कोरोना को मात देने के लिए कंपनी ने बनाया मूवेबल हॉस्पिटल, कहीं भी कर सकते हैं शिफ्ट

कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के सुधाकर ने गुरुवार को कोरोना और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने के लिए खासतौर पर बनाए गए अस्पताल का शुभारंभ किया.

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चलंत अस्पताल चलंत अस्पताल

aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 22 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 10:30 PM IST
  • कर्नाटक में हुई मूवेबल हॉस्पिटल की शुरुआत
  • वीवरा कंपनी ने बनाया है ये खास अस्पताल
  • अस्पताल कहीं भी किया जा सकता है शिफ्ट

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने और मरीजों को तुरंत इलाज की सुविधा देने के लिए कर्नाटक में एक मूवेबल हॉस्पिटल की शुरुआत की गई है. इस अस्पताल को जरूरत पर एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट भी किया जा सकता है. अस्पताल को खासतौर पर संक्रमित मरीजों के लिए तैयार किया गया है.

कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के सुधाकर ने कोरोना और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने के लिए खासतौर पर बनाए गए अस्पताल का शुभारंभ किया.

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उन्होंने कहा, 'इस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को बदलने की क्षमता है. इसे बनाने वाली स्टार्टअप कंपनी को स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और सस्ती बनाने के लिए कम लागत वाले समाधान को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.'

बेंगलुरु की कंपनी वीवरा ने इस अस्पताल को बनाया है और इसे 'वीवरा पोड' नाम दिया गया है. यह अस्पताल अग्नि प्रतिरोध क्षमता, एंटी-बैक्टीरियल दीवार, बैक्टीरिया को रोकने वाले फर्श, टॉयलेट और शॉवर क्यूबिकल्स से लैस है.

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इस मूवेबल हॉस्पिटल को बनाने के लिए वीवरा ने पुर्तगाल की एक फर्म इनोव वे ग्रुप के साथ करार किया है. इस अस्पताल को बनाने के लिए 500 वर्ग फुट के न्यूनतम स्थान की आवश्यकता होती है, इन पॉड्स को अस्पताल की इमारतों, पार्किंग स्थल या अस्पताल परिसर या खुली जगहों पर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

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इस "पॉड के पांच वैरिएंट्स आते हैं. जनरल पॉड, आईसीयू पॉड, डॉक्टर पॉड, ऑपरेशन थिएटर पॉड और स्कैनिंग रूम पॉड. प्रत्येक पॉड में चार से पांच बेड तक होते हैं.

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परियोजना के पीछे के विचार को समझाते हुए, कंपनी ने जारी किए गए बयान में कहा, “पॉड्स प्रोजेक्ट मुख्य रूप से किसी भी चिकित्सा संकट के लिए एक जवाब के रूप में शुरू किया गया था. महामारी के दौर में अत्यधिक संक्रमित रोगियों को उपयुक्त सुविधा नहीं मिल पाने, इलाज और बुनियादी सुविधाओं में कमी के कारण अधिकांश अस्पतालों में भीड़ लग गई थी. 


 

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