साइबर अपराधियों पर कसा CBI का शिकंजा, FBI और इंटरपोल के साथ मिलकर 35 ठिकानों पर छापेमारी, अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खात्मा

CBI की Operation CyStrike में FBI समेत कई देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोहों पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. इस दौरान केंद्रीय एजेंसी ने 35 ठिकानों पर छापेमारी की है. पढ़ें पूरी कहानी.

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CBI टीम ने यह कार्रवाई कई एजेंसियों के साथ मिलकर अंजाम दी (फोटो-ITG) CBI टीम ने यह कार्रवाई कई एजेंसियों के साथ मिलकर अंजाम दी (फोटो-ITG)

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

Operation CyStrike: वो 30 जनवरी 2026 का दिन था, जब सुबह अचानक देश-दुनिया की साइबर दुनिया में हलचल मच गई. भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने एक बड़े और सुनियोजित अभियान को अंजाम दिया, जिसका नाम रखा गया- ‘Operation CyStrike’. इस ऑपरेशन का मकसद था उन अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोहों को तोड़ना, जो भारत से बैठकर कई देशों के लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बना रहे थे. यह कार्रवाई सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें कई देशों की एजेंसियां शामिल थीं.

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FBI समेत कई देशों की एजेंसियां शामिल
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसका अंतरराष्ट्रीय तालमेल था। CBI ने अमेरिका की FBI, यूनाइटेड किंगडम, कुवैत, आयरलैंड और सिंगापुर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर यह कार्रवाई की. इंटरपोल की मदद से सूचनाओं का आदान-प्रदान हुआ और ठगों के नेटवर्क को ट्रैक किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, यह साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे संगठित बहुराष्ट्रीय कार्रवाई में से एक है.

एक साथ 35 ठिकानों पर छापेमारी
Operation CyStrike के तहत एक ही दिन देशभर में 35 जगहों पर एकसाथ छापेमारी की गई. दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल तक CBI की टीमें पहुंचीं. हर जगह से डिजिटल सबूत जुटाए गए और संदिग्धों से पूछताछ की गई. अचानक हुई इस कार्रवाई से साइबर ठगों में अफरा-तफरी मच गई.

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विदेशी नागरिकों को ठगने का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी Pfokrehrii Peter फर्जी और छद्म ऑनलाइन पहचान का इस्तेमाल करता था. वह अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड, सिंगापुर और भारत के लोगों को निशाना बनाता था. डिजिटल फ्रॉड स्कीम्स के जरिए वह लोगों से पैसे ऐंठता और फिर रकम को अलग-अलग खातों में घुमा देता था. लंबे समय से चल रहे इस खेल का पर्दाफाश आखिरकार CyStrike में हुआ.

अमेरिका को टारगेट करने वाला मॉड्यूल
दिल्ली में हुई छापेमारी के दौरान CBI ने एक ऐसे साइबर फ्रॉड मॉड्यूल को तोड़ा, जो खासतौर पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था. जांच एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए. इन उपकरणों में ठगी से जुड़े अहम डिजिटल सबूत मिले. मौके से इस नेटवर्क के एक अहम ऑपरेटिव को गिरफ्तार भी किया गया है.

ई-वीजा के नाम पर ठगी का खुलासा
Operation CyStrike की दूसरी बड़ी कामयाबी फर्जी कुवैत वीजा स्कैम का खुलासा है. यह गिरोह eservicemoi-Kw.com नाम की वेबसाइट के जरिए खुद को कुवैत सरकार की ई-वीजा और रिक्रूटमेंट सेवा बताता था. दिल्ली, गाजियाबाद और कर्नाटक से यह नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था, जो देखने में पूरी तरह प्रोफेशनल लगता था.

नौकरी के नाम पर भारतीयों से ठगी
इस गिरोह ने भारत के बेरोजगार युवाओं को कुवैत की बड़ी कंपनियों में नौकरी और ई-वीजा दिलाने का लालच दिया. फर्जी ऑफर लेटर और अपॉइंटमेंट लेटर भेजकर उनसे मोटी रकम वसूली गई. छापेमारी के दौरान फर्जी कुवैती वीजा, जाली दस्तावेज, कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और करीब ₹60 लाख नकद बरामद किए गए.

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UK, आयरलैंड और सिंगापुर तक फैला जाल
CBI की जांच यहीं नहीं रुकी. एजेंसी ने उन मॉड्यूल्स को भी तोड़ा, जो UK, आयरलैंड और सिंगापुर के नागरिकों को ठग रहे थे. ठगी से मिली रकम को इधर-उधर भेजने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा था. इन खातों की पहचान कर उन्हें सील कर दिया गया, जिससे अपराध की कमाई का रास्ता बंद हो सके.

इंटरपोल के साथ कोऑर्डिनेशन
अधिकारियों के मुताबिक, Operation CyStrike को इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों के साथ बेहद करीबी समन्वय में अंजाम दिया गया. मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन तकनीकी नेटवर्क को तोड़ना था जो सीमाओं के पार बैठकर साइबर अपराध को अंजाम दे रहे थे. यह ऑपरेशन भविष्य के साइबर हमलों को रोकने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है.

आगे और गिरफ्तारी की तैयारी
CBI ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है. जब्त किए गए डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं. एजेंसी ने इसे अंतरराष्ट्रीय साइबर-फाइनेंशियल फ्रॉड गिरोहों के लिए बड़ा झटका बताया है. Operation CyStrike ने यह संदेश दे दिया है कि साइबर अपराधी अब कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं.

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