अब किसी ब्लाइंड स्पॉट में नहीं छिप सकेगा दुश्मन... इसरो के 52 एडवांस्ड सैटेलाइट बदल देंगे तस्वीर

भारत 2029 तक 52 एडवांस्ड सैन्य निगरानी उपग्रह लॉन्च करेगा, जिसकी लागत 26,000 करोड़ रुपये है. इनमें इन्फ्रारेड सेंसर से रात में भी इमेजिंग होगी. ISRO 21 और प्राइवेट सेक्टर 31 उपग्रह बनाएंगे. दिन-रात, हर मौसम में सीमा और समुद्री निगरानी मजबूत होगी. पहला उपग्रह अप्रैल 2026 में लॉन्च हो सकता है.

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इसरो अगले तीन साल में 52 मिलिट्री सैटेलाइट्स लॉन्च करने वाला है. (Photo: ISRO) इसरो अगले तीन साल में 52 मिलिट्री सैटेलाइट्स लॉन्च करने वाला है. (Photo: ISRO)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठा रहा है. देश 2029 तक 52 एडवांस्ड सैन्य निगरानी उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रहा है. यह प्रोजेक्ट स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-III (SBS-3) के तहत चल रहा है. इसकी कुल लागत लगभग 26 हजार करोड़ रुपये है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अंतरिक्ष प्रोजेक्ट है. पहला उपग्रह अप्रैल 2026 तक लॉन्च हो सकता है.

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यह प्रोजेक्ट क्या है?

यह कार्यक्रम भारत को आसमान से लगातार नजर रखने की ताकत देगा. इन उपग्रहों में कई तरह के सेंसर लगे होंगे... 

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  • इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे (दिन में साफ तस्वीरें लेने के लिए).
  • सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) – जो बादलों और खराब मौसम में भी काम करता है.
  • इन्फ्रारेड सेंसर – ये रात में भी इमेजिंग कर सकेंगे. ये गर्मी (हीट) का पता लगाते हैं. इससे रात हो या बादल छाए हों, दुश्मन की हरकतें छिप नहीं पाएंगी.

ये उपग्रह मिलकर दिन-रात, हर मौसम में निगरानी करेंगे. इससे भारत की सीमाओं (जमीन और समुद्र तट) पर पूरी कवरेज मिलेगी.

क्यों इतना जरूरी है यह प्रोजेक्ट?

पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के साथ सीमा संघर्ष हुआ था. उस दौरान भारत को पता चला कि मौजूदा उपग्रह रात में या बादलों में अंधेरे में काम नहीं कर पाते. कई ब्लाइंड स्पॉट्स थे. इस प्रोजेक्ट से ऐसे कमजोरियों को दूर किया जाएगा.

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फायदा: उपग्रह बार-बार एक ही इलाके पर नजर रख सकेंगे (रिविजिट टाइम कम होगा).

सेना को सेना की हलचल, बुनियादी ढांचे का विकास, नौसेना की गतिविधियां आसानी से पता चलेंगी.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उपग्रह खुद खतरे पहचानेंगे. जरूरी तस्वीरें पहले भेजेंगे और ग्राउंड स्टेशन पर कम निर्भर रहेंगे.

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कौन बना रहा है ये उपग्रह?

  • ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) 21 उपग्रह बनाएगा और लॉन्च करेगा.
  • बाकी 31 उपग्रह प्राइवेट कंपनियां बनाएंगी. यह किसी भी भारतीय सैन्य अंतरिक्ष प्रोजेक्ट में प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान होगा. 
  • डिफेंस स्पेस एजेंसी (DSA) इन उपग्रहों का ऑपरेशनल कमांड संभालेगी.

उपग्रह कहां-कहां उड़ेंगे?

ये उपग्रह अलग-अलग ऑर्बिट में होंगे – लो-अर्थ ऑर्बिट (पृथ्वी के करीब) से लेकर जियोस्टेशनरी तक. इससे चीन, पाकिस्तान, हिंद महासागर क्षेत्र और पूरे रणनीतिक इलाकों पर पूरी नजर रहेगी.

भारत के लिए क्या मतलब?

यह प्रोजेक्ट भारत को मजबूत ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस) क्षमता देगा. दुश्मन की हरकतें पहले से पता चलेंगी, जिससे सेना बेहतर तैयारी कर सकेगी. ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाओं से सबक लेकर भारत अब अंतरिक्ष में आंखें बढ़ा रहा है. यह न सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा करेगा, बल्कि हिंद महासागर में भी भारत की ताकत बढ़ाएगा.

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यह कदम भारत को अंतरिक्ष में एक बड़ा खिलाड़ी बनाएगा. राष्ट्रीय सुरक्षा को नई ऊंचाई देगा. प्रोजेक्ट 2024 में कैबिनेट कमिटी से मंजूर हुआ था और अब तेजी से काम चल रहा है.

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