नादिया रेप-मर्डर केस: मुख्य आरोपी के तीनों दोस्त गिरफ्तार, धमकाने का है आरोप

मुख्य आरोपी ब्राजो गलई स्थानीय टीएमसी नेता का बेटा है. उसने अपने घर बर्थडे पार्टी में नाबालिग लड़की को बुलाया था. यहां रात में एक कमरे में गैंगरेप किया और बच्ची को उसके घर भिजवा दिया.

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हंसखली केस में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. हंसखली केस में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 24 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 9:32 PM IST
  • पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की घटना
  • TMC नेता का बेटा मुख्य आरोपी

पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में नाबालिग लड़की की कथित रेप-हत्या मामले में सीबीआई ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये तीनों लड़के मुख्य आरोपी ब्राजो गलई के दोस्त हैं. घटना में तीनों ने ब्राजो का साथ दिया और पीड़ित परिवार के घर जाकर धमकाया था. मामला हंसखली गांव का है.

बता दें कि मुख्य आरोपी ब्राजो गलई स्थानीय टीएमसी नेता का बेटा है. उसने अपने घर बर्थडे पार्टी में नाबालिग लड़की को बुलाया था. यहां रात में एक कमरे में गैंगरेप किया और बच्ची को उसके घर भिजवा दिया. इसके साथ ही धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो घर फूंक देंगे. बाद में लड़की की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई.

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जरूरी सबूत इकट्ठे नहीं कर पाई पुलिस

बताते चलें कि बंगाल पुलिस इस केस में कई जरूरी सबूत इकट्ठा नहीं कर पाई थी. इस बात पर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी और कहा था- पुलिस ने पीड़िता के घर से खून सनी बेडशीट तक जब्त नहीं की. पीड़िता का अंतिम संस्कार भी जल्दबाजी में कर दिया, जिस वजह से कई अहम सुराग छूट गए. 

आरोपियों ने डॉक्टर के पास ले जाने से रोका था

सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए इन तीनों आरोपियों ने ही 4 अप्रैल को पीड़ित परिवार को धमकी दे थी. आरोपियों ने नाबालिग लड़की को डॉक्टर के पास ले जाने से रोका था. अगली सुबह यानी 5 अप्रैल को नाबालिग लड़की की मौत हो गई और उसे एक अवैध श्मशान घाट में ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया. ऐसे में पीड़ित परिवार को डेथ सर्टिफिकेट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक नहीं मिल सकी है.

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हाईकोर्ट के आदेश पर जांच कर रही सीबीआई 

दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को दी है. कोर्ट ने आदेश में कहा था कि सीबीआई को मामले की निष्पक्ष जांच के लिए और पीड़ित परिवार के सदस्यों में विश्वास पैदा करने के लिए मामले को लेना चाहिए. कोर्ट ने सरकार से भी पीड़ित परिवार और मामले के गवाहों को सुरक्षा देने के आदेश दिया था.
 

 

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