संकट बहुत बड़ा है! निर्मला बोलीं- सरकार का फिलहाल '3Fs' पर फोकस, जानिए क्या है ये फॉर्मूला

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कच्चा तेल महंगा होने से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे बाकी चीजें भी महंगी होने लगी हैं. लेकिन सरकार की पूरी कोशिश है कि आम आदमी पर कम बोझ डाला जाए.

Advertisement
निर्मला सीतारमण ने बताया सरकार का कहां है फोकस. (Photo: ITG) निर्मला सीतारमण ने बताया सरकार का कहां है फोकस. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया है. मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तीन 'Fs'— Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Forex (विदेशी मुद्रा) के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीएम मोदी के उस हालिया अपील का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने विदेशी मुद्रा के संरक्षण और सोने जैसे गैर-जरूरी आयातों को कम करने की अपील की थी. 

Advertisement

कच्चे तेल में उछाल से भारत पर असर
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है. खाड़ी क्षेत्र और खासकर होर्मुज (Hormuz) में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. इसके सीधे प्रभाव के रूप में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम जनता और माल ढुलाई पर दबाव बढ़ा है. तेल कंपनियों द्वारा अपने घाटे की भरपाई के लिए ईंधन की दरों में मई महीने में ही कई बार संशोधन किया जा चुका है.

इसके अलावा वित्त मंत्री ने इस बात को भी रेखांकित किया कि वैश्विक संकट के कारण देश के घरेलू राजस्व पर भी असर पड़ रहा है. ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती के कारण वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) में सरकारी राजस्व को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. यह स्थिति देश के राजकोषीय संतुलन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.

Advertisement

MSME सेक्टर की लिक्विडिटी पर चिंता
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) को कड़े निर्देश दिए कि वे MSME के बकाये का भुगतान 45 दिनों की निर्धारित समय सीमा के भीतर करें. फिलहाल करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी राशि भुगतान में देरी के कारण अटकी हुई है. इस देरी की वजह से छोटे व्यवसायों के पास वर्किंग कैपिटल की भारी कमी हो रही है और उनकी लिक्विडिटी प्रभावित हो रही है.

इसके साथ ही वित्त मंत्री ने देश में किसी भी प्रकार की डर या घबराहट फैलाने वाली बयानबाजी के खिलाफ चेतावनी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और लचीली बनी हुई है. भारत को डरने के बजाय बाहरी आर्थिक मोर्चे पर आ रहे इन दबावों को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करने और अपनी आर्थिक स्थिरता पर भरोसा बनाए रखने की आवश्यकता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement