राकेश पांडेय: गुंडई का शौक-मुन्ना बजरंगी का साथ और बन गया था मुख्तार का दाहिना हाथ

छात्र जीवन में ही राकेश पांडेय पर हत्या का आरोप लगा. पुलिस ने उसे जेल में डाल दिया. यहां पर उसकी मुलाकात कुख्यात अभय सिंह जैसे लोगों से हुई. बताया जाता है कि अभय सिंह ने उसे मुन्ना बजरंगी से मिलवाया था और बजरंगी ने उसे मुख्तार से. रविवार को लखनऊ में पुलिस ने राकेश पांडेय को मुठभेड़ में मार गिराया.

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एसटीएफ ने लखनऊ में राकेश पांडेय को मार गिराया (फाइल फोटो) एसटीएफ ने लखनऊ में राकेश पांडेय को मार गिराया (फाइल फोटो)

अमित राय

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST

  • बीजेपी विधायक कृष्णानंद हत्याकांड में राकेश पांडेय का नाम आया था
  • एसटीएफ ने लखनऊ में मार गिराया, पुलिस के पास नहीं था कोई फोटो

राकेश पांडेय को अपराध विरासत में नहीं मिला था, उसने एक सीधे-साधे ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया था. घर में किसी चीज की कमी नहीं थी. परिवार को कोई सताए ऐसा भी नहीं था. लेकिन उसकी फितरत थी कि वो जो चाहेगा वो कहेगा, जो चाहेगा वो करेगा. दबंगई उसके नेचर में थी.

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जब तक गांव में रहा लोगों पर अपना सिक्का जमाने की कोशिश करता रहा. लेकिन मां-बाप की इमेज और परिजनों के दबाव में वह खुलकर दबंगई नहीं कर पाता था. स्कूली पढ़ाई के बाद जब वह पॉलिटेक्नीक करने लखनऊ पहुंचा तो उसके इरादों को पंख लग गए. सोहबत भी उसे वैसी ही मिली. वह शौक से गुंडा बन गया. एक कत्ल में उसका नाम आया, वह जेल चला गया. रही सही कसर यहां पूरी हो गई. निकला तो खूंखार अपराधी बनकर. जेल के दोस्तों से मुन्ना बजरंगी का साथ मिला. मुन्ना के जरिए मुख्तार का. इस समय उसे मुख्तार का दाहिना हाथ माना जाता था. बीजेपी विधायक कृष्णानंद हत्याकांड में उसका नाम आया था. एसटीएफ ने रविवार को लखनऊ में उसे मुठभेड़ में मार गिराया.

पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक छोटा जिला है मऊ. आज भी इसे कल्पनाथ राय के नाम से जाना जाता है जो यहां से कई बार सांसद और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे. लेकिन अपराध जगत में इस जिले की पहचान मुख्तार अंसारी के नाम से होती है. जो मऊ से लगातार कई बार से विधायक हैं.

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1995-2000 के आसपास मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय की दुश्मनी चरम पर थी. उस दौरान बृजेश सिंह भूमिगत थे और कृष्णानंद राय फ्रंट फुट पर. ठेके-पट्टे को लेकर आए दिन गोलियां चलती रहती थीं. इस दौरान युवाओं की ऐसी टोली जवान हो रही थी जो किसी एक गुट में अपना भविष्य देखती थी. उन्हें जातिगत समीकरणों से कोई लेना-देना नहीं था. वो गोलियों का ताकत से अपनी जिद पूरी करना चाहते थे. गांव की चौपालों और चाय की दुकानों पर मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह और कृष्णानंद राय जैसे लोगों के चर्चे हुआ करते थे. राकेश पांडेय भी उसी दौर में बड़ा हो रहा था.

गांव से शुरू कर दी थी गुंडई

मऊ जिले के थाना कोपागंज से 4 किमी दूर एक गांव है लिलारी भरौली. राकेश पांडेय यहीं का रहना वाला था. उसको करीब से जानने वाले बताते हैं कि वह बचपन से ही दबंग किस्म का था, केवल अपनी बात मनवाने की जिद, बेवजह लोगों को परेशान करना, दूसरों से अपेक्षा करना कि उसके सामने लोग झुक कर चलें, उसकी आदत में शुमार था. उस इलाके में ऐसे लोगों को गांव की भाषा में मनसरहंग कहते हैं. लोकल पुलिस भी इस तरह से लिखती है कि फलां व्यक्ति मनसरहंग किस्म का है. राकेश पांडेय भी ऐसा ही था.

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गांव में रहने के दौरान ही उसने गुंडई शुरू कर दी थी लेकिन लखनऊ पहुंचने के बाद वह परिवार की मर्यादा से आजाद हो गया. वह शौक से गुंडा बन गया. छात्र जीवन में ही उस पर हत्या का आरोप लगा. पुलिस ने उसे जेल में डाल दिया. यहां पर उसकी मुलाकात कुख्यात अभय सिंह जैसे लोगों से हुई. बताया जाता है कि अभय सिंह ने उसे मुन्ना बजरंगी से मिलवाया.

दिल्ली के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह ने 1998 में मुन्ना बजरंगी को समयपुर बादली में एक मुठभेड़ में कई गोलियां मारी थीं और मरा जानकर छोड़ दिया था. मुन्ना बजरंगी बहुत दिनों तक कोमा में रहने के बाद जी उठा था. दिल्ली में हुई मुठभेड़ में उसका खास साथी मारा जा चुका था. जेल में रहने के दौरान उसका गिरोह छिन्न भिन्न हो गया था. वह जेल से भाग निकला. अब फिर से उसे अपना गैंग खड़ा करना था और राकेश पांडेय को कोई बड़ा साथ चाहिए था.

बताया जाता है कि अभय सिंह ने राकेश पांडेय को मुन्ना के पास भेजा और यहीं से दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी. राकेश पांडेय की वाफादारी मुन्ना को भा गई और दोनों साथ-साथ वारदात को अंजाम देने लगे. मुन्ना बजरंगी ने राकेश को मुख्तार अंसारी से मिलवाया. मुख्तार को भी हर समय ऐसे आदमी की जरूरत होती है जो चुनाव में उसका साथ दे सके. जानकार बताते हैं कि रॉबिनहुड वाली इमेज के चलते मुसलमानों का साथ तो मुख्तार को अपने आप मिल जाता है लेकिन उस इलाके की प्रभावी जातियां ब्राह्मण और भूमिहार को गैंग में ज्यादा तवज्जो मिल जाती है. ऐसे लोग तेजी से तरक्की करने लगते हैं. राकेश पांडेय के साथ भी यही हुआ. बताया जाता है कि विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का राकेश पांडेय मुख्तार के लिए जी जान से जुटा रहा.

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विधायक की हत्या में 400 राउंड फायरिंग

राकेश पांडेय का प्लस प्वाइंट यह था कि उसका कोई फोटो पुलिस के पास नहीं था. इसलिए वह खुलकर वारदात को अंजाम देता था और फरार हो जाता था. 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. विधायक बनने के बाद कृष्णानंद राय अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो गए थे और गाड़ियों के काफिले के साथ चलना छोड़ दिया था. उस दिन वह एक वॉलीबॉल टूर्नामेंट का उद्घाटन करने जा रहे थे, रास्ते में उन्हें घेर लिया गया और एके 47 से फायरिंग कर जीप में सवार सभी 7 लोगों की हत्या कर दी गई. कुल 400 राउंड फायरिंग की गई थी. आरोप लगा कि मुख्तार के कहने पर मुन्ना बजरंगी एंड कंपनी ने इस वारदात को अंजाम दिया है. जांच के दौरान राकेश पांडेय का नाम इसमें जोड़ा गया. लेकिन पुलिस के पास फोटो न होने से पुलिस उस पर एक्शन नहीं ले पाई. वह फरार होने में कामयाब रहा. बाद में पुलिस को बनारस के एक होटल की सीसीटीवी फुटेज मिली जिसमें राकेश पांडेय दिखा. 2006 में उसे कृष्णानंद हत्याकांड में गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन बाद में बाहर आ गया.

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साल 2009 में मऊ में ठेकेदार मन्ना सिंह की हत्या कर दी गई. आरोप मुख्तार और राकेश पांडेय पर लगा. इस मामले के गवाह थे राम सिंह. बाद में राम सिंह और उनके सरकारी गनर की भी हत्या कर दी गई. आरोप लगा कि अपराध जगत में अपना सिक्का जमाने और लोगों में अपना खौफ पैदा करने के लिए राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय ने वारदात को अंजाम दिया. मुख्तार अंसारी और राकेश पांडेय पर अब भी यह केस चल रहा है.

बताया जाता है कि गिरोह में राकेश पांडेय की हैसियत लगातार बढ़ती गई. घटनाक्रम तेजी से बदल रहा था. मुन्ना बजरंगी के मंसूबे आसमान छू रहे थे. एक समय ऐसा आया कि उसके संबध मुख्तार से भी खराब होने लगे थे क्योंकि वह खुद राजनीति में आना चाहता था और मुख्तार को यह मंजूर नहीं था. इधर, एसटीएफ और पुलिस लगातार मुन्ना बजरंगी के पीछे पड़ी थी. वह मुंबई चला गया. बताया जाता है कि उसे वहां कांग्रेस के एक नेता का संरक्षण मिला और पुलिस से बचने के लिए उसने मुंबई में ही अपने को 2009 में गिरफ्तार करा दिया. मुन्ना बजरंगी की कमी राकेश पांडेय ने मुख्तार का साथ देकर पूरी की. बताया जाता है कि बाद में मुख्तार और बजरंगी में फिर दोस्ती हो गई.

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2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार आई. इस दौरान मुन्ना बजरंगी झांसी की जेल में बंद था. उसने बीएसपी के पूर्व विधायक से रंगदारी मांगी थी. पेशी के लिए उसे बागपत जेल लाया गया था. 9 जुलाई 2018 को उसकी जेल में ही हत्या कर दी गई. आरोप कुख्यात सुनील राठी पर लगा. बताया जाता है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद अपनी निशानेबाजी और वफादारी की वजह से राकेश पांडेय मुख्तार का खास बन गया. राकेश पांडेय पर मऊ में 6 मुकदमें दर्ज थे, यहां की पुलिस ने उस पर 25000 का इनाम भी घोषित कर रखा था. उसने फर्जी हलफनामा देकर अपनी पत्नी के नाम से हथियार का लाइसेंस ले लिया था. इसी तरह गाजीपुर में उसके खिलाफ 2 और लखनऊ-रायबरेली में एक-एक मुकदमें दर्ज थे. प्रयागराज में कुछ दिनों पहले गिरफ्तार एक शूटर नीरज सिंह ने बताया था कि एक सपा नेता की हत्या की सुपारी राकेश पांडेय ने ली थी. प्रयागराज पुलिस ने भी उस पर 25000 रुपये का इनाम रखा था.

पिता ने उठाए एनकाउंटर पर सवाल

राकेश पांडेय के पिता, बालदत्त पांडेय ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस राकेश को सुबह 3 बजे लखनऊ आवास से उठाकर ले गई और मार डाला. पिता ने दावा किया कि राकेश सभी मामलों में बरी हो चुका था. उस पर फिलहाल कोई केस नहीं था. उन्होंने यह सवाल भी किया कि सुबह न्यूज में दिखाया गया कि एक लाख के इनामी बदमाश को मार गिराया गया लेकिन किसी अखबार में कभी नहीं छपा कि राकेश पर इतना इनाम रखा गया है. उन्होंने कहा कि राकेश अपनी माता का इलाज लखनऊ केजीएमसी में करा रहा था और उनको लेकर आना-जाना लगा रहता था. राकेश की पत्नी की तबीयत भी खराब रहती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि निजी दुश्मनी की वजह से राकेश को मारा गया है.

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पुलिस की कहानी

एसटीएफ के एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि एसटीएफ को इनपुट मिला था कि अपराधी इनोवा कार से जा रहा है. लखनऊ-कानपुर हाइवे पर सरोजनी नगर थाने के पास उसे रोकने की कोशिश की गई लेकिन उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. एसटीएफ की जवाबी फायरिंग में वह मारा गया. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा कि गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पांडे मुख्तार अंसारी गिरोह का मुख्य शूटर बन गया था. पांडेय और अन्य आरोपियों ने साल 2005 में बीजेपी नेता कृष्णानंद राय और 6 अन्य व्यक्तियों की हत्या में 400 राउंड फायर किए थे. अपराधियों ने एके-47 का भी इस्तेमाल किया था.

अब सच जो भी हो लेकिन यूपी सरकार का एक्शन जारी है. यूपी क्लीन की मुहिम शबाब पर है. दबी जुबान से भले ही यह कहा जा रहा हो कि केवल ब्राह्मण अपराधियों पर ही कार्रवाई हो रही है. लेकिन ऐसा कहीं से नहीं लग रहा है कि सरकार किसी दबाव में है. सीएम योगी ने आजतक से बात करते हुए कहा भी था कि राक्षसों का अंत करने के लिए सत्ता को सख्त होना ही होगा.

(इनपुट- मऊ से दुर्गा किंकर सिंह)

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