बालाकोट स्ट्राइक में जिसने उड़ाई थी पाकिस्तान की नींद... भारत वही बम और मंगा रहा है
भारत की DAC ने इजरायल से करीब 1000 स्पाइस-1000 प्रिसिजन गाइडेंस किट्स की खरीद को मंजूरी दी. यह 100-125 किमी रेंज वाला स्टैंड-ऑफ ग्लाइड बम एंटी-जैमिंग और 3 मीटर सटीकता वाला है. इस बम से IAF की दुश्मन के इलाके में गहरे तक स्ट्राइक करने की क्षमता बढ़ेगी.
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ये है स्पाइस बम जिसने बालाकोट में ऐसी तबाही मचाई जिससे पाकिस्तान और आतंकियों की हालत खराब हो गई थी. (File Photo: Rafale)
भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में एक बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दी है, जिसमें इजरायल की कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स से लगभग 1000 स्पाइस-1000 प्रिसिजन-गाइडेड बम किट्स खरीदना शामिल है. इस फैसले से भारतीय वायु सेना (IAF) की लंबी दूरी की हमले की क्षमता मजबूत होगी.
स्पाइस-1000 एक स्टैंड-ऑफ ग्लाइड बम है, जो साधारण बमों को स्मार्ट और सटीक हथियारों में बदल देता है. यह तकनीक एंटी-जैमिंग है. गहरे हमलों के लिए उपयोगी है. भारत ने पहली बार 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में स्पाइस प्रिसिजन गाइडेंस किट का इस्तेमाल किया था.
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यह फैसला ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है. स्पाइस-1000 की खरीद से IAF को उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों पर दूर से हमला करने की क्षमता मिलेगी, जो दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम्स से बाहर रहकर संभव होगा. सौदे की डिलीवरी टाइमलाइन या यूनिट कॉस्ट की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
भारत की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) अपनी ग्लाइड बम्स जैसे गौरव विकसित कर रही है, लेकिन DAC ने स्पाइस-1000 को इसकी परिपक्वता और जल्द उपलब्धता के कारण चुना. SIPRI डेटा के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच भारत इजराइल के रक्षा निर्यात का 34% हिस्सा था, जो राफेल का सबसे बड़ा निर्यात ग्राहक बनाता है.
स्पाइस-1000 की स्पेसिफिकेशन्स
स्पाइस (स्मार्ट, प्रिसाइज इम्पैक्ट एंड कॉस्ट-इफेक्टिव) एक इजराइली विकसित इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO) और जीपीएस/आईएनएस-गाइडेड किट है, जो राफेल कंपनी द्वारा बनाई जाती है. यह साधारण अनगाइडेड बमों को प्रिसिजन-गाइडेड मुनिशन्स में बदल देती है. स्पाइस-1000 विशेष रूप से 500 किलोग्राम (1,000 पाउंड क्लास) वॉरहेड के लिए डिजाइन की गई है. यहां इसकी मुख्य स्पेसिफिकेशन्स हैं...
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वजन और साइज: स्पाइस-1000 का वजन करीब 453-500 किलोग्राम है. यह Mk.83 या इसी क्लास के पेनेट्रेशन वॉरहेड्स पर फिट होती है. पूरी सिस्टम की लंबाई और चौड़ाई स्टैंडर्ड बमों के अनुरूप है, जो इसे विभिन्न फाइटर जेट्स पर आसानी से इंटीग्रेट करने योग्य बनाती है.
रेंज: इसकी स्टैंड-ऑफ रेंज 100 से 125 किलोमीटर तक है. इसमें डिप्लॉयेबल विंग्स लगे होते हैं, जो इसे ग्लाइड मोड में दूर तक ले जाते हैं. इससे लॉन्च करने वाला विमान दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज से बाहर रह सकता है. रिलीज पॉइंट से 125 किमी तक लक्ष्य पर हमला कर सकती है.
गाइडेंस सिस्टम: स्पाइस-1000 में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीन-मैचिंग एल्गोरिदम और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) का संयोजन है. यह जीपीएस-इंडिपेंडेंट ऑपरेशन की सुविधा देता है, यानी जीपीएस सिग्नल न होने पर भी काम करता है. यह जैमिंग (इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप) से भी बच जाता है. ऑटोमैटिक टारगेट एक्विजिशन (ATA) और ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकिंग (ATT) फीचर्स हैं, जो लक्ष्य की तस्वीर से मैच करके सटीक हमला सुनिश्चित करते हैं.
एक्यूरेसी: सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) 3 मीटर से कम है, यानी 50% मौकों पर हिट 3 मीटर के दायरे में होता है. यह उच्च सटीकता इसे हाई-वैल्यू टारगेट्स जैसे कमांड सेंटर्स, बंकरों या एयरफील्ड्स के लिए आदर्श बनाती है.
वॉरहेड टाइप: जनरल पर्पज या पेनेट्रेशन वॉरहेड्स, जो कंक्रीट या मजबूत संरचनाओं को भेद सकते हैं. स्पाइस-1000 एयर-टू-ग्राउंड मुनिशन है, जो ग्राउंड टारगेट्स पर फोकस करती है.
इंटीग्रेशन: IAF के राफेल, एसयू-30एमकेआई और संभावित रूप से तेजस फाइटर जेट्स पर इंटीग्रेट किया जाएगा. यह विभिन्न स्ट्राइक सिनेरियो में फ्लेक्सिबल यूज की अनुमति देता है.
अन्य फीचर्स: यह ऑटोनॉमस है, यानी लॉन्च के बाद खुद लक्ष्य पर जाती है. इसमें मल्टीपल टारगेट्स पर एक साथ हमले की क्षमता है. यह स्पाइस फैमिली का हिस्सा है, जिसमें स्पाइस-2000 और स्पाइस-250 शामिल हैं.
स्पाइस-1000 की कीमत प्रति यूनिट ऊंची है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता और लागत-प्रभावी डिजाइन इसे मूल्यवान बनाती है.
भारत का स्पाइस फैमिली से पुराना रिश्ता है. 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में स्पाइस-2000 का इस्तेमाल किया गया था, जहां IAF ने पाकिस्तान में आतंकी कैंपों पर सटीक हमला किया. उसी साल भारत ने 100 से ज्यादा स्पाइस-2000 यूनिट्स की इमरजेंसी खरीद की थी.
स्पाइस-1000 स्पाइस-2000 और हल्के घरेलू ग्लाइड बम्स के बीच का गैप भरता है. यह भारत की रक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण है, खासकर पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के साथ तनाव में.
इसके प्रभाव और असर
स्पाइस-1000 की खरीद से भारत की रक्षा क्षमता पर कई प्रभाव पड़ेंगे...
सैन्य प्रभाव: यह IAF को गहरे हमलों की क्षमता देगा, जहां विमान सुरक्षित दूरी से हमला कर सकेंगे. 125 किमी रेंज से दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा देना आसान होगा. एंटी-जैमिंग होने से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में फायदा मिलेगा. उच्च एक्यूरेसी से नागरिक क्षति कम होगी. सर्जिकल स्ट्राइक्स प्रभावी होंगे. यह लेयर्ड स्ट्राइक कैपेबिलिटी बढ़ाएगा, जहां एयर-टू-एयर और ग्राउंड अटैक एक साथ काम करेंगे.
रणनीतिक असर: भारत की स्वदेशी कार्यक्रमों के साथ आयात का बैलेंस बनाएगा. DRDO भी ऐसा ही बम गौरव विकसित कर रहा है. लेकिन स्पाइस-1000 से तत्काल गैप भरेंगे. यह इजराइल के साथ रक्षा संबंध मजबूत करेगा, जो भारत का प्रमुख सप्लायर है. चीन के साथ LAC पर तनाव में लंबी रेंज वाले हथियार उपयोगी होंगे.
सुरक्षा प्रभाव: बालाकोट जैसे ऑपरेशन्स में सिद्ध तकनीक से आतंकवाद विरोधी अभियानों में मजबूती आएगी. यह भारत को क्षेत्रीय शक्ति बनाए रखने में मदद करेगा.
कुल मिलाकर, यह सौदा भारत की रक्षा आधुनिकीकरण का हिस्सा है. स्पाइस-1000 जैसी उन्नत तकनीक से IAF विश्व स्तर की सेना बनेगी, जो शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.
ऋचीक मिश्रा