यूपी में नकलचियों पर नकेल, परीक्षा केंद्रों पर 34 हजार पुलिसकर्मी तैनात

नकल के लिए बदनाम यूपी में इस बार कुछ अलग ही माहौल है. बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्ती इतनी ज़्यादा है कि लाखों छात्र जहां परीक्षा शुरू होने के पहले हफ्ते में ही परीक्षा छोड़ चुके हैं, वहीं ऐसे छात्रों की भी कमी नहीं है कि जिन्हें इम्तेहान देने में सांसें फूल रही हैं. असल में यूपी बोर्ड ने इस बार हर परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं, वहीं नकल रोकने के लिए शिक्षक और प्रिंसिपल से लेकर ज़िले के डीएम और पुलिस कप्तान तक की जवाबदेही तय की गई है.

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परीक्षा केंद्रों पर सख्ती के चलते यूपी में हजारों छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी है परीक्षा केंद्रों पर सख्ती के चलते यूपी में हजारों छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी है

परवेज़ सागर / शम्स ताहिर खान

  • लखनऊ,
  • 14 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 8:48 PM IST

नकल के लिए बदनाम यूपी में इस बार कुछ अलग ही माहौल है. बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्ती इतनी ज़्यादा है कि लाखों छात्र जहां परीक्षा शुरू होने के पहले हफ्ते में ही परीक्षा छोड़ चुके हैं, वहीं ऐसे छात्रों की भी कमी नहीं है कि जिन्हें इम्तेहान देने में सांसें फूल रही हैं. असल में यूपी बोर्ड ने इस बार हर परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं, वहीं नकल रोकने के लिए शिक्षक और प्रिंसिपल से लेकर ज़िले के डीएम और पुलिस कप्तान तक की जवाबदेही तय की गई है.

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ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं नकलची छात्र

परीक्षा के दौरान जब जांच शुरू हुई तो कहीं ताबीज़ में छिपा माइक्रोफ़ोन. कहीं छात्रों के बीच की पुड़िया बांटते गुरुजी मिले. कहीं ब्लूटूथ के सहारे नकल का जुगाड़ सामने आया तो कहीं तमाम पाबंदियों के बावजूद नकल की कोशिश करते छात्र नजर आए. कुल मिलाकर नकलचियों के लिए बड़ी परेशानी हो गई.

सरकारी की सख्ती से डरकर भागे नकलची

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में अब तक पढ़ाई कैसी होती थी, ये तो हर किसी को पता है. लेकिन बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए इस बार सरकार ऐसी ज़बरदस्त सख्ती करने वाली है, ये शायद हर किसी पता नहीं था. तभी तो परीक्षाओं की शुरुआत होते ही एक तरफ़ जहां नकल माफ़िया की हवा खराब हो चुकी है, वहीं दाल ना गलती देख कर परीक्षा शुरू होते ही 5 लाख 90 हज़ार 830 से ज़्यादा छात्र परीक्षाओं से ही भाग गए. इसे आप यूपी की शिक्षा व्यवस्था पर योगी एफेक्ट कह सकते हैं या फिर कुछ और, लेकिन बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने को लेकर इस बार सरकार ने जितनी सख्ती दिखाई है, वैसा इससे पहले शायद ही कभी दिखा हो.

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नकल रोकने के कड़े इंतजाम

नकल रोकने के लिए सरकार की तैयारी कैसी है, ये जानने के लिए इस बार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े इंतज़ामों पर एक निगाह डालना ही काफ़ी है. देश के सबसे बड़े एजुकेशन बोर्ड में से एक यानी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद वैसे तो हर साल ही नकलमुक्त इम्तेहान करवाने का दावा करता है, लेकिन ये दावा कितना पूरा होता है ये सब जानते हैं. लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है.

घटी परीक्षा केंद्रों की संख्या

बेशक इस बार सूबे में 66 लाख 37 हज़ार 18 छात्र परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन पिछले साल के 11 हजार 415 के मुकाबले इस बार परीक्षाओं के सेंटर घटा कर 8 हज़ार 549 कर दिए गए हैं, ताकि सभी सेंटरों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया जा सके और इनविजिलेशन यानी परीक्षाओं की निगरानी आसानी से मुमकिन हो. लेकिन इस कोशिश में यूपी बोर्ड का सबसे बड़ा कदम है, सभी परीक्षा केंद्रों में वक्त रहते लगा लिए गए सीसीटीवी कैमरे. कहने की ज़रूरत है कि एक बार को इंसान की निगाहें तो किसी धांधली को पकड़ने में धोखा खा सकती है, लेकिन कैमरा धोखा नहीं खा सकता.

8549 परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे

इस बार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षाओं में कुल 36 लाख 55 हज़ार 691 छात्र भाग रहे हैं. जबकि इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में कुल 29 लाख 81 हज़ार 327 छात्र. यानी इस साल इम्तेहान में भाग लेने वाले कुल छात्रों की तादाद 66 लाख 37 हज़ार 18 है. लेकिन इस बार सभी 8,549 परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. हर ज़िले को सुपर ज़ोन, ज़ोन और सेक्टर्स में बांटा गया है.

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परीक्षा केंद्रों पर भारी पुलिसबल की तैनाती

डीएम लेकर एसएसपी और थानेदार से लेकर कांस्टेबल तक की जवाबदेही तय की गई है. हर सर्किल मुख्यालय पर क्यूआरटी की तैनाती की गई है. हर केंद्र पर एक दारोगा और तीन पुलिसवाले यानी कुल 34,196 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगी है. इसके अलावा हज़ारों शिक्षक, पर्यवेक्षक और पूरा का पूरा सरकारी अमला तो है ही. और इन इंतज़ामों का असर ये है कि सिर्फ़ नकल के भरोसे बैठे छात्रों को जहां छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है, वहीं छात्रों को नकल करवाने का ठेके लेने वाले धंधेबाज़ों की दुकान का शटर भी नीचे गिर चुका है.

स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने की ज़रूरत

जबकि ऐसे स्टूडेंट्स भी कम नहीं है, जो साल ख़राब होने की जगह किसी तरह परीक्षा दे लेना चाहते हैं, ताकि कहीं कॉपियां जांचने में गुरुजी का दिल पिघल जाए और वो इम्तेहान की वैतरणी पार सकें. लेकिन नकल करने-कराने और नकल करके पास हो जाने की लत ऐसी गंदी लग चुकी है कि नकलची छात्रों की छोड़िए बहुत से शिक्षा माफ़िया और गुरुजी भी इस मामले में बोर्ड के खिलाफ़ खड़े नज़र आने लगे हैं. लेकिन सरकार ने अपना इरादा साफ़ कर दिया है. कहने की ज़रूरत नहीं है कि नकल रोकना तो यकीनन एक अच्छा क़दम है, लेकिन वक्त रहते स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारना भी उतना ही ज़रूरी, ताकि आने वाले सालों में छात्रों को नकल की ज़रूरत ही ना पड़े.

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