बजट के बाद बुधवार को शुरू हुई भारतीय रिजर्व बैंक की पहली मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक आज ब्याज दरों में कटौती को लेकर फैसला लेगी. हालांकि पिछली बार की तरह ही इस बार भी कर्ज सस्ता होने की उम्मीद कम ही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बचेगा.
दरअसल बजट में ऐसी कई घोषणाएं सरकार ने की हैं, जिनके चलते राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा महंगाई बढ़ने का खतरा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रही कच्चे तेल की कीमतें आरबीआई का हाथ रोक सकती है. इससे संभावना यही जताई जा रही है कि इस बैठक में ब्याज दरों में कटौती होने की गुंजाइश ना के बराबर है.
इससे पहले अक्टूबर में हुई की बैठक में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था. इस दौरान भी महंगाई और अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला लिया गया. इसे 6 फीसदी ही रखा गया.
इसके अलावा समिति ने पर भी नाखुशी जताई थी. आरबीआई ने विकास दर के अपने पिछले अनुमान को भी घटा दिया. आरबीआई ने विकास दर के अनुमान को 7.3 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया था. बजट के बाद हो रही इस बैठक में इस पर भी नजर रहेगी कि आरबीआई विकास दर के अनुमान में भी कोई बदलाव करना है या नहीं.
इससे पहले पिछले साल अगस्त में आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती की थी. केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में इस दौरान 0.25 फीसदी तक कटौती की थी. इस कटौती के बाद रेपो रेट 6 फीसदी हो गया था.
विकास जोशी