पुणे पोर्श कांड: मुख्य आरोपी के पिता ने मांगी जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भेजा नोटिस

पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस में कानूनी घमासान तेज हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब मामला शीर्ष अदालत में है.

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आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेजा गया है. (File Photo: ITG) आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेजा गया है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • पुणे,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

साल 2024 के चर्चित पुणे पोर्श कांड में सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुयान की बेंच ने विशाल अग्रवाल की उस अपील पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को विशाल अग्रवाल और अन्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को तय की है. यह मामला 19 मई 2024 की रात का है. आरोप है कि 17 साल का एक नाबालिग, जो कथित तौर पर शराब के नशे में था, पोर्श कार चला रहा था. 

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पुणे के कल्याणी नगर इलाके में तेज रफ्तार कार ने दो आईटी प्रोफेशनल्स को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना के बाद देशभर में गुस्सा देखने को मिला. यह मामला केवल सड़क हादसे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच के दौरान ब्लड सैंपल में कथित हेरफेर का एंगल भी सामने आया था.

आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल ने हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है. इससे पहले भी इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट अलग-अलग आरोपियों की याचिकाओं पर राज्य सरकार से जवाब तलब कर चुका है.

23 जनवरी को कोर्ट ने बिचौलिया अमर संतीश गायकवाड़ की जमानत अर्जी पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था. वहीं 7 जनवरी को दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया गया था. 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में तीन आरोपियों अमर गायकवाड़, आदित्य सूद और आशीष मित्तल को जमानत दी थी.

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आदित्य सूद और आशीष मित्तल को 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि उनके ब्लड सैंपल का इस्तेमाल उन दो अन्य नाबालिगों के टेस्ट के लिए किया गया, जो हादसे के वक्त मुख्य आरोपी के साथ कार में मौजूद थे. उस समय वे भी 17 साल के थे. इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को सशर्त जमानत दी थी. 

इन शर्तों में एक सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना भी शामिल था. इस फैसले के बाद भारी जनाक्रोश भड़क उठा. विवाद बढ़ने के बाद पुणे पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से फैसले की समीक्षा की मांग की थी. इसके बाद बोर्ड ने अपने आदेश में बदलाव किया और नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया. 

हालांकि जून में हाई कोर्ट ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दे दिया. भले ही उसको रिहा कर दिया गया हो, लेकिन ब्लड सैंपल स्वैपिंग केस में उसके माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल समेत 10 आरोपियों को जेल भेजा गया. अब सबकी नजर 10 मार्च पर टिकी है, जब विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी. 

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