जनकपुरी हादसा: दोनों ठेकेदारों की याचिका खारिज, कोर्ट का जमानत से इनकार

जनकपुरी हादसे में गिरफ्तार दो ठेकेदारों की अग्रिम जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है. 5-6 फरवरी की रात 25 वर्षीय बाइकर कमल ध्यानी की सीवर प्रोजेक्ट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरकर मौत हो गई थी. इस मामले की जांच की जा रही है.

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जनकपुरी में जल बोर्ड के खुले गड्ढे में गिरकर बैंक कर्मी कमल ध्यानी की मौत (Photo: ITG) जनकपुरी में जल बोर्ड के खुले गड्ढे में गिरकर बैंक कर्मी कमल ध्यानी की मौत (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:19 PM IST

दिल्ली के जनकपुरी में खोदे गए गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय बाइकर की मौत के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. एक ठेकेदार की अग्रिम जमानत और दूसरे ठेकेदार की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीर है, नजरअंदाज नहीं कर सकते.

एडिशनल सेशन जज हरलीन कौर दोनों कॉन्ट्रैक्टर हिमांशु गुप्ता और कविश गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थीं. दोनों के खिलाफ 9 फरवरी को अरेस्ट वारंट जारी हुए थे, जिसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की थी. लेकिन कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी.

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कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार प्रजापति की नियमित जमानत याचिका भी ठुकरा दी. उनको दिल्ली पुलिस ने इस केस में गिरफ्तार किया है. उनको राहत देने से इनकार करते हुए अदालत ने साफ कहा कि सामाजिक असर को नजरअंदाज नहीं कर सकते.

इससे पहले 11 फरवरी को कोर्ट ने दोनों कॉन्ट्रैक्टर को बुधवार तक अंतरिम प्रोटेक्शन दी थी. आदेश में कहा गया था कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाएगा. मृतक की पहचान कमल ध्यानी के रूप में हुई थी, जो रोहिणी में एक निजी बैंक में काम करते थे. 

5-6 फरवरी की रात वो घर लौट रहे थे, तभी उनकी बाइक सीवर प्रोजेक्ट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर गई. हादसे में उन्हें जानलेवा चोटें आईं और उनकी मौत हो गई. इस मामले में अब तक दो गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. दिल्ली पुलिस ने राजेश कुमार प्रजापति और योगेश को गिरफ्तार किया है. 

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दोनों न्यायिक हिरासत में हैं. राजेश प्रजापति पर आरोप है कि उसने बाइक सवार के गड्ढे में गिरने की जानकारी छिपाई, जिससे पुलिस और इमरजेंसी रिस्पॉन्स में देरी हुई. वहीं मजदूर योगेश पर आरोप है कि उसने घटना की सूचना पुलिस या इमरजेंसी अधिकारियों को नहीं दी.

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