तेजस फाइटर जेट अगले बुधवार से फिर उड़ान भरने को तैयार, दो महीने से ग्राउंडेड था बेड़ा

भारतीय वायुसेना के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस का पूरा बेड़ा दो महीने से ग्राउंडेड था. अब अच्छी खबर आई है. HAL चेयरमैन डॉ. डीके सुनील ने कहा कि सुरक्षा समीक्षा पूरी हो गई है. अगले बुधवार तक लगभग 36 तेजस विमान फिर उड़ान भर सकेंगे. एक बार की सेफ्टी चेक के बाद सेवा बहाल होगी, ताकि पायलट ट्रेनिंग और वायुसेना की तैयारियां प्रभावित न हों.

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HAL के टारमैक पर खड़े तेजस फाइटर जेट. (Photo: HAL) HAL के टारमैक पर खड़े तेजस फाइटर जेट. (Photo: HAL)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

भारतीय वायुसेना के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस का पूरा बेड़ा पिछले दो महीनों से जमीन पर खड़ा है. लेकिन अब अच्छी खबर है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर डीके सुनील ने कहा है कि सुरक्षा समीक्षा पूरी हो चुकी है. अगले बुधवार तक तेजस विमान फिर से उड़ान भर सकते हैं.

लोकल मॉडिफिकेशन कमिटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है. क्लियरेंस प्रोसेस लास्ट स्टेज में पहुंच गई है. इस बार खास सुरक्षा जांच के बाद विमानों को दोबारा उड़ाने की अनुमति मिलेगी. करीब 36 तेजस विमान चरणबद्ध तरीके से फिर से सेवा में लौटेंगे. यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि पायलटों की ट्रेनिंग और वायुसेना की तैयारियों में कोई रुकावट न आए.

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तेजस विमान क्या है और क्यों है यह महत्वपूर्ण

तेजस भारत का पहला स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है जिसे DRDO और HAL ने मिलकर बनाया है. यह विमान बहुत हल्का, तेज और आधुनिक तकनीक से लैस है. इसमें बेहतर रडार, मिसाइल ले जाने की क्षमता और पायलट की सुरक्षा के लिए खास सिस्टम दिए गए हैं. 2016 से भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद तेजस ने अपनी उपयोगिता साबित की है. 

शुरुआती बैच इंडियन ऑपरेशनल क्लियरेंस यानी आईओसी और फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस यानी एफओसी वाले थे. एफओसी वैरिएंट 2019-2020 से आना शुरू हुआ. ये विमान मुख्य रूप से ट्रेनिंग, सीमा सुरक्षा और लड़ाकू अभ्यास के लिए इस्तेमाल होते हैं. लेकिन हाल ही में कुछ घटनाओं ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे. 

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हालिया घटना ने क्यों रोकी उड़ानें

दो महीने पहले एक ट्रेनिंग सॉर्टी के बाद लैंडिंग के समय तेजस विमान में एक गंभीर घटना हुई. विमान उतरते समय कुछ तकनीकी समस्या आ गई जिसकी वजह से पूरा बेड़ा ग्राउंड कर दिया गया. शुरुआती जांच में पता चला कि विमान के अंदर का कोई सिस्टम या टेक्निकल फेलियर जिम्मेदार था. इस घटना के बाद एचएएल और वायुसेना ने फौरन कदम उठाए.

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सारे विमानों की एक-एक करके जांच शुरू की गई. लोकल मॉडिफिकेशन कमिटी ने पूरी समीक्षा की और जरूरी बदलाव सुझाए. अब एक बार की खास सेफ्टी चेक के बाद विमान फिर उड़ान भर सकेंगे. यह प्रोसेस इसलिए जरूरी थी ताकि कोई बड़ा हादसा न हो और पायलट सुरक्षित रहें. करीब 36 विमान पहले चरण में फिर से एक्टिव किए जाएंगे और बाकी बाद में.

तीसरी दुर्घटना, पहले क्या-क्या हुआ

यह तेजस की तीसरी दुर्घटना है जब से इसे वायुसेना में शामिल किया गया है. पहली बड़ी घटना मार्च 2024 में जैसलमेर के पास हुई. ट्रेनिंग के दौरान विमान क्रैश हो गया लेकिन पायलट ने समय रहते ईजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गए. दूसरी घटना 2025 के दुबई एयरशो में हुई. वहां प्रदर्शन के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और पायलट की मौत हो गई. उसकी जांच अभी भी चल रही है. 

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इन तीनों घटनाओं में शामिल विमान पुराने आईओसी और एफओसी बैच के थे जो 2016 से वायुसेना में आ रहे थे. हर बार जांच के बाद सुधार किए गए लेकिन फिर भी पूरी तरह से समस्या दूर नहीं हो पाई. एचएएल का कहना है कि हर घटना से सीखकर विमान को और बेहतर बनाया जा रहा है. 

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तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में लगातार देरी

तेजस के नए और बेहतर वर्जन एमके-1ए की डिलीवरी काफी समय से अटकी हुई है. वायुसेना ने 180 विमानों का ऑर्डर दिया है लेकिन डिलीवरी में करीब दो साल की देरी हो चुकी है. HAL कह रहा है कि उत्पादन बढ़ाने की कोशिश चल रही है लेकिन तकनीकी और सप्लाई चेन की दिक्कतों की वजह से समय पर विमान नहीं पहुंच पा रहे.

एमके-1ए में पुराने मॉडल से ज्यादा आधुनिक फीचर्स हैं जैसे बेहतर इंजन, रडार और हथियार ले जाने की क्षमता. अगर ये विमान समय पर आ जाते तो वायुसेना की ताकत और बढ़ जाती. फिलहाल पुराने बेड़े को फिर से एक्टिव करने से ट्रेनिंग जारी रखने में मदद मिलेगी लेकिन लंबे समय में नए विमानों की जरूरत बनी रहेगी. सरकार और एचएएल दोनों मिलकर इस देरी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं.

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एचएएल के डॉक्टर डीके सुनील ने जोर देकर कहा है कि सुरक्षा सबसे पहले है. एक बार की जरूरी जांच के बाद ही विमान फिर से उड़ान भरेंगे. पायलटों को भी नई ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे किसी भी तकनीकी समस्या से निपट सकें. पूरा बेड़े को चरणबद्ध तरीके से सक्रिय होगा ताकि एक साथ बहुत ज्यादा दबाव न पड़े.

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