आयकर विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, दिल्ली पुलिस ने किया फर्जी भर्ती गैंग का खुलासा, 3 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने इनकम टैक्स विभाग में MTS की सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पूर्व MTS कर्मचारी समेत तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं. गैंग ने करीब 6-7 बेरोजगार युवाओं से लगभग 10 लाख रुपये की ठगी की है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस फेक भर्ती कांड में पुलिस की जांच अभी जारी है (सांकेतिक फोटो) इस फेक भर्ती कांड में पुलिस की जांच अभी जारी है (सांकेतिक फोटो)

अंशुल सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:02 PM IST

सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ठगने वाले एक संगठित गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. इस गिरोह के सदस्य खुद को इनकम टैक्स विभाग का कर्मचारी या उससे जुड़ा अधिकारी बताकर लोगों को MTS (मल्टी टास्किंग स्टाफ) की नौकरी दिलाने का दावा करते थे. मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक पूर्व MTS कर्मचारी समेत अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. पुलिस का कहना है कि गिरोह ने अब तक कई लोगों को अपना शिकार बनाया है और जांच अभी जारी है.

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दिल्ली पुलिस के अनुसार 18 मई 2026 को हौज काजी थाने में अजमेरी गेट निवासी एक युवक ने शिकायत दर्ज कराई. उसने बताया कि नवीन प्रकाश, दीपक तिवारी और रोहित चौहान ने उसे इनकम टैक्स विभाग में MTS की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया. आरोपियों ने खुद को विभाग से जुड़ा बताते हुए उसका भरोसा जीता और नौकरी पक्की कराने के नाम पर पैसे मांगने शुरू कर दिए. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 में आरोपी नवीन प्रकाश ने खुद को इनकम टैक्स विभाग का कर्मचारी बताया. इसके बाद उसने शिकायतकर्ता की मुलाकात सह-आरोपी दीपक तिवारी से कराई. दीपक ने अजमेरी गेट स्थित खटीकान मंदिर के पास 5 हजार रुपये नकद लिए और आगे की रकम जमा कराने के लिए रोहित चौहान का बैंक खाता दिया. शिकायतकर्ता ने 22 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच अपने PF की पूरी बचत 1 लाख 98 हजार 500 रुपये डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए भेज दी. नकद रकम मिलाकर उससे कुल 2 लाख 3 हजार 500 रुपये की ठगी की गई.

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आरोपियों ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए इनकम टैक्स विभाग के नाम से फर्जी वेरिफिकेशन फॉर्म भी तैयार किए. मार्च 2026 तक वे लगातार यह कहते रहे कि नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही जॉइनिंग हो जाएगी. लेकिन इसके बाद सभी आरोपी अचानक गायब हो गए और शिकायतकर्ता उनसे संपर्क नहीं कर सका. तब उसे एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है.

मामले की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई जगह छापेमारी की और मुखबिरों का नेटवर्क सक्रिय किया. तकनीकी सर्विलांस और लगातार प्रयासों के बाद पुलिस ने रोहित चौहान उर्फ दीपक तिवारी को गिरफ्तार कर लिया. उसकी निशानदेही पर आगे की जांच में चिराग अग्रवाल उर्फ नवीन प्रकाश और तरुण गोस्वामी उर्फ गिरिराज को भी गिरफ्तार किया गया. वहीं पवन दत्त शर्मा को मामले में बाउंड डाउन किया गया है. पुलिस के अनुसार चिराग अग्रवाल इनकम टैक्स विभाग के सिविक सेंटर कार्यालय में करीब 15 साल तक MTS कर्मचारी रह चुका है.

पूछताछ में रोहित चौहान ने पूरे रैकेट का खुलासा किया. उसने बताया कि वह फ्रीलांस प्लेसमेंट एजेंट है और अपने साथियों के साथ मिलकर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देता था. सोशल मीडिया पर इनकम टैक्स विभाग में भर्ती के फर्जी विज्ञापन डाले जाते थे. इसके बाद पीड़ितों से 1 से 2 लाख रुपये तक वसूले जाते थे. उनसे शैक्षणिक दस्तावेज लिए जाते और फर्जी इंटरव्यू, ओरिएंटेशन और दस्तावेज सत्यापन की पूरी प्रक्रिया कराई जाती, ताकि उन्हें लगे कि भर्ती असली है.

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पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने सिविक सेंटर स्थित इनकम टैक्स विभाग के कार्यालय और पार्किंग परिसर में ही कई पीड़ितों के फर्जी इंटरव्यू और ओरिएंटेशन कराए. पूर्व MTS कर्मचारी चिराग अग्रवाल पीड़ितों को दफ्तर के अंदर ले जाकर नौकरी की जिम्मेदारियों और कार्यस्थल के बारे में जानकारी देता था, जिससे पूरी प्रक्रिया असली लगे. 

आरोपियों ने फर्जी सर्विस बुक और वेरिफिकेशन फॉर्म भी तैयार किए, लेकिन कभी नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र या आधिकारिक रसीद जारी नहीं की. जांच में अब तक करीब 6 से 7 लोगों से लगभग 10 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस पूरे मामले में इनकम टैक्स विभाग का कोई मौजूदा अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल तो नहीं है.

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन, पीड़ितों के पहचान संबंधी दस्तावेज और फर्जी वेरिफिकेशन फॉर्म बरामद किए हैं. पुलिस के अनुसार तरुण गोस्वामी और उसके एक अन्य साथी शुरुआत में खुद को गृह मंत्रालय का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे. इसके बाद उन्हें रोहित चौहान के पास भेजा जाता था, जो फर्जी इंटरव्यू लेकर पैसे वसूलता था. फिलहाल पुलिस इस रैकेट के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है. साथ ही अन्य पीड़ितों और फरार आरोपियों की पहचान कर पूरे फर्जी भर्ती नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश जारी है.

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