मेरठः कैंसर अस्पताल के कोरोना विज्ञापन पर रार, बाद में दी सफाई

मेरठ में एक अस्पताल के विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया. बाद में अस्पताल को स्पष्टीकरण जारी कर खेद जताना पड़ा है.

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थम नहीं रहे कोरोना वायरस संक्रमण के मामले (फाइल फोटो-PTI) थम नहीं रहे कोरोना वायरस संक्रमण के मामले (फाइल फोटो-PTI)

उस्मान चौधरी

  • मेरठ,
  • 19 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST

  • कोरोना को लेकर धार्मिक टिप्पणी के विज्ञापन पर विवाद
  • अस्पताल ने अगले दिन विज्ञापन देकर जताया अफसोस

कोरोना वायरस महामारी संकट के बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक अस्पताल के विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया. बाद में अस्पताल को स्पष्टीकरण जारी कर खेद जताना पड़ा है. विज्ञापन में कोरोना को लेकर मुस्लिम समुदाय पर आरोप लगाया गया था जबकि हिंदू और जैन के अधिकांश लोगों को कंजूस बताया गया था.

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क्या है मामला

असल में, मेरठ के वलेंटिस कैंसर अस्पताल की तरफ से 17 अप्रैल को अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था. विज्ञापन में मुस्लिम समाज के बारे में कहा गया था कि तबलीगी जमात से कोरोना वायरस की बीमारी बढ़ रही है. मुस्लिम लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं. स्वच्छता का पालन नहीं कर रहे हैं. साथ ही वो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. विज्ञापन में कहा गया था कि थूकना, चिकित्सकों, नर्सों, और चिकित्सा कर्मियों को संक्रमित करने की उनकी इच्छा उनकी दुर्भावना को जाहिर करती है.

विज्ञापन में कहा गया था कि जो भी कैंसर के मुस्लिम मरीज अस्पताल आएं उनसे अनुरोध है कि वे अपना और अपने तीमारदारों का कोरोना टेस्ट कराएं और रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही अस्पताल आएं. जिन मरीजों को इमरजेंसी में तुरंत भर्ती होने की आवश्यकता है उन्हें और उनके तीमारदार को कोरोना जांच के लिए प्रति व्यक्ति 4500 रुपये जमा करना होगा. हालांकि हॉस्पिटल की तरफ से यह भी कहा गया कि ये नियम मुस्लिम चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, जज, पुलिस, अफसर, शिया और अन्य मुस्लिम जो घनी मुस्लिम आबादी में नहीं रहते हैं, उन पर लागू नहीं होगा.

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इसी विज्ञापन पर हुआ विवाद

इसके अलावा विज्ञापन में हिंदू और जैन समाज के बारे में कहा गया कि इनमें अधिकांश लोग कंजूस हैं. उनसे आग्रह है कि वो प्रधानमंत्री केयर्स फंड में सहयोग राशि दें.

अस्पताल ने बाद में दी सफाई

इस विज्ञापन के बाद अस्पताल की काफी किरकिरी हुई. अगले दिन उसे स्पष्टीकरण और खंडन का विज्ञापन छापना पड़ा. अस्पताल के स्पष्टीकरण में कहा गया है कि हॉस्पिटल की भावना हिंदू, मुस्लिम, जैन, सिख, ईसाई सब को साथ लेकर चलने की है. किसी की भावना को ठेस पहुंचाने की हॉस्पिटल की मंशा कभी नहीं रही. अगर किसी की भावना को ठेस पहुंची है तो दिल से खेद व्यक्त करते हैं.

अस्पताल ने फिर विज्ञापन के जरिये दी सफाई

जब हॉस्पिटल के मैनेजमेंट से फोन पर बात की गई तो डॉ. अमित जैन ने कहा कि हमारे विज्ञापन को गलत तरीके से लिया गया. जबकि हॉस्पिटल की मंशा सब को सतर्क और सहयोग करने की थी कि ये महामारी न फैले और जल्द इस पर लगाम लगे. किसी को ठेस पहुंचाने की मंशा नहीं थी. वहीं पुलिस का कहना है कि इस मामले में किसी से कोई शिकायत नहीं मिली है.

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