ट में कहा गया कि झांग पर संवेदनशील परमाणु जानकारी लीक करने का आरोप है. गु जुन के सबूतों से मामला मजबूत हुआ है.
यह मामला अभी जांच में है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऐसे मामलों में पारदर्शिता नहीं रखती. आने वाले दिनों में ज्यादा जानकारी आ सकती है. लेकिन यह दिखाता है कि चीन की सेना में अंदरूनी चुनौतियां कितनी गहरी हैं.
ऋचीक मिश्रा