पहलगाम हमले के बाद बेनकाब हुआ था पाकिस्तान का डिजिटल प्रोपेगेंडा, TRF के दावों की खुली पोल

पहलगाम आतंकी हमले के बाद TRF के दावे और फिर यू-टर्न ने पाकिस्तान के डिजिटल नेटवर्क की पोल खोल कर रख दी. NIA की जांच में पाकिस्तान से जुड़े IP एड्रेस, टेलीग्राम चैनल और ऑनलाइन प्रोपेगेंडा नेटवर्क भी सामने आया है. पढ़ें पूरा खुलासा.

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इस मामले में डिजिटल जांच भी बेहद अहम है (फोटो-ITG) इस मामले में डिजिटल जांच भी बेहद अहम है (फोटो-ITG)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:16 PM IST

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिर्फ जमीन पर हमला करने वाले आतंकियों की ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नेटवर्क की भी जांच शुरू हुई थी. जांच एजेंसियों को हमले के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर 'कश्मीर फाइट' नाम के एक हैंडल से की गई संदिग्ध पोस्ट मिली थी. इस पोस्ट में गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाने जैसी भड़काऊ बातें लिखी गई थीं. एजेंसियों ने जब इस पोस्ट की डिजिटल ट्रैकिंग शुरू की, तो कई अहम सुराग सीधे पाकिस्तान तक पहुंचे थे. शुरुआती जांच में ही यह साफ होने लगा कि हमले के पीछे ऑनलाइन प्रचार का भी एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था. ये सारे खुलासे एनआईए की चार्जशीट में किए गए हैं.

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जांच के दौरान एजेंसियों के सामने 'जस्टिस लीग ऑफ़ इंडिया' नाम का एक टेलीग्राम चैनल भी आया था. इस चैनल पर खालिस्तानी विचारधारा, कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा देने वाले संदेश लगातार साझा किए जा रहे थे. एजेंसियों ने पाया कि इस चैनल को चलाने वाले अकाउंट्स उन्हीं डिजिटल नेटवर्क्स से जुड़े थे, जिनका संबंध कश्मीर फाइट हैंडल से निकला था. यही वजह रही कि जांच एजेंसियों ने इस पूरे मामले को सिर्फ आतंकी हमला नहीं, बल्कि सुनियोजित ऑनलाइन प्रोपेगेंडा अभियान के तौर पर भी देखना शुरू किया था.

पहलगाम हमला होते ही आतंकी संगठन TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली थी. हमले के तुरंत बाद संगठन से जुड़े चैनलों पर इसे लेकर संदेश प्रसारित किए गए थे. लेकिन कुछ दिनों बाद अचानक कहानी बदल गई. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा हमले की कड़ी निंदा किए जाने के दिन ही TRF के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल The Resistance Front Official पर एक नया बयान जारी हुआ था. इस बयान में संगठन ने हमले से खुद को अलग दिखाने की कोशिश की थी और पूरे हमले को फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन बताना शुरू कर दिया था.

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TRF ने अपने नए बयान में दावा किया था कि उनका टेलीग्राम चैनल हैक कर लिया गया था और हमले की जिम्मेदारी लेने वाला पुराना संदेश फर्जी था. संगठन ने यह भी कहा कि उन पर लगाए गए आरोप जल्दबाजी में लगाए गए हैं. बयान में FIR दर्ज होने के समय, पुलिस की कार्रवाई और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए. इसके साथ ही TRF ने चट्टीसिंहपोरा नरसंहार, संसद हमला 2001 और 26/11 मुंबई हमलों जैसे पुराने मामलों का जिक्र कर माहौल को भटकाने और भ्रम फैलाने की कोशिश भी की.

हालांकि जांच एजेंसियों के हाथ लगे डिजिटल सबूत TRF के दावों से बिल्कुल अलग कहानी बता रहे थे. एजेंसियों को पता चला कि हमले की जिम्मेदारी लेने वाला पोस्ट और बाद में किया गया इनकार, दोनों ही पाकिस्तान से जुड़े डिजिटल नेटवर्क्स के जरिए अपलोड किए गए थे. तकनीकी जांच में जिन IP एड्रेस का इस्तेमाल सामने आया, उनकी लोकेशन पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में मिली थी. वहीं कश्मीर फाइट से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों का नेटवर्क CMPak Limited नाम की इंटरनेट सेवा से जुड़ा पाया गया था, जिसकी लोकेशन खैबर पख्तूनख्वा बताई गई थी.

जांच एजेंसियों का मानना है कि फॉल्स फ्लैग जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा था. एजेंसियों को मिले तकनीकी इनपुट्स, सोशल मीडिया एक्टिविटी और डिजिटल ट्रेल से यह संकेत मिला था कि ऑनलाइन प्रचार और जमीन पर आतंकी कार्रवाई, दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए थे. जांच में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया पोस्ट्स और टेलीग्राम चैनलों के जरिए हमले के बाद माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी.

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मारे गए आतंकियों के मोबाइल फोन, गवाहों के बयान और तकनीकी सबूतों के आधार पर जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क की बड़ी तस्वीर समझ में आने लगी थी. जांच से यह साफ हुआ था कि हमले में सिर्फ हथियार लेकर हमला करने वाले आतंकी ही शामिल नहीं थे, बल्कि उनके समर्थन में काम करने वाला एक संगठित डिजिटल नेटवर्क भी सक्रिय था. इन्हीं सबूतों के आधार पर NIA को यह जानकारी मिली कि इस पूरे हमले का मास्टरमाइंड साजिद सैफुल्लाह जट्ट उर्फ अली भाई पाकिस्तान में बैठकर ऑपरेशन को संचालित कर रहा था.
 

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