केस हारने से दुखी था पिता तो बेटे ने बना दी सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट, निकाला नकली ऑर्डर

दिल्ली के 14 साल के एक लड़के ने सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाई और वहां से अपने पिता के पक्ष में नकली आदेश निकालकर लोगों को दिखाया.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

यह एक बेटे की अपने पिता से प्रेम की अजीब कहानी है, जिसमें वह पिता का सम्मान बचाने के लिए अपराध करने की हद तक चला जाता है. दिल्ली के 14 साल के एक लड़के ने सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाई और वहां से अपने पिता के पक्ष में नकली आदेश निकालकर लोगों को दिखाया. अब सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फर्जी आदेश तैयार करने के मामले में इस लड़के के खिलाफ जांच चल रही है.

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पुलिस को दिए बयान में बच्चे ने बताया कि उसके नेत्रहीन पिता एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम करते थे. उन्होंने अनियमितताओं को लेकर प्रिंसिपल और प्रबंधन के खिलाफ कई शिकायतें की थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उसके पिता इसे लेकर कोर्ट चले गए, लेकिन वह मुकदमा हार गए थे. इसके बाद बच्चे ने सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाई और उस पर कुछ फर्जी दस्तावेज अपलोड किए. उसने नकली ऑर्डर अपलोड किया.

यही नहीं, उसने एक कदम और आगे जाकर खुद ही सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जज और उनके कर्मचारियों के रूप में ई-मेल भेज कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि यह नकली आदेश लागू भी हो जाए, ताकि उसके पिता की प्रतिष्ठा फिर से बहाल हो सके.

उसने पुलिस को बताया, 'हम कोर्ट में गए, लेकिन हमारा केस खारिज कर दिया गया. केस हारने के बाद मेरे पिता काफी तनाव और अवसाद में आ गए. मैंने लैपटॉप पर याचिका तैयार करने में उनकी मदद की थी और कोर्ट की वेबसाइट से उन्हें लगातार अपडेट भी दे रहा था. केस खारिज होने के बाद हमने यह विचार किया कि सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाई जाए और हमने वहां अपने पक्ष में एक नकली आदेश भी अपलोड कर दिया.'

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पुलिस के अनुसार बच्चे ने नकली कोर्ट का यह नकली ऑर्डर सोशल मीडिया मीडिया पर शेयर किया और अपने पिता के जान-पहचान के कई लोगों के पास मैसेजिंग ऐप्स से भेज दिया ताकि यह आधिकारिक लगे.

यही नहीं, पिता-पुत्र सुप्रीम कोर्ट के फर्जी ऑर्डर को लेकर चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गए और उसे लागू कराने का अनुरोध किया. वहां से सफलता न मिलने पर दोनों इसे लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच गए. खुद को चीफ जस्ट‍िस के रूप में पेश करते हुए बच्चे ने यह ऑर्डर कॉपी हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ जज के पास भेज दिया कि इसका अनुपालन हो. बच्चे ने सुप्रीम कोर्ट की एक फर्जी मुहर भी बनवाई थी, ताकि उसका दस्तावेज असली लगे.

हाईकोर्ट ने तो सुनवाई की तारीख भी तय कर दी, लेकिन जब सुनवाई शुरू हुई तो जज यह जानकार स्तब्ध रह गए कि ऑर्डर कॉपी और अन्य दस्तावेज फर्जी हैं और इस तरह का ऑर्डर कभी हुआ ही नहीं.  

पुलिस ने आपराधिक षडयंत्र का मामला दर्ज किया है. बच्चे को बाद में होने की वजह से जमानत मिल गई, लेकिन उसके पिता को तिहाड़ जेल में भेजा गया. लेकिन जमानत के बाद फिर बच्चे ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताते हुए कई ई-मेल भेजे. इसमें उसने आदेश दिया कि पिता-पुत्र के ऊपर दर्ज एफआईआर हटाया जाए और उन्हें जमानत दी जाए. यही नहीं, बच्चे ने एक जांच अधिकारी का फर्जी ई-मेल आईडी तैयार कर उसे स्कूल के के पास भेजा.

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जिसके बाद जांच अधिकारी ने कोर्ट में नए सिरे से आवेदन कर यह मांग की कि इस बच्चे को बाल सुधार गृह में रखा जाए और उसे दीर्घकालिक काउंसलिंग प्रदान की जाए.  

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