बिहार: पत्नी छोड़ भागी तो बच्चों को जिंदा दफनाने लगा जल्लाद पिता

घटनास्थल पर पुलिस पहुंची तो जल्लाद पिता भृगन महतो अपने दोनों बच्चों चार वर्षीय बेटे सनोज कुमार और तीन वर्षीय बेटी मिशा कुमारी को करीब आधा गाड़ भी चुका था.

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बच्चों को गड्ढे से मिट्टी हटाकर बचाया गया बच्चों को गड्ढे से मिट्टी हटाकर बचाया गया

सुजीत झा / आशुतोष कुमार मौर्य

  • गोपालगंज (बिहार),
  • 19 जून 2018,
  • अपडेटेड 9:33 AM IST

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू किए दो साल से ऊपर हो चुके हैं, लेकिन अब तक शासन इसे पूरी तरह जमीन पर लागू नहीं करा पाई है. अब बिहार के गोपालगंज जिले से शराब की बुरी लत के चलते ऐसी घटना सामने आई है, जिसे किसी की भी रूप कांप जाए. यहां फुलवरिया थाना क्षेत्र में एक शराबी पिता अपने ही दो मासूम बच्चों को जिंदा जमीन में गाड़ने जा रहा था.

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लेकिन स्थानीय लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी और पुलिस ने फौरन घटनास्थल पर पहुंच बच्चों को बचा लिया. हालांकि पुलिस को आता देख आरोपी पिता वहां से भाग खड़ा हुआ. उसे अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है.

पुलिस ने बताया कि वाकया सोमवार का है फुलवरिया थाना क्षेत्र में पड़ने वाले भागवत परसा गांव का है. घटनास्थल पर पुलिस पहुंची तो जल्लाद पिता भृगन महतो अपने दोनों बच्चों चार वर्षीय बेटे सनोज कुमार और तीन वर्षीय बेटी मिशा कुमारी को करीब आधा गाड़ भी चुका था.

पुलिस ने को गड्ढे से मिट्टी हटाकर बाहर निकाला. चौकीदार दुर्गेश कुमार के सहयोग से खुद थानाध्यक्ष प्रेम प्रकाश राय ने बच्चों को नहला-धुलाकर नए कपड़े पहनाए और खाना खिलाया.

थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों मासुम दफनाते समय वो अपने पिता से अपनी जान की भीख मांग रहें थे रो रहे थे चिल्ला रहे थे लेकिन जल्लाद पिता उन बच्चों को हमेशा हमेशा के लिए जमींन में दफन कर देना चाहता था.

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जानकारी के मुताबिक, भृगुन महतो अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था. वह हमेशा अपनी पत्नी के साथ शराब के नशे में मारपीट किया करता थ, जिससे तंग आकर उसकी पत्नी दोनों बच्चों को छोड़कर भाग गई.

पत्नी के छोड़ जाने के बाद तंगी, भुखमरी तथा फटेहाल जिंदगी से परेशान और शराब का लती भृगुन महतो ने बच्चों से जान छुड़ाने के लिए उन्हें जिंदा जमीन में गाड़ने का फैसला कर लिया. बच्चों को गाड़ भी देता, लेकिन पुलिस ने ऐन मौके पर पहुंचकर बच्चों को बचा लिया.

घटना की जानकारी बाल श्रम विभाग के श्रम अधीक्षक मनोज कुमार दुबे को थानाध्यक्ष ने मोबाइल पर दी और बच्चों को सुरक्षित रखने का आग्रह किया. श्रम अधीक्षक मनोज दुबे खुद भी अपनी टीम के साथ थाने पहुंचे.

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