NHRC की सलाह- सलाखों के अंदर न रहें `हथियार`, बैरकों-शौचालयों से छड़ें, ग्रिल्स, पंखे हटाने की मांग

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा ने केंद्र सरकार समेत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को एडवाइजरी जारी करते हुए इसके अनुपालन और उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.

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NHRC के अध्यक्ष एके मिश्रा ने केंद्र और राज्य सरकारों को ये सलाह दी है NHRC के अध्यक्ष एके मिश्रा ने केंद्र और राज्य सरकारों को ये सलाह दी है

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2023,
  • अपडेटेड 10:32 PM IST

जेल में कैदियों के साथ होने वाली संगीन वारदातों और उनकी मौत के मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लिया है. न्यायिक हिरासत में कैदियों द्वारा जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या के प्रयासों को रोकने को लेकर NHRC ने एक एडवाइजरी जारी की है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा ने केंद्र सरकार समेत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को एडवाइजरी जारी करते हुए इसके अनुपालन और उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.

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आयोग ने जेल में खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं और आत्महत्याओं को रोकने के लिए कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और अन्य कल्याण पर ध्यान देने के लिए कहा है. साथ-साथ उन्होंने जेल की बैरकों और शौचालयों से लोहे की छड़ें या ग्रिल्स, पंखे, हुक या इसी तरह की चीजों को हटाने का आग्रह किया है, ताकि इनका इस्तेमाल फांसी लगाने या जान देने के लिए ना किया जा सके.

इसके अलावा NHRC ने कैदियों को उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात कराने और उनके साथ टेलीफोन के जरिए बातचीत कराए जाने की भी सिफारिश की है. दरअसल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के इस फैसले और सलाह के पीछे वो घटनाएं नजर आती हैं, जो हाल के दिनों में हुई हैं. जिनमें कुख्यात गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की हत्या और ऐसी ही अन्य घटनाएं भी वजह हो सकती हैं. इसी तरह से जेल में कैदियों द्वारा खुद को घायल करने के मामले भी सामने आते रहते हैं. लिहाजा आयोग ने उस पर भी ध्यान दिया है.

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अब करते हैं उन दो बड़ी घटनाओं की जो जेल की चारदिवारी से निकलकर बाहर आईं तो हड़कंप मच गया. इन दो घटनाओं ने जेल प्रशासन के सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी. इसके बाद तो ऐसा लगने लगा कि मानों जेल में अधियारियों और कर्मचारियों के हाथ में कुछ है ही नहीं. 

2 मई 2023, टिल्लू ताजपुरिया हत्याकांड
कुख्यात गैंगस्टर सुनील मान उर्फ टिल्लू ताजपुरिया दिल्ली की मंडोली जेल में बंद था. जहां 2 मई की सुबह गोगी गैंग के योगेश टुंडा और दूसरे गुर्गे प्लान के मुताबिक सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर अपने वार्ड की ग्रिल काटकर बाहर आए थे. इसके बाद वे बेडशीट के सहारे ग्राउंड फ्लोर पर उतरे. जहां टिल्लू ताजपुरिया को हाई-सिक्योरिटी वार्ड में रखा गया था. हमलावर टिल्लू के वार्ड में लगी ग्रिल को काटकर अंदर पहुंचे और तेजधार हथियार से टिल्लू पर एक बाद एक कई बार वार किए. बाद में उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था.

प्रिंस तेवतिया मर्डर केस
टिल्लू के मर्डर से करीब 19 दिन पहले ही तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के खास गुर्गे प्रिंस तेवतिया की भी हत्या कर दी गई गई थी. तेवतिया पिछले करीब 13 साल जुर्म की दुनिया में सक्रीय था. वह लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहा था. उसके खिलाफ हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन धाराओं में 16 मामले अलग-अलग थानों में दर्ज थे.

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21 जून 2023, तिहाड़ जेल
दिल्ली की तिहाड़ जेल में अधिकारियों को कैदियों के पास मोबाइल होने की सूचना मिली. अधिकारियों ने फौरन मौके पर जाकर छापेमारी की. इस दौरान कई कैदियों ने खुद को घायल कर लिया ताकि अधिकारियों का ध्यान मोबाइल फोन से हटाया जा सके, लेकिन बाववजूद इसके अधिकारियों ने एक कीपैड वाला मोबाइल फोन वहां से बरामद कर लिया. ये छापेमारी तिहाड़ जेल में बुधवार की शाम करीब 5 बजकर 20 मिनट पर सीजे-8/9 बैरक में की गई थी. तलाशी के दौरान वहां से मोबाइल के साथ-साथ एक सुआ भी बरामद हुआ. कैदियों से आगे की पूछताछ के बाद एक सिम कार्ड और मोबाइल चार्चर भी मिला. छापेमारी के दौरान घायल हुए कैदियों को अस्पताल भेजा गया. जिनमें चार की हालत गंभीर है. 

 

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