सेना के लिए ये कंपनी हर दिन बना रही 200 सुसाइड ड्रोन, अब सीमा की सुरक्षा और बढ़ेगी

IG Defence ने FPV कामिकाजे ड्रोन्स का रोजाना उत्पादन बढ़ाकर 200 ड्रोन्स प्रतिदिन कर दिया है. ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए इन ड्रोन्स की क्षमता और बढ़ाई जा रही है. यह भारतीय सेना की बढ़ती ड्रोन जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

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ऐसे ही दिखते हैं कामिकाजे FPV ड्रोन जिनके इस्तेमाल से दुश्मन डरता है. (Photo: Representative/Reuters) ऐसे ही दिखते हैं कामिकाजे FPV ड्रोन जिनके इस्तेमाल से दुश्मन डरता है. (Photo: Representative/Reuters)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:41 PM IST

भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी ड्रोन कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. IG Defence नाम की भारतीय कंपनी ने FPV कामिकाजे ड्रोन्स का रोजाना उत्पादन बढ़ाकर 200 ड्रोन्स प्रतिदिन कर दिया है. यह क्षमता और भी बढ़ाई जाएगी. ऑपरेशन सिंदूर में इन ड्रोन्स ने अच्छा प्रदर्शन किया था, जिसके बाद अब कंपनी बड़े स्तर पर उत्पादन कर रही है.

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान IG Defence के FPV कामिकाजे ड्रोन्स ने भारतीय सेना की मदद की थी. इन ड्रोन्स ने सटीक हमले करके आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया. अब कंपनी ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है. एक साल पहले जहां यह कंपनी सीमित संख्या में ड्रोन्स बना रही थी, वहीं अब रोज 200 ड्रोन्स तैयार कर रही है. यह संख्या भविष्य में और बढ़ने वाली है.

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सेना की बढ़ती जरूरत

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में कहा था कि प्रत्येक कोर के लिए 8000 से 10000 ड्रोन्स की जरूरत है, जिसमें FPV यूनिट्स भी शामिल हैं. LAC और LoC पर दुश्मन के साथ सामना करने के लिए अब संख्या और तकनीक दोनों बहुत जरूरी हो गए हैं.

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पुराने हथियारों की जगह अब सस्ते, तेज और सटीक ड्रोन्स की मांग बढ़ गई है. FPV कामिकाजे ड्रोन्स इन्हीं जरूरतों को पूरा करते हैं. ये ड्रोन्स रीयल टाइम में लक्ष्य देखकर हमला कर सकते हैं. दुश्मन के ठिकानों को नष्ट कर सकते हैं.

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FPV कामिकाजे ड्रोन्स क्यों महत्वपूर्ण?

FPV का मतलब First Person View है. ये ड्रोन्स कैमरे से लैस होते हैं. ऑपरेटर उन्हें सीधे अपनी आंखों से उड़ाते हुए देख सकता है. कामिकाजे ड्रोन्स उन्हें कहा जाता है क्योंकि ये दुश्मन के लक्ष्य पर जाकर खुद को भी नष्ट कर देते हैं.

ये ड्रोन्स सस्ते, हल्के और आसानी से बनाए जा सकते हैं. इनका इस्तेमाल निगरानी, टोह लेने और सटीक हमले के लिए किया जाता है. आधुनिक युद्ध में स्वार्म अटैक के लिए भी ये बहुत उपयोगी साबित हो रहे हैं. IG Defence ने पिछले वित्तीय वर्ष में भारतीय सेना को हजारों FPV कामिकाजे ड्रोन्स सप्लाई किए हैं. 

कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मेजर जनरल आर.सी. पाढी (रिटायर्ड) ने कहा कि युद्ध की प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है. अब प्लेटफॉर्म आधारित युद्ध की जगह सिस्टम और बड़ी संख्या वाले युद्ध का दौर आ गया है. FPV कामिकाजे ड्रोन्स कम लागत में टैक्टिकल दबदबा बनाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी उत्पादन और तेजी से स्केलिंग अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.

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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

IG Defence की यह सफलता आत्मनिर्भर भारत अभियान का अच्छा उदाहरण है. पहले भारत को ऐसे ड्रोन्स विदेश से मंगवाने पड़ते थे, लेकिन अब स्वदेशी कंपनियां इनकी बड़े पैमाने पर आपूर्ति कर रही हैं. सेना अब हर सैनिक को ड्रोन से लैस करने की दिशा में काम कर रही है. IG Defence जैसी कंपनियां इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा रही हैं.

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