एम्स ने शुरू किया पोस्ट कोविड रिकवरी क्लिनिक, ठीक हो चुके मरीजों की होगी जांच

कोरोना के ज्यादातर रिकवर मरीजों में फेफड़ों की क्षति, सांस की कमी और अन्य गंभीर बीमारी हो रही हैं. नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल ने कोविड से रिकवर होने वाले मरीजों के लिए एक क्लिनिक शुरू किया है, जिसमें इन सब चीजों को मॉनिटर किया जाएगा.

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रिकवर हो चुके कोरोना मरीजों की होगी जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर) रिकवर हो चुके कोरोना मरीजों की होगी जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST

  • हमें रिकवरी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता- रणदीप गुलेरिया
  • रिकवर हुए मरीजों के फेफड़े कमजोर होने की शिकायत- एम्स डायरेक्टर

कोरोना वायरस के मामले भारत में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. भारत में कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या अन्य देशों की तुलना में काफी ज्यादा है. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना के ज्यादातर मरीज ठीक होने में ज्यादा समय ले रहे हैं और हमें रिकवरी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है.

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कोरोना के ज्यादातर रिकवर मरीजों में फेफड़ों की क्षति, सांस की कमी और अन्य गंभीर बीमारी हो रही हैं. नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल ने कोविड से रिकवर होने वाले मरीजों के लिए एक क्लिनिक शुरू किया है, जिसमें इन सब चीजों को मॉनिटर किया जाएगा.

एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने इंडिया टुडे से कहा, 'जब से हमारा रिकवरी रेट बढ़ा है, तबसे हमने पोस्ट कोविड रिकवरी पेशेंट पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. हम ऐसे मरीजों के लिए एम्स में पोस्ट रिकवरी क्लिनिक शुरू करने जा रहे हैं. जो भी मरीज ठीक हुए हैं उनका आकलन उनकी हो रही समस्याओं के आधार पर किया जाएगा. चाहे वह हृदय की समस्या हो, या फेफड़ों पर प्रभाव.'

कोरोना से ठीक हुए मरीजों को हो रही है गंभीर परेशानी

गुलेरिया ने आगे कहा, 'कुछ मरीजों को ऐसी बीमारी हो रही है जो कोविड का ही परिणाम है. कई मरीजों को फेफड़े खराब होने और ऑक्सीजन की कमी की शिकायत भी आ रही है और ये सब कोविड निगेटिव आने के बाद भी बनी हुई है. कई रिकवर हुए मरीजों में शरीर में दर्द, थकान और आलस जैसे लक्षण भी होते हैं.'

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रणदीप गुलेरिया ने आगे कहा, 'हम रिकवर हुई मरीजों की फेफड़ों की क्षमता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करेंगे, चाहे वह व्यायाम, योग, आहार या यहां तक ​​कि दवाओं के माध्यम से हो. कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले कई डॉक्टरों ने बताया है कि वायरस का न केवल फेफड़ों पर, बल्कि शरीर के अन्य अंगों पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है. डॉक्टर्स का मानना है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई मरीजों को लंबे समय तक सूखी खांसी, बेचैनी और सामान्य कमजोरी आम लक्षण है.

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